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प्रोबायोटिक्स बैक्टीरिया : कैंसर के खिलाफ हथियार, नए अध्ययन में संकेत
अमेरिका के UCF कॉलेज ऑफ मेडिसिन में चल रहे एक नए शोध में यह जांच की जा रही है कि क्या प्रोबायोटिक्स एसिड रिफ्लक्स और इससे जुड़े इसोफेगल कैंसर के खतरे को कम कर सकते हैं। शोधकर्ताओं का मानना है कि लाभकारी बैक्टीरिया पाचन तंत्र की सूजन कम कर भोजन नली की सुरक्षा कर सकते हैं। यदि यह शोध सफल होता है तो भविष्य में एसिड रिफ्लक्स और इसोफेगल कैंसर की रोकथाम के लिए एक नया, सुरक्षित और प्रभावी उपचार विकल्प उपलब्ध हो सकता है।
शिगेला बैक्टीरिया : बना खतरा, केरल में मासूम की मौत के बाद बढ़ी चिंता
केरल में चार वर्षीय बच्चे की शिगेला संक्रमण से मौत के बाद स्वास्थ्य विभाग अलर्ट पर है। शिगेला एक अत्यंत संक्रामक बैक्टीरियल संक्रमण है, जो दूषित भोजन, पानी और संक्रमित व्यक्ति के संपर्क से फैलता है। यह विशेष रूप से बच्चों के लिए खतरनाक माना जाता है और गंभीर दस्त, बुखार तथा डिहाइड्रेशन का कारण बन सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि स्वच्छता और समय पर इलाज ही इससे बचाव का सबसे प्रभावी तरीका है।
कैंसर : लगातार खांसी और सांस फूलना हो सकता है लंग कैंसर का संकेत
लंग कैंसर दुनिया के सबसे घातक कैंसरों में से एक है, जिसकी पहचान अक्सर देर से होती है। लगातार खांसी, खून आना, सांस फूलना, वजन घटना, कमजोरी और सीने में दर्द इसके प्रमुख लक्षण हैं। धूम्रपान, वायु प्रदूषण और कुछ आनुवंशिक कारण इसके जोखिम को बढ़ाते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि समय पर जांच, जागरूकता और स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर इस गंभीर बीमारी से बचाव और सफल उपचार संभव है।
मानव यौनिकता : हार्मोन और आकर्षण का उद्दीपन
मानव यौनिकता पर हुई नई वैज्ञानिक रिसर्च में सामने आया है कि सेक्स ड्राइव (लिबिडो) और सेक्सुअल ओरिएंटेशन (यौन आकर्षण) दो अलग-अलग प्रक्रियाएं हैं। शोधकर्ताओं के अनुसार टेस्टोस्टेरोन समेत अन्य हार्मोन मुख्य रूप से यौन इच्छा को प्रभावित करते हैं, लेकिन वे किसी व्यक्ति का यौन आकर्षण या सेक्सुअल ओरिएंटेशन तय नहीं करते। वैज्ञानिकों का मानना है कि यौन आकर्षण आनुवंशिकी, मस्तिष्क के विकास, गर्भावस्था के दौरान होने वाले जैविक प्रभावों और पर्यावरणीय कारकों के जटिल संयोजन से विकसित होता है। यह अध्ययन हार्मोन और मानव यौनिकता को लेकर प्रचलित कई गलतफहमियों को चुनौती देता है।
रेड अलर्ट : 45 डिग्री के पार पहुंचा पारा, सेहत को बचाने के लिए डॉक्टरों ने जारी की नई गाइडलाइन
देश के कई हिस्सों में तापमान 45 से 48 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है और मौसम विभाग ने रेड अलर्ट जारी किया है। भीषण गर्मी के कारण अस्पतालों में हीट स्ट्रोक, डिहाइड्रेशन और पेट संबंधी संक्रमण के मरीज तेजी से बढ़ रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार इस मौसम में पर्याप्त पानी, ORS, छाछ, नारियल पानी और पानी से भरपूर फलों का सेवन जरूरी है।
गजब की खोज : रोजाना सिर्फ 20 मिनट की यह आदत बदल देगी आपकी सेहत, दिल की बीमारियों का खतरा होगा आधा
एक नई ग्लोबल हेल्थ रिपोर्ट के अनुसार, रोजाना केवल 20 से 25 मिनट की तेज वॉक या हल्की शारीरिक गतिविधि करने से दिल की बीमारियों और टाइप-2 डायबिटीज का खतरा 40% से 50% तक कम हो सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि लंबे समय तक बैठे रहना स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन रहा है।
मच्छरों से लड़ाई : नया प्रयोग, फ्लोरिडा और कैलिफोर्निया में छोड़े जाएंगे विशेष मच्छर
अमेरिका में डेंगू, चिकनगुनिया और जीका जैसी मच्छर जनित बीमारियों पर नियंत्रण के लिए Google की पैरेंट कंपनी डीबग प्रोजेक्ट ने कैलिफोर्निया और फ्लोरिडा में करीब 3.2 करोड़ विशेष नर मच्छर छोड़ने की योजना बनाई है। इन मच्छरों में वोल्बाकिया नामक बैक्टीरिया होता है, जो बीमारी फैलाने वाली एडीज एजिप्टी मच्छरों की आबादी को कम करने में मदद करता है।
एचआईवी : मरीजों में लंबे दर्द का मिला नया सुराग, वैज्ञानिकों का बड़ा खुलासा
एचआईवी से संक्रमित आधे से अधिक लोगों को जीवन में कभी न कभी लंबे समय तक रहने वाले दर्द (क्रोनिक पेन) की समस्या का सामना करना पड़ता है। इस दर्द के कारणों को समझने के लिए यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्सास एमडी एंडरसन कैंसर सेंटर के वैज्ञानिकों ने चूहों पर अध्ययन किया। एचआईवी से जुड़ी जैविक प्रक्रियाएं तंत्रिका कोशिकाओं के कामकाज को प्रभावित कर सकती हैं, जिससे दर्द के संकेत अधिक तीव्र हो जाते हैं और दर्द लंबे समय तक बना रहता है। शोधकर्ताओं का मानना है कि यह अध्ययन एचआईवी मरीजों में होने वाले क्रोनिक पेन के बेहतर इलाज और नई उपचार पद्धतियों के विकास का मार्ग प्रशस्त कर सकता है।
AI : आसान हो रहा हर काम, लेकिन क्या खो रही है इंसान की मौलिक सोच ?
