"किसान" के लिए 709 परिणाम मिले
कोरबा
खेती में आया बड़ा बदलाव : किसान मान सिंह कंवर ने बताई सफलता की कहानी
कोरबा जिले के ग्राम नवापारा के अनुभवी किसान मान सिंह कंवर ने बताया कि शासन की किसान हितैषी योजनाओं के कारण किसानों को अब समय पर खाद, बीज और उर्वरक उपलब्ध हो रहे हैं, जिससे खेती की तैयारी आसान हुई है। उन्होंने आधुनिक कृषि तकनीकों और नैनो उर्वरकों को खेती के लिए लाभकारी बताते हुए कहा कि इनके उपयोग से कम लागत में बेहतर उत्पादन मिलता है और मिट्टी की गुणवत्ता भी बनी रहती है।
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सफलता : करेला की खेती ने बदली किसान दीपक की तकदीर, धान से 7 गुना अधिक कमाई
महासमुंद जिले के बसना विकासखंड के ग्राम बंसुलीडीह के प्रगतिशील किसान श्री दीपक ने राष्ट्रीय बागवानी मिशन योजना के तहत करेला की खेती अपनाकर उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। ड्रिप सिंचाई, मल्चिंग और आधुनिक कृषि तकनीकों के उपयोग से उन्हें प्रति एकड़ लगभग 18 टन उत्पादन प्राप्त हुआ।
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दुग्ध क्रांति : 156 दुग्ध समितियों से किसानों को मिल रहा लाभ
महासमुंद जिले में पशुपालन और दुग्ध व्यवसाय ग्रामीणों की आय का महत्वपूर्ण स्रोत बनकर उभर रहा है। जिले से प्रतिदिन लगभग 34 हजार लीटर दूध का विक्रय देवभोग दुग्ध महासंघ और निजी डेयरियों के माध्यम से किया जा रहा है।
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विकास को नई दिशा : मनरेगा की आजीविका डबरी से बदली किसान की किस्मत
सरगुजा जिले के ग्राम अडची में मनरेगा के तहत बनी आजीविका डबरी किसान देवानंद के लिए आय और सिंचाई का मजबूत साधन बन गई है। लगभग 2 लाख रुपये की लागत से निर्मित इस डबरी से वे खेती की सिंचाई के साथ-साथ मत्स्य पालन भी कर रहे हैं, जिससे उनकी अतिरिक्त आय बढ़ रही है।
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खेत बचाओ अभियान : किसानों को वैज्ञानिक खेती और जैविक विकल्पों की दी जानकारी
कृषि विभाग द्वारा जिले में संचालित खेत बचाओ अभियान के तहत बसना एवं सरायपाली विकासखंड के विभिन्न ग्रामों में कृषक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए। नौगड़ी, जोगनीपाली, बालसी, भोथलडीह, सिरबोड़ा, चकरदा, बिरकोल, परसदा और कोटेनदरहा सहित कई गांवों में किसानों को टिकाऊ एवं वैज्ञानिक खेती, हरी खाद के उपयोग, संतुलित उर्वरक प्रबंधन और मृदा स्वास्थ्य संरक्षण की जानकारी दी गई।
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नई मिसाल : अम्बिकापुर के किसान बने जैविक खेती के प्रेरणास्रोत
सरगुजा जिले के अम्बिकापुर विकासखंड के ग्राम पंचायत लब्जी और नावापारा के प्रगतिशील किसान धनेश्वर प्रसाद ने रासायनिक खेती को छोड़कर पूरी तरह जैविक खेती अपनाई है। 6 एकड़ भूमि पर खेती करने वाले धनेश्वर ने कृषि विभाग के मार्गदर्शन में मिट्टी परीक्षण कराया, जिसमें नाइट्रोजन की कमी पाई गई।
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क्रांति : कम लागत में बढ़ रही पैदावार, किसानों को मिल रहा सीधा लाभ
