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सिल्क समग्र 2 योजना से रेशम उत्पादन को बढ़ावा, 21 किसानों को मिला लाभ
महासमुंद जिले में केंद्र प्रायोजित सिल्क समग्र 2 योजना से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल रही है। योजना के तहत अब तक 21 किसानों का चयन कर शहतूत पौधरोपण कराया गया है। यह योजना 5 एकड़ से कम भूमि वाले छोटे एवं सीमांत किसानों को रेशम उत्पादन के जरिए अतिरिक्त आय का अवसर देती है, जिसमें प्रति वर्ष लगभग 1 से 1.5 लाख रुपये तक की शुद्ध आय संभव है। किसानों को पौधरोपण, सिंचाई, कृमि पालन गृह निर्माण और उपकरणों के लिए कुल 5 लाख रुपये तक की सहायता दी जा रही है, जिसमें केंद्र और राज्य सरकार की हिस्सेदारी शामिल है।
बीज समिति की बैठक में दलहन-तिलहन उत्पादन बढ़ाने और किसानों को आत्मनिर्भर बनाने की कार्ययोजना को मिली मंजूरी
जिला स्तरीय बीज समिति की बैठक में दलहन और तिलहन फसलों के उत्पादन, वितरण और भंडारण को बढ़ाने पर समीक्षा की गई। बैठक में आत्मनिर्भर दलहन मिशन और राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन के तहत अरहर, उड़द, मूंग और चना के बीज वितरण एवं उत्पादन लक्ष्यों को मंजूरी दी गई। किसानों को प्रमाणित बीज पर 50% या अधिकतम ₹6000 तक अनुदान देने का निर्णय लिया गया।
खेती की ओर कदम : मिट्टी की सेहत और किसानों की आय बढ़ाने का प्राकृतिक उपाय
हरी खाद (Green Manure) टिकाऊ खेती का एक प्राकृतिक और प्रभावी उपाय है, जिसमें ढैंचा, सनई, मूंग, उड़द जैसी फसलों को उगाकर फूल आने पर मिट्टी में मिला दिया जाता है। इससे मिट्टी में जैविक पदार्थ और नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ती है, जिससे उसकी उर्वरता और संरचना में सुधार होता है। यह मिट्टी को भुरभुरा बनाकर जल धारण क्षमता बढ़ाती है और लाभकारी सूक्ष्मजीवों को सक्रिय करती है।
लैलूंगा के किसान ने गेंदा फूल की खेती से बढ़ाई आय, धान की तुलना में कई गुना अधिक मुनाफा हासिल
रायगढ़ जिले के लैलूंगा विकासखंड के ग्राम गमेकेरा के किसान ईश्वरचरण पैकरा ने पारंपरिक धान की खेती छोड़कर गेंदा फूल की खेती अपनाई, जिससे उनकी आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई। राष्ट्रीय बागवानी मिशन और उद्यानिकी विभाग के मार्गदर्शन में 0.400 हेक्टेयर भूमि पर की गई इस खेती से उन्हें लगभग 38 क्विंटल उत्पादन मिला और करीब 2.59 लाख रुपये का शुद्ध लाभ हुआ, जो धान की खेती की तुलना में कई गुना अधिक है। उनकी इस सफलता से गांव के अन्य किसान भी फूलों की खेती की ओर प्रेरित हो रहे हैं।
ग्राफ्टेड टमाटर की खेती से किसान दुबेलाल बने सफल, कम लागत में मिला तीन लाख से अधिक का लाभ
