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15 जुलाई को धरना देंगे प्रदेशभर के कोटवार
15 जुलाई को धरना देंगे प्रदेशभर के कोटवार
छत्तीसगढ़

कोटवारों का आंदोलन : 15 जुलाई को तहसील मुख्यालयों में धरना, मुख्यमंत्री के नाम सौंपेंगे ज्ञापन

प्रदेश के करीब 16 हजार कोटवार अपनी लंबित मांगों को लेकर 15 जुलाई को सभी तहसील मुख्यालयों में एक दिवसीय धरना-प्रदर्शन करेंगे। प्रदर्शन के बाद मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा जाएगा। संघ ने नियमितीकरण, शासकीय कर्मचारी का दर्जा, 15 हजार रुपये मानदेय समेत कई मांगें रखी हैं। मांगें पूरी नहीं होने पर 15 अगस्त के बाद अनिश्चितकालीन आंदोलन की चेतावनी दी गई है।

कीर्तिमान ब्यूरो
प्रकाशित: 01 Jul 2026, 07:44 PM · अपडेट: 10 Jul 2026, 09:09 AM
आरंग
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश

प्रदेश के करीब 16 हजार कोटवार अपनी लंबित मांगों को लेकर एक बार फिर आंदोलन की राह पर हैं। कोटवार एसोसिएशन ऑफ छत्तीसगढ़ की प्रांतीय संघर्ष समिति के आह्वान पर 15 जुलाई को प्रदेश के सभी तहसील मुख्यालयों में एक दिवसीय धरना-प्रदर्शन किया जाएगा। आंदोलन के बाद दोपहर 3 बजे राजस्व अधिकारियों के माध्यम से मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपकर मांगों के जल्द निराकरण की मांग की जाएगी।

प्रदेश अध्यक्ष प्रेम किशोर बाघ ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर बताया कि कोटवार वर्षों से शासन-प्रशासन के विभिन्न कार्यों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। गांवों में सूचना पहुंचाने से लेकर राजस्व, कानून-व्यवस्था और अन्य प्रशासनिक कार्यों में उनकी जिम्मेदारी लगातार बढ़ी है, लेकिन इसके बावजूद उनकी मूलभूत मांगें आज तक पूरी नहीं हो सकी हैं।

उन्होंने कहा कि प्रदेश के लगभग 16 हजार कोटवार लंबे समय से नियमितीकरण और शासकीय कर्मचारी का दर्जा देने की मांग कर रहे हैं। कई बार शासन का ध्यान इस ओर आकर्षित कराया गया, लेकिन अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया। इससे कोटवारों में लगातार नाराजगी बढ़ रही है।

सम्मानजनक वेतन और सामाजिक सुरक्षा की मांग

संघ का कहना है कि कोटवारों से लगातार सरकारी कार्य कराए जाते हैं, लेकिन उन्हें न तो सम्मानजनक मानदेय मिलता है और न ही पेंशन, ग्रेच्युटी तथा अन्य सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ। उनका आरोप है कि नियुक्तियों में भी कई जगह अनियमितताएं होती हैं और कोटवार परिवार के पात्र सदस्यों को प्राथमिकता नहीं दी जाती। इसके अलावा बिना जांच कार्रवाई, झूठी शिकायतों के आधार पर दंडात्मक कदम और अनावश्यक ड्यूटी जैसी समस्याओं का भी सामना करना पड़ता है।

ये हैं प्रमुख मांगें

संघ ने शासन के सामने नियमितीकरण, राजस्व विभाग में शासकीय कर्मचारी का दर्जा, प्रतिमाह न्यूनतम 15 हजार रुपये मानदेय, नियुक्ति में कोटवार परिवार के पात्र सदस्यों को प्राथमिकता, बिना जांच कार्रवाई पर रोक, अनावश्यक बेगार समाप्त करने तथा नगर पालिका और नगर निगम क्षेत्रों में कोटवारों की नियुक्ति पर लगे प्रतिबंध को हटाने की मांग रखी है।

15 अगस्त तक फैसले का इंतजार, फिर अनिश्चितकालीन आंदोलन

प्रदेश अध्यक्ष प्रेम किशोर बाघ ने कहा कि यदि 15 अगस्त से पहले सरकार उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लेती है, तो 15 अगस्त के बाद प्रदेश के सभी कोटवार जिला और प्रदेश स्तर पर अनिश्चितकालीन आंदोलन शुरू करेंगे। उन्होंने कहा कि आंदोलन से उत्पन्न होने वाली स्थिति की पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।

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