नैनो यूरिया और नैनो डीएपी जैसे आधुनिक तरल उर्वरक खेती में क्रांतिकारी बदलाव ला रहे हैं, जिससे कम लागत में बेहतर उत्पादन संभव हो रहा है। खरीफ 2026 के लिए प्रशासन ने खाद-बीज की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित की है। कोरबा के किसान छेदीलाल उरांव ने इनके उपयोग से बेहतर परिणाम मिलने की बात कही और हरित खाद अपनाकर मिट्टी की उर्वरा शक्ति बढ़ाने का प्रयास किया।
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उर्वरक : सहकारी समितियों के जरिए किसानों तक पहुंच रहा खाद, 108 किसानों को मिला लाभ
खरीफ 2026 के लिए जिले में किसानों को समय पर उर्वरक उपलब्ध कराने प्रशासन ने व्यापक तैयारियां की हैं। कलेक्टर विनय कुमार लंगेह द्वारा खाद-बीज की उपलब्धता, भंडारण और वितरण की रोजाना समीक्षा की जा रही है। जिले की 159 सहकारी समितियों और निजी विक्रेताओं के माध्यम से किसानों को खाद वितरित किया जा रहा है।
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अभियान : प्राकृतिक खेती और मृदा स्वास्थ्य संरक्षण को लेकर किसानों में जागरूकता तेज
जिले में कृषि विभाग द्वारा 01 जून से 30 जून 2026 तक “खेत बचाओ अभियान” चलाया जा रहा है, जिसका उद्देश्य रासायनिक उर्वरकों के सीमित उपयोग और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देना है। अभियान के तहत किसानों को मृदा स्वास्थ्य पर रासायनिक उर्वरकों के दुष्प्रभाव, जैविक खेती के लाभ तथा उर्वरक विकल्पों जैसे नैनो यूरिया, जैव उर्वरक, हरी खाद और सूक्ष्म पोषक तत्वों की जानकारी दी जा रही है।
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उत्पादन : नैनो उर्वरकों से किसान को मिला बेहतर उत्पादन, लागत में आई कमी
ग्राम कोसरंगी के प्रगतिशील किसान भूषण साहू ने अपनी धान की फसल में नैनो डीएपी और नैनो यूरिया प्लस का उपयोग कर बेहतर परिणाम प्राप्त किए हैं। कृषि विभाग और इफको महासमुंद के सहयोग से किए गए डेमोंस्ट्रेशन के बाद उन्होंने पाया कि इन तरल उर्वरकों से फसल स्वस्थ रही और उत्पादन पारंपरिक खेती के समान रहा, जबकि दानेदार खाद की खपत में कमी आई।
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किसानों को बड़ी राहत : कोरबा में खाद-बीज पर्याप्त, प्रशासन सख्त मोड में
कोरबा जिले में खरीफ 2026 के लिए खाद और बीज की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है। कृषि विभाग के अनुसार जिले में पर्याप्त भंडारण मौजूद है और किसानों को किसी भी तरह की कमी नहीं होने दी जाएगी। कलेक्टर ने खाद-बीज वितरण में अनियमितता और कालाबाजारी पर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने के लिए जैविक और हरी खाद जैसे ढैंचा, मूंग और नील
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बदली किस्मत : उद्यानिकी खेती अपनाकर किसान ने रचा सफलता का नया इतिहास
किसान रतिराम पटेल ने पारंपरिक धान खेती छोड़कर उद्यानिकी फसलों की ओर रुख किया और राष्ट्रीय बागवानी मिशन के तहत धनिया की खेती अपनाई। ड्रिप सिंचाई व मल्चिंग जैसी आधुनिक तकनीकों के उपयोग से उन्होंने उत्पादन और गुणवत्ता में सुधार किया। लगभग 0.87 हेक्टेयर क्षेत्र में खेती कर उन्हें बेहतर पैदावार और करीब 50 हजार रुपये तक का लाभ मिला।