महासमुन्द जिले के ग्राम बम्बुरडीह के किसान श्री दुबेलाल कोसरे ने उद्यानिकी विभाग की सहायता से आधुनिक खेती अपनाकर ग्राफ्टेड टमाटर की खेती की। उन्होंने ड्रिप सिंचाई, मल्चिंग और उन्नत पौधों का उपयोग करते हुए 0.40 हेक्टेयर भूमि में लगभग 16–18 टन प्रति एकड़ उत्पादन प्राप्त किया। टमाटर के अच्छे बाजार मूल्य से उन्हें करीब ₹3.09 लाख का लाभ हुआ, जो पारंपरिक धान की खेती से कई गुना अधिक है। उनकी इस सफलता से क्षेत्र के अन्य किसान भी आधुनिक उद्यानिकी तकनीकों को अपनाने के लिए प्रेरित हो रहे हैं।
छत्तीसगढ़
जिले में PM-AASHA योजना के तहत रबी 2025-26 दलहन–तिलहन खरीदी शुरू, किसानों को समर्थन मूल्य का लाभ
छत्तीसगढ़
पांडुका में खुली नई सहकारी समिति, 5 गांवों के 832 किसानों को मिलेगा सीधा फायदा
पांडुका में नई सहकारी समिति शुरू होने से 5 गांवों के 832 किसानों को राहत मिलेगी। अब कृषि से जुड़ी सुविधाएं गांव में ही उपलब्ध होंगी, जिससे समय और लागत दोनों की बचत होगी।
रायपुर
भीषण गर्मी में भी लहलहा रही रबी धान, कोल्हान नाला किनारे किसानों की मेहनत लाई रंग
आरंग के धमनी और कोटनी गांव में 150 एकड़ से ज्यादा में रबी धान की फसल लहलहा रही है। बोरवेल से सिंचाई कर किसानों ने भीषण गर्मी में भी फसल बचाई, 15 मई से पहले कटाई की संभावना।
छत्तीसगढ़
बंजर जमीन बनी सोने की खान: किसान लक्ष्मीकांत साहू ने ऑयल पाम से लिखी सफलता की कहानी
पिथौरा विकासखंड के ग्राम बेलडीह के किसान लक्ष्मीकांत साहू ने बंजर भूमि पर ऑयल पाम की खेती शुरू कर उल्लेखनीय सफलता हासिल की। उद्यानिकी विभाग के मार्गदर्शन और सरकारी योजना के तहत मिली सहायता से उन्होंने ड्रिप सिंचाई, बोरवेल और फेंसिंग जैसी आधुनिक सुविधाएं अपनाईं। साथ ही अंतरवर्तीय फसल के रूप में बैंगन और करेला उगाकर अतिरिक्त आय प्राप्त की। बैंगन से ही उन्हें अच्छा मुनाफा हुआ, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत हुई। उनकी सफलता से आसपास के किसान भी आधुनिक खेती और ऑयल पाम की ओर प्रेरित हो रहे हैं।
छत्तीसगढ़
जिले में 31,981 टन उर्वरक उपलब्ध, किसानों को समय पर परमिट लेने की अपील
जिले में खरीफ 2026 के लिए कुल 31,981 टन उर्वरक सहकारी समितियों और निजी विक्रय केंद्रों में उपलब्ध कराया गया है। इसमें यूरिया, डीएपी, एसएसपी, पोटाश और एनपीके शामिल हैं।
कम लागत, ज्यादा मुनाफा : मधुमक्खी पालन से किसानों की बढ़ रही आमदनी
छत्तीसगढ़ में मधुमक्खी पालन किसानों के लिए कम लागत में ज्यादा मुनाफा देने वाला विकल्प बन रहा है। राष्ट्रीय बागवानी मिशन के तहत जशपुर में किसानों को बी बॉक्स, छत्ता और शहद निकालने की मशीन पर अनुदान दिया जा रहा है। इससे न केवल शहद उत्पादन से आय बढ़ रही है, बल्कि फसलों की पैदावार भी बेहतर हो रही है। यह व्यवसाय ग्रामीण युवाओं और महिलाओं के लिए रोजगार का अच्छा माध्यम बनते हुए पर्यावरण संरक्षण में भी योगदान दे रहा है।
छत्तीसगढ़
सहकारिता से किसानों का विकास: नवागांव कला में नई समिति की शुरुआत
नवागांव कला में पिथौरा क्षेत्र के किसानों के लिए नवगठित ग्रामीण सेवा सहकारी समिति का गुरुवार को विधिवत शुभारंभ किया गया।