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कुपोषण और एनीमिया : बच्चों व महिलाओं के लिए गंभीर स्वास्थ्य संकट
भारत में कुपोषण और एनीमिया एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या बन चुके हैं, जिनका सबसे अधिक असर बच्चों और महिलाओं पर पड़ रहा है। 5 वर्ष से कम उम्र के बच्चों में स्टंटिंग और कमजोर विकास की समस्या व्यापक है, जबकि बड़ी संख्या में महिलाएँ एनीमिया से ग्रसित हैं। कुपोषण का मुख्य कारण संतुलित आहार की कमी, आयरन और पोषक तत्वों का अभाव, गरीबी, स्वच्छता की कमी और जागरूकता की कमी है। इसका प्रभाव बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास, रोग प्रतिरोधक क्षमता और भविष्य की उत्पादकता पर पड़ता है, वहीं महिलाओं में कमजोरी, गर्भावस्था की जटिलताएँ और मातृ मृत्यु का जोखिम बढ़ता है।
मानसिक स्वास्थ्य संकट : युवाओं के लिए एक गंभीर चुनौती, जानें कारण, लक्षण और समाधान
आज के समय में मानसिक स्वास्थ्य एक गंभीर और बढ़ती हुई समस्या बन चुका है, विशेषकर युवाओं और बच्चों में। पढ़ाई, करियर की प्रतिस्पर्धा, सोशल मीडिया का अत्यधिक उपयोग, पारिवारिक तनाव और असंतुलित जीवनशैली इसके प्रमुख कारण हैं। इसके चलते तनाव, चिंता, अकेलापन, नींद की कमी और आत्मविश्वास में गिरावट जैसे लक्षण देखने को मिलते हैं, जो आगे चलकर अवसाद का रूप ले सकते हैं। इस समस्या से बचाव के लिए खुलकर बातचीत, योग, ध्यान, नियमित व्यायाम, संतुलित दिनचर्या और सोशल मीडिया का सीमित उपयोग आवश्यक है। गंभीर स्थिति में विशेषज्ञ की मदद लेना भी जरूरी है।
स्वास्थ्य संकट : जंक फूड और तनाव का असर, बढ़ती बीमारियों की सच्चाई
भारत में अब संक्रमण वाली बीमारियों की तुलना में लाइफस्टाइल और क्रॉनिक बीमारियाँ तेजी से बढ़ रही हैं, जिनमें डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, हार्ट डिजीज, मोटापा, फैटी लिवर और थायरॉइड प्रमुख हैं। इसकी मुख्य वजहें गलत खानपान, जंक फूड, कम शारीरिक गतिविधि, तनाव और नींद की कमी हैं। ये समस्याएँ अब युवाओं में भी तेजी से दिख रही हैं। शुरुआती लक्षण अक्सर सामान्य लगते हैं, इसलिए लोग उन्हें नजरअंदाज कर देते हैं। संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, पर्याप्त नींद, तनाव नियंत्रण और समय-समय पर हेल्थ चेकअप से इन बीमारियों से काफी हद तक बचाव संभव है।
हृदय रोग : सबसे बड़ी स्वास्थ्य चुनौती, हार्ट अटैक और दिल की बीमारियां, जानें कारण और बचाव
हृदय रोग आज के समय में एक तेजी से बढ़ती स्वास्थ्य समस्या है, जिसका मुख्य कारण खराब जीवनशैली, असंतुलित आहार, तनाव, शारीरिक गतिविधि की कमी, धूम्रपान और मोटापा है। यह अब केवल बुजुर्गों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि युवाओं में भी तेजी से बढ़ रहा है। इसके प्रमुख प्रकारों में कोरोनरी आर्टरी डिजीज, हार्ट अटैक, हार्ट फेलियर, अरिदमिया और हाई ब्लड प्रेशर से जुड़ी समस्याएं शामिल हैं, जो दिल की कार्यक्षमता को प्रभावित करती हैं। इसके शुरुआती लक्षणों में सीने में दर्द, सांस फूलना, थकान, चक्कर आना और अनियमित धड़कन शामिल हैं। इन संकेतों को नजरअंदाज करना खतरनाक हो सकता है।
