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मेंटल हेल्थ : तनाव और अकेलापन बना रहे लोगों को मानसिक रूप से कमजोर
आज की तेज रफ्तार जिंदगी में तनाव, अकेलापन, सोशल मीडिया का दबाव और काम की भागदौड़ लोगों की मानसिक शांति छीन रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार कमजोर मेंटल हेल्थ के कारण छोटी-छोटी परेशानियां भी बड़ी लगने लगती हैं। रिसर्च में सामने आया है कि अच्छी नींद, मजबूत रिश्ते, नियमित व्यायाम, डिजिटल ब्रेक और खुद के लिए समय निकालना मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाकर खुश रहने में मदद कर सकता है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन : ब्लड प्रेशर ,कमजोर इम्यूनिटी तक, जानिए कौन सी चीजें पहुंचाती हैं नुकसान
World Health Organization यानी WHO के अनुसार ज्यादा नमक, चीनी, जंक फूड, धूम्रपान, शराब, तनाव और शारीरिक गतिविधि की कमी शरीर को गंभीर नुकसान पहुंचा सकती है। ये तत्व हाई ब्लड प्रेशर, कमजोर हड्डियां, कम इम्यूनिटी, मोटापा और दिल की बीमारियों का खतरा बढ़ाते हैं। विशेषज्ञों ने संतुलित भोजन, नियमित व्यायाम, पर्याप्त नींद और हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाने की सलाह दी है।
पेरिमेनोपॉज : महिलाओं में बदलते पीरियड्स और मानसिक स्वास्थ्य पर बड़ा असर
40 की उम्र के बाद महिलाओं में पेरिमेनोपॉज के कारण पीरियड्स अनियमित होने लगते हैं। इस दौरान हार्मोनल बदलाव के चलते हॉट फ्लैश, मूड स्विंग, नींद की समस्या और मानसिक तनाव जैसे कई लक्षण दिखाई दे सकते हैं।
गर्मियों : बासी खाना बन सकता है बीमारी की वजह, जानिए कैसे रहें सुरक्षित
गर्मियों में बासी या सही तरीके से न रखा गया भोजन जल्दी खराब हो सकता है, जिससे फूड पॉइजनिंग, उल्टी, दस्त और पेट दर्द जैसी समस्याएं हो सकती हैं। विशेषज्ञों के अनुसार बचा हुआ खाना सही तापमान पर स्टोर करना और दोबारा अच्छी तरह गर्म करके खाना जरूरी है।
मोबाइल-लैपटॉप : बढ़ाई आंखों की परेशानी, तेजी से फैल रहा ड्राई आई सिंड्रोम
मोबाइल, लैपटॉप और लंबे स्क्रीन टाइम की वजह से ‘ड्राई आई सिंड्रोम’ के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। आंखों में जलन, खुजली, भारीपन और धुंधलापन इसके प्रमुख लक्षण हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक समय पर सावधानी और स्क्रीन टाइम नियंत्रित करके आंखों को इस समस्या से बचाया जा सकता है।
महिलाओं : गंभीर हार्मोनल बीमारी PCOS अब PMOS कहलाएगी
पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (PCOS) का नाम अब बदलकर पॉलीएंडोक्राइन मेटाबॉलिक ओवेरियन सिंड्रोम (PMOS) रखा गया है। विशेषज्ञों के अनुसार यह सिर्फ ओवरी की नहीं, बल्कि हार्मोन, मेटाबॉलिज्म और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी गंभीर स्थिति है। इसके लक्षणों में अनियमित पीरियड्स, वजन बढ़ना, मुंहासे, अनचाहे बाल और गर्भधारण में दिक्कत शामिल हो सकती है। डॉक्टरों का कहना है कि सही खानपान, नियमित व्यायाम, वजन नियंत्रण और समय पर इलाज से इसे काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।
वायु प्रदूषण : बना साइलेंट किलर, बच्चों के फेफड़ों पर सबसे ज्यादा असर
देश में बढ़ते वायु प्रदूषण और PM2.5 के ऊंचे स्तर के कारण अस्थमा (Asthma) और COPD जैसी फेफड़ों की बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं। अब सिर्फ धूम्रपान करने वाले ही नहीं, बल्कि बच्चे और नॉन-स्मोकर्स भी इसकी चपेट में आ रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार जहरीले प्रदूषण कण फेफड़ों में गहराई तक पहुंचकर सांस संबंधी गंभीर समस्याएं पैदा कर रहे हैं। डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि यदि प्रदूषण पर नियंत्रण नहीं किया गया, तो आने वाले समय में यह बड़ा सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट बन सकता है।
