सेहत
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सिर्फ 5-10% वजन कम करने से फैटी लिवर और डायबिटीज में मिल सकता है फायदा
फैटी लिवर और टाइप-2 डायबिटीज से जूझ रहे लोगों के लिए वजन कम करना फायदेमंद हो सकता है। शरीर के कुल वजन का 5 से 10 प्रतिशत कम करने से लिवर में जमा वसा घटने, इंसुलिन रेजिस्टेंस में सुधार और ब्लड शुगर को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है। विशेषज्ञ संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और चिकित्सकीय सलाह के साथ धीरे-धीरे वजन घटाने की सलाह देते हैं।
रोज पीते हैं Energy Drink? जानिए हार्ट और किडनी पर कैसे पड़ता है असर
रोजाना एनर्जी ड्रिंक पीने से शरीर में कैफीन और शुगर की मात्रा बढ़ सकती है। अधिक सेवन से दिल की धड़कन तेज होने, ब्लड प्रेशर बढ़ने, नींद प्रभावित होने और बेचैनी जैसी समस्याओं का जोखिम बढ़ सकता है। खासकर हार्ट या किडनी की बीमारी वाले लोगों को इसके सेवन में सावधानी बरतनी चाहिए।
थायरॉइड की दवा लेने के तुरंत बाद न करें नाश्ता, इन चीजों से भी बनाएं दूरी
हाइपोथायरॉइडिज्म के मरीजों को शरीर में हार्मोन की कमी पूरी करने के लिए आमतौर पर लेवोथायरोक्सिन दवा दी जाती है। इसे सुबह खाली पेट सादे पानी के साथ और रोजाना एक निश्चित समय पर लेने की सलाह दी जाती है। नियमित समय पर दवा लेने से शरीर में हार्मोन का स्तर नियंत्रित रखने में मदद मिल सकती है।
फूड प्रोडक्ट्स के विज्ञापन पर FSSAI सख्त, सेलिब्रिटी-इंफ्लुएंसर को मानने होंगे ये 3 नियम
FSSAI ने फूड प्रोडक्ट्स के विज्ञापन को लेकर सेलिब्रिटी और इंफ्लुएंसर के लिए गाइडलाइन जारी की है। प्रचार से पहले उत्पाद से जुड़े दावों की जांच करनी होगी। गलत या भ्रामक विज्ञापन पर कार्रवाई हो सकती है।
मानसून के साथ बढ़ा मलेरिया का प्रकोप, 8 हजार से ज्यादा मरीज, एनएचआरसी ने सरकार को भेजा नोटिस
मानसून के साथ मलेरिया का प्रकोप बढ़ गया है। प्रदेश में 8,426 से अधिक मामले सामने आए हैं। कांकेर में 13 दिनों में 5 मौतों के बाद राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने राज्य सरकार से चार सप्ताह में रिपोर्ट मांगी है।
लंबे समय तक ईयरबड्स लगाने से कानों को हो सकता है नुकसान, इस्तेमाल क्यों है खतरनाक?