बेड का संकट : रायपुर एम्स में गंभीर मरीजों को भी नहीं मिल रही जगह, रेफर के भरोसे इलाज
AIIMS Raipur में मरीजों की संख्या लगातार बढ़ने के कारण स्वास्थ्य व्यवस्था पर भारी दबाव है। रोज़ हजारों मरीज OPD और इमरजेंसी में पहुंच रहे हैं, जबकि 1000 बेड क्षमता कम पड़ रही है। नतीजतन कई गंभीर मरीजों को भी बेड न मिलने पर अन्य अस्पतालों जैसे Dr. Bhimrao Ambedkar Memorial Hospital में रेफर किया जा रहा है। इमरजेंसी में आने वाले मरीजों को घंटों इंतजार करना पड़ता है और कई बार समय पर इलाज न मिलने से स्थिति गंभीर हो जाती है। MRI, CT स्कैन जैसी जांचों के लिए लंबी कतारें और रिपोर्ट में देरी भी इलाज को प्रभावित कर रही हैं, जिससे मरीजों को निजी लैब का सहारा लेना पड़ रहा है और खर्च बढ़ रहा है।
सलाह : गर्मी में सही व सेहतमंद खानपान और इलेक्ट्रोलाइट्स का संतुलन सबसे अहम
गर्मी के बढ़ते तापमान में शरीर तेजी से पानी और जरूरी मिनरल्स (इलेक्ट्रोलाइट्स) खो देता है, जिससे डिहाइड्रेशन, थकान, चक्कर और गंभीर मामलों में हीट स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार, सिर्फ पानी पीना पर्याप्त नहीं है; सोडियम, पोटैशियम और मैग्नीशियम जैसे इलेक्ट्रोलाइट्स का संतुलन बनाए रखना भी जरूरी है। इससे बचाव के लिए नारियल पानी, छाछ, नींबू पानी और ORS जैसे पेय फायदेमंद हैं। तरबूज, खरबूजा और खीरा जैसे पानी से भरपूर फल शरीर को ठंडा रखते हैं।
औचक निरीक्षण : जिला अस्पताल कीअव्यवस्थाओं पर कांग्रेस ने उठाएं गंभीर सवाल
शहर कांग्रेस अध्यक्ष गुरमीत चावला और पदाधिकारियों ने जिला अस्पताल का औचक निरीक्षण कर कई गंभीर अव्यवस्थाओं पर नाराजगी जताई। निरीक्षण में पेयजल व्यवस्था, वेस्टर्न टॉयलेट, दवाओं की कमी, सोनोग्राफी सेवा बंद होना और सीटी स्कैन मशीन न होने जैसी समस्याएं सामने आईं। इसके अलावा एम्बुलेंस के कथित दुरुपयोग का आरोप लगाया गया और अस्पताल प्रबंधन पर संसाधनों के गलत उपयोग का सवाल उठाया गया। कांग्रेस नेताओं ने तत्काल सुधार की मांग करते हुए चेतावनी दी कि जल्द सुधार न होने पर आंदोलन किया जाएगा।
सावधान : AC से धूप में कदम रख रहे हैं तो जानिए शरीर के अंदर क्या-क्या होगा और उससे कैसे बचें
एसी से सीधे धूप में जाना शरीर के लिए अचानक तापमान बदलाव का झटका होता है, जिससे दिल, दिमाग और रक्त वाहिकाएं प्रभावित होती हैं। चक्कर, थकान और डिहाइड्रेशन की समस्या बढ़ सकती है। धीरे-धीरे तापमान बदलें, पानी पिएं और सावधानी बरतकर इस असर से बचा जा सकता है।
निखरेगा चेहरा : झुलसाती गर्मी में भी आयुर्वेद के दोष सिद्धांत से पाएं नेचुरल ग्लो
गर्मियों में त्वचा की समस्याएं बढ़ना आम है, लेकिन आयुर्वेद के वात, पित्त और कफ सिद्धांत के अनुसार देखभाल करने से नैचुरल ग्लो पाया जा सकता है। चंदन, त्रिफला और एलोवेरा जैसे प्राकृतिक उपाय स्किन को ठंडक और पोषण देते हैं, जिससे बिना केमिकल भी चेहरा दमकता रहता है।