"ऐतिहासिक स्थल" के लिए 14 परिणाम मिले
रायपुर संभाग
Arang News: चंदखुरी का मां कौशल्या मंदिर, माता की गोद में विराजते हैं बाल श्रीराम
Arang News: चंदखुरी स्थित मां कौशल्या मंदिर माता की गोद में विराजित बाल श्रीराम की प्रतिमा, धार्मिक मान्यताओं और ऐतिहासिक विरासत के लिए प्रसिद्ध है।
राज्य सरकार
Chhattisgarh Tourism: छत्तीसगढ़ पर्यटन को मिलेगा नया मंच, 10 श्रेणियों में दिए जाएंगे विश्व पर्यटन दिवस पुरस्कार
Chhattisgarh Tourism: छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड की ओर से पर्यटन क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वालों को प्रोत्साहित करने के लिए ‘विश्व पर्यटन दिवस पुरस्कार-2026’ दिए जाएंगे। होटल, टूर ऑपरेटर, जिला, पर्यटन स्टार्टअप, रिसॉर्ट, होमस्टे, सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर, इको-टूरिज्म और एडवेंचर टूरिज्म समेत 10 श्रेणियों में पुरस्कार दिए जाएंगे। प्रत्येक विजेता को ₹11 हजार की राशि और मेमेंटो मिलेगा। आवेदन की अंतिम तिथि 15 सितंबर 2026 है।
राज्य सरकार
GPM Heritage: ऐतिहासिक धरोहरों को मिलेगा संरक्षण, GPM में पुरातत्व विशेषज्ञों ने किया स्थल निरीक्षण
GPM Heritage: गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले की ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण और संवर्धन की दिशा में विशेषज्ञ दल ने धनपुर, बेनीबाई, भस्मासुर टापू और शहरखेरवा के पुरातात्विक स्थलों का मैदानी सर्वेक्षण किया। विशेषज्ञों ने पुरावशेषों, मूर्तियों और प्राचीन मंदिरों की स्थिति का जायजा लिया। कलेक्टर ने संरक्षण एवं सुदृढ़ीकरण के कार्य जल्द पूरा करने के निर्देश दिए।
बिलासपुर
स्केटिंग से भारत भ्रमण पर निकले रुद्र पटेल, 16 राज्यों का सफर पूरा कर पहुंचे छत्तीसगढ़
मध्यप्रदेश के रुद्र पटेल स्केटिंग से 16 राज्यों की यात्रा पूरी कर छत्तीसगढ़ पहुंचे हैं। वे भारत भ्रमण के दौरान लोगों को भारतीय संस्कृति, गौ माता और सनातन धर्म के प्रति जागरूक कर रहे हैं।
यात्रा
वादियों का जादू : इस मानसून महाबलेश्वर की यात्रा और आसपास की 5 सबसे खास जगहें
महाराष्ट्र के महाबलेश्वर में प्रकृति, इतिहास और रोमांच का अनोखा संगम देखने को मिलता है। यहां के आसपास पंचगनी, प्रतापगढ़ किला, तपोला, लिंगमाला वॉटरफॉल और वेन्ना लेक जैसी खूबसूरत जगहें पर्यटकों को आकर्षित करती हैं। हरे-भरे पहाड़, झरने, झीलें और ऐतिहासिक स्थल महाबलेश्वर की यात्रा को यादगार बना देते हैं।
रायपुर
राष्ट्रपति भवन में बस्तर की संस्कृति का सम्मान, प्रतिनिधिमंडल का आत्मीय स्वागत बना यादगार पल
राष्ट्रपति भवन में बस्तर से पहुंचे जनजातीय प्रतिनिधिमंडल का राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने आत्मीय स्वागत कर शॉल और स्मृति-चिह्न भेंट किए। इस दौरान कलाकारों ने बस्तर की लोक संस्कृति की शानदार प्रस्तुति दी, वहीं प्रतिनिधियों ने बदलते बस्तर, शांति और विकास के अनुभव साझा किए।
छत्तीसगढ़
राष्ट्रपति भवन में गूंजा बस्तर का गौरव : राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने खुद परोसा भोजन, बस्तर दशहरा आने की जताई इच्छा
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने राष्ट्रपति भवन में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में पहुंचे बस्तर पंडुम-2026 के विजेताओं, मांझी-चालकी और जनजातीय प्रतिनिधियों सहित 209 सदस्यीय दल का विशेष अतिथि के रूप में स्वागत किया।
राष्ट्रीय
समान नागरिक संहिता विधेयक : मध्य प्रदेश कैबिनेट की मंजूरी, मानसून सत्र में होगा पेश
मध्य प्रदेश कैबिनेट ने समान नागरिक संहिता (UCC) विधेयक के ड्राफ्ट को मंजूरी दे दी है। मुख्यमंत्री मोहन यादव की अध्यक्षता में रविवार को यह बड़ा फैसला लिया गया।
राष्ट्रीय
3 मिनट में 2 बार कांपी धरती : गुजरात के कच्छ में भूकंप के तगड़े झटके, लोगों में दहशत
गुजरात के कच्छ जिले में गुरुवार दोपहर को अचानक सामान्य माहौल के बीच धरती कांप उठी। यहां महज 3 मिनट के भीतर भूकंप के दो लगातार झटके महसूस किए गए। इससे पूरे इलाके में अचानक अफरा-तफरी का माहौल बन गया। लोग डर के मारे अपने दफ्तरों और घरों से बाहर खुले में आ गए।
भोजशाला विवाद : सुप्रीम कोर्ट का बड़ा सुझाव, नमाज के लिए तय होगी जगह
मध्य प्रदेश के धार में स्थित भोजशाला परिसर को लेकर चल रहा विवाद एक बार फिर सुर्खियों में है। इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को महत्वपूर्ण सुनवाई की है।
राज्य सरकार
सोमनाथ यात्रा का शंखनाद : छत्तीसगढ़ की संस्कृति और माटी लेकर रवाना होंगे 1000 दिग्गज
सीएम साय दिखाएंगे हरी झंडी: रायपुर रेलवे स्टेशन पर सुबह 11 बजे मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय इस विशेष ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना करेंगे। इस ऐतिहासिक मौके पर संस्कृति व धर्मस्व मंत्री राजेश अग्रवाल कार्यक्रम की अध्यक्षता करेंगे जबकि रायपुर के कई सांसद विधायक और महापौर भी यात्रियों का उत्साह बढ़ाने पहुंचेंगे।
रायपुर
खत्म हुआ इंतजार : सीएम साय के निर्देश से आदिवासी समाज में दौड़ी खुशी की लहर
बड़ा संदेश इस फैसले को सिर्फ एक पूजा की अनुमति के रूप में नहीं बल्कि छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा आदिवासियों की मूल संस्कृति जल-जंगल-जमीन की परंपराओं और उनकी धार्मिक आस्था को सहेजने की एक बड़ी प्रतिबद्धता के रूप में देखा जा रहा है।