मोबाइल फोन : घंटों मोबाइल चला रहे बच्चे, मानसिक और शारीरिक विकास पर पड़ रहा बुरा असर
मोबाइल फोन का बढ़ता इस्तेमाल बच्चों के मानसिक, शारीरिक और सामाजिक विकास पर गंभीर असर डाल रहा है। WHO और कई अंतरराष्ट्रीय रिसर्च के अनुसार जरूरत से ज्यादा स्क्रीन टाइम बच्चों में बोलने में देरी, ध्यान की कमी, नींद की समस्या, चिड़चिड़ापन, मोटापा और मानसिक तनाव जैसी समस्याएं बढ़ा सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि मोबाइल और सोशल मीडिया की लत बच्चों को वास्तविक दुनिया से दूर कर रही है, जिससे उनका व्यवहार और आत्मविश्वास भी प्रभावित हो रहा है। ऐसे में अभिभावकों को बच्चों का स्क्रीन टाइम सीमित करने, आउटडोर गतिविधियों को बढ़ावा देने और घर में डिजिटल अनुशासन लागू करने की जरूरत है।
अनियमित खानपान : बढ़ रहीं बीमारियां, हेल्दी डाइट अपनाने की सलाह
आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोगों का डेली फूड रूटीन तेजी से बिगड़ रहा है। देर रात खाना, सुबह नाश्ता छोड़ना, जंक फूड का अधिक सेवन और पर्याप्त पानी नहीं पीने जैसी आदतें लोगों की सेहत पर बुरा असर डाल रही हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार अनियमित खानपान की वजह से मोटापा, डायबिटीज, ब्लड प्रेशर और पेट संबंधी बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं। डॉक्टरों का कहना है कि सुबह पौष्टिक नाश्ता, संतुलित दोपहर का भोजन और रात में हल्का खाना शरीर को स्वस्थ रखने के लिए बेहद जरूरी है। विशेषज्ञों ने लोगों को जंक फूड कम खाने, पर्याप्त पानी पीने, नियमित व्यायाम करने और घर का बना भोजन प्राथमिकता देने की सलाह दी है।
इम्यूनिटी : बढ़ाने से लेकर शरीर को ऊर्जा देने तक, स्प्राउट्स हैं हेल्थ का पावरहाउस
स्प्राउट्स सेहत के लिए बेहद फायदेमंद माने जाते हैं, लेकिन गलत तरीके से खाने पर उल्टी, दस्त, गैस, पेट दर्द और फूड पॉइजनिंग का खतरा बढ़ सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार स्प्राउट्स को हमेशा अच्छी तरह धोकर, हल्का उबालकर और सीमित मात्रा में खाना चाहिए। वहीं सही तरीके से सेवन करने पर ये पाचन सुधारने, वजन घटाने, इम्यूनिटी बढ़ाने और शरीर को ऊर्जा देने में मदद करते हैं।
याददाश्त : कमजोर होने के पीछे क्या हैं कारण? जानिए बचाव के तरीके
भारत में भूलने की बीमारी यानी डिमेंशिया और अल्जाइमर के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार देश में लाखों बुजुर्ग इससे प्रभावित हैं। बढ़ती उम्र, तनाव, खराब जीवनशैली, डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और नींद की कमी इसके प्रमुख कारण माने जाते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि समय पर पहचान, नियमित व्यायाम, मानसिक गतिविधियां और संतुलित आहार से इसके खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है। बादाम, अखरोट, हरी सब्जियां, फल, दूध, मछली और ओमेगा-3 युक्त भोजन दिमाग को स्वस्थ रखने में मददगार माना जाता है।
गर्मी में दूध वाली चाय : दूरी जरूरी ,विशेषज्ञों ने बताए हेल्दी विकल्प, सेहत को मिल सकता है बड़ा फायदा
गर्मी के मौसम में दूध वाली चाय को सेहत के लिए नुकसानदायक बताया जा रहा है। डाइटिशियन के अनुसार इसमें मौजूद दूध चाय के एंटीऑक्सीडेंट गुणों को कम कर देता है, जिससे इसके फायदे घट जाते हैं। विशेषज्ञों ने ग्रीन टी, हर्बल टी, नींबू पानी, नारियल पानी और हर्बल इन्फ्यूजन ड्रिंक्स को बेहतर विकल्प बताया है, जो शरीर को ठंडक देने के साथ डिटॉक्स और हाइड्रेशन में मदद करते हैं।