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) ने कामकाज, शिक्षा और रचनात्मक क्षेत्रों में क्रांतिकारी बदलाव लाए हैं, लेकिन इसके बढ़ते उपयोग ने मानव सोच और रचनात्मकता पर इसके प्रभाव को लेकर नई बहस छेड़ दी है। हालिया शोधों में संकेत मिले हैं कि AI पर अत्यधिक निर्भरता लोगों की आलोचनात्मक सोच, समस्या-समाधान क्षमता और स्वतंत्र निर्णय लेने की आदत को कमजोर कर सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि AI स्वयं खतरा नहीं है, बल्कि उसका अंधाधुंध उपयोग चिंता का विषय है। तकनीक के इस दौर में अपनी रचनात्मकता और स्वतंत्र सोच को बनाए रखने के लिए लोगों को AI को सहायक उपकरण की तरह इस्तेमाल करना चाहिए, न कि उसके ऊपर पूरी तरह निर्भर होना चाहिए।
ब्रेन हेल्थ : अध्ययन में सामने आए चिंताजनक नतीजे,नैनोप्लास्टिक
एक नई वैज्ञानिक रिसर्च में पाया गया है कि छोटे आकार के नैनोप्लास्टिक कण मस्तिष्क की तंत्रिका कोशिकाओं (न्यूरॉन्स) की गतिविधियों में अधिक बदलाव पैदा कर सकते हैं। अध्ययन के अनुसार ये सूक्ष्म प्लास्टिक कण मस्तिष्क की कोशिकाओं के भीतर प्रवेश कर उनकी संरचना और कार्यप्रणाली को प्रभावित कर सकते हैं। शोधकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि नैनोप्लास्टिक का बढ़ता संपर्क भविष्य में न्यूरोलॉजिकल समस्याओं और मस्तिष्क संबंधी बीमारियों के जोखिम को बढ़ा सकता है। इस शोध ने प्लास्टिक प्रदूषण को केवल पर्यावरणीय नहीं, बल्कि मानव स्वास्थ्य के लिए भी एक गंभीर चुनौती के रूप में सामने रखा है।
रजोनिवृत्ति : मेनोपॉज के बाद ब्लीडिंग है खतरे की घंटी, डॉक्टरों ने दी चेतावनी
पीरियड्स के समय के अलावा होने वाली ब्लीडिंग को सामान्य मानकर नजरअंदाज करना महिलाओं के लिए जोखिम भरा साबित हो सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार दो पीरियड्स के बीच ब्लीडिंग, संबंध बनाने के बाद रक्तस्राव, अत्यधिक मासिक धर्म या मेनोपॉज के बाद ब्लीडिंग जैसी स्थितियां कई बार गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का संकेत हो सकती हैं। खासकर 40 वर्ष की उम्र के बाद इस तरह के लक्षणों को हल्के में नहीं लेना चाहिए।
अल्जाइमर : उपचार में नई दिशा, लेकिन निर्णायक सफलता अभी दूर
अल्जाइमर रोग के इलाज के लिए विकसित की जा रही नई दवाओं ने दुनियाभर में उम्मीदें जरूर जगाई हैं, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि इन्हें अभी चमत्कारी इलाज नहीं माना जा सकता। हालिया शोधों में पाया गया है कि कुछ नई दवाएं बीमारी की प्रगति को धीमा करने में मदद कर सकती हैं, लेकिन इनके लाभ सीमित हैं। साथ ही दुष्प्रभाव, ऊंची लागत और नियामकीय मतभेदों ने इनके व्यापक उपयोग को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।