सोते समय ईयरबड्स लगाकर रहना कई लोगों की आदत बन चुकी है, लेकिन लंबे समय तक इसका इस्तेमाल कानों की सेहत को प्रभावित कर सकता है। लगातार ईयरबड्स पहनने से कान में नमी, वैक्स जमा होने, संक्रमण, दर्द और सुनने की क्षमता पर असर पड़ने का खतरा बढ़ सकता है। कम आवाज में सीमित समय के लिए ईयरबड्स का इस्तेमाल सुरक्षित माना जाता है, लेकिन पूरी रात इन्हें पहनने से बचना चाहिए।
ऑफिस जाते ही बढ़ जाता है गुस्सा? कहीं ये मास्क्ड हाइपरटेंशन का संकेत तो नहीं
ऑफिस का बढ़ता तनाव, लंबे समय तक लैपटॉप पर काम करना और खराब जीवनशैली युवाओं में ब्लड प्रेशर की समस्या बढ़ा रही है। कई लोगों का बीपी डॉक्टर के पास सामान्य रहता है, लेकिन काम या रोजमर्रा की गतिविधियों के दौरान बढ़ जाता है। इस स्थिति को मास्क्ड हाइपरटेंशन कहा जाता है, जो बिना लक्षण के भी हार्ट, किडनी और स्ट्रोक जैसी गंभीर समस्याओं का खतरा बढ़ा सकता है।
सेहत के लिए कितना पानी जरूरी? सही मात्रा और पीने का तरीका जानें
पानी शरीर के लिए बेहद जरूरी है, लेकिन जरूरत से ज्यादा पानी पीना भी नुकसानदायक हो सकता है। हर व्यक्ति की पानी की जरूरत उम्र, मौसम, शारीरिक गतिविधि और स्वास्थ्य के अनुसार अलग होती है। जानिए रोज कितना पानी पीना चाहिए, पानी पीने का सही तरीका और ज्यादा पानी से होने वाले नुकसान।
सोशल मीडिया न्यूट्रिशन ट्रेंड से सावधान, हर वायरल सलाह नहीं होती वैज्ञानिक
सोशल मीडिया पर न्यूट्रिशन से जुड़ी कई ऐसी बातें तेजी से वायरल होती हैं, जिनका वैज्ञानिक आधार नहीं होता। क्लोरोफिल ड्रॉप से डिटॉक्स, जरूरत से ज्यादा प्रोटीन, सीड ऑयल को जहर बताना, कार्ब्स से डरना और ग्लूटेन को हर किसी के लिए नुकसानदायक मानना जैसे कई दावे सिर्फ भ्रम हैं। एक्सपर्ट के अनुसार संतुलित डाइट, पर्याप्त पोषण और सही जानकारी ही बेहतर स्वास्थ्य की कुंजी है।
शरीर में गांठ को न करें नजरअंदाज, ये संकेत दिखें तो तुरंत कराएं जांच
शरीर में किसी भी हिस्से में गांठ महसूस होना लोगों के मन में डर पैदा कर देता है। कई बार लोग इसे तुरंत कैंसर से जोड़ लेते हैं, जबकि हर गांठ कैंसर नहीं होती। वहीं दूसरी ओर कुछ लोग इसे सामान्य समस्या मानकर लंबे समय तक जांच नहीं कराते, जो बाद में परेशानी बढ़ा सकती है।
सावन के पहले सोमवार पर बनाएं मलाईदार नारियल रबड़ी, व्रत के लिए है स्वादिष्ट और आसान मिठाई
सावन के पहले सोमवार पर व्रत रखने वालों के लिए नारियल रबड़ी एक स्वादिष्ट और सात्विक मिठाई का विकल्प है। दूध, ताजे नारियल और कुछ आसान सामग्री से घर पर मलाईदार रबड़ी तैयार की जा सकती है। जानें इसकी आसान रेसिपी और स्वाद बढ़ाने के टिप्स।
मोतियाबिंद : देखभाल में बरतें सावधानी, बढ़ती उम्र में आंखों की सेहत का रखें खास ख्याल
मोतियाबिंद अब सिर्फ बुजुर्गों तक सीमित नहीं है। डायबिटीज, धूम्रपान, प्रदूषण, ज्यादा स्क्रीन टाइम और खराब जीवनशैली के कारण कम उम्र में भी इसका खतरा बढ़ रहा है। स्वस्थ आदतें जैसे यूवी किरणों से बचाव, संतुलित आहार, ब्लड शुगर नियंत्रण, धूम्रपान से दूरी और नियमित आंखों की जांच से मोतियाबिंद की बढ़ती रफ्तार को कम किया जा सकता है। हालांकि, गंभीर स्थिति में सर्जरी ही इसका प्रभावी इलाज है।