छत्तीसगढ़ की समृद्ध जैव विविधता और प्राकृतिक विरासत को नई पहचान देने की दिशा में वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग ने एक बड़ी पहल शुरू की है। राज्य में पहली बार “राजकीय तितली” घोषित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इस पहल का उद्देश्य प्रदेश में पाई जाने वाली दुर्लभ और आकर्षक तितली प्रजातियों के संरक्षण को बढ़ावा देना और लोगों को पर्यावरण संरक्षण से जोड़ना है। वन विभाग ने इस महत्वपूर्ण निर्णय में आम नागरिकों की भागीदारी को प्राथमिकता दी है। इसके लिए ऑनलाइन जनमत (Google Form Voting) के माध्यम से प्रदेशवासियों से उनकी पसंद मांगी गई है। यह पहली बार होगा जब छत्तीसगढ़ की किसी प्राकृतिक धरोहर के प्रतीक के चयन में आम लोगों की राय को शामिल किया जा रहा है।
वन मंत्री ने की लोगों से मतदान की अपील
वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप ने प्रदेशवासियों से इस अभियान में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने की अपील की है। उन्होंने कहा कि जैव विविधता का संरक्षण केवल सरकार या वन विभाग की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि समाज के प्रत्येक व्यक्ति का कर्तव्य है। उन्होंने कहा कि जब किसी प्राकृतिक प्रतीक का चयन जनभागीदारी से किया जाता है, तो लोगों में प्रकृति, वन्यजीव और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जुड़ाव और जिम्मेदारी की भावना और मजबूत होती है। राजकीय तितली बनने के बाद संबंधित प्रजाति के संरक्षण और उसके महत्व को लेकर जागरूकता भी बढ़ेगी।विशेषज्ञ समिति ने चुनीं तीन तितली प्रजातियां
राजकीय तितली के चयन के लिए वन विभाग द्वारा गठित विशेषज्ञ समिति ने वैज्ञानिक और पारिस्थितिक मानकों का अध्ययन करने के बाद तीन तितली प्रजातियों को अंतिम सूची में शामिल किया है। इन प्रजातियों का चयन उनकी राज्य में मौजूदगी, पारिस्थितिक भूमिका, संरक्षण महत्व, अलग पहचान और लोगों के बीच आकर्षण जैसे कई पहलुओं को ध्यान में रखते हुए किया गया है। चयनित तीन प्रजातियां इस प्रकार हैं विशेषज्ञों के अनुसार, इन तीनों तितलियों में छत्तीसगढ़ की प्राकृतिक विविधता को दर्शाने की क्षमता है। इनके चयन से प्रदेश की जैव विविधता को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलने में मदद मिल सकती है।
31 अगस्त तक कर सकेंगे ऑनलाइन मतदान
वन विभाग ने नागरिकों की राय जानने के लिए Google Form के माध्यम से ऑनलाइन मतदान की सुविधा शुरू कर दी है। प्रदेश का कोई भी नागरिक अपनी पसंद की तितली के लिए वोट कर सकता है। ऑनलाइन मतदान की अंतिम तारीख 31 अगस्त 2026 तय की गई है। इसके बाद प्राप्त जनमत और विशेषज्ञ समिति की सिफारिशों के आधार पर राज्य की राजकीय तितली के नाम का अंतिम प्रस्ताव तैयार किया जाएगा।विद्यार्थियों से भागीदारी की अपील
वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग ने प्रदेश के विद्यार्थियों, शिक्षकों, प्रकृति प्रेमियों, शोधकर्ताओं और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े संगठनों से इस अभियान में सक्रिय भागीदारी करने की अपील की है। विभाग का कहना है कि अधिक से अधिक लोगों की भागीदारी से राजकीय तितली का चयन केवल एक सरकारी प्रक्रिया नहीं रहेगा, बल्कि यह पूरे प्रदेश की पर्यावरणीय चेतना और प्रकृति के प्रति लगाव का प्रतीक बनेगा। राजकीय तितली के चयन से छत्तीसगढ़ की जैव विविधता को नई पहचान मिलने के साथ-साथ तितलियों के संरक्षण और उनके प्राकृतिक आवासों को बचाने के प्रयासों को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है।