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गो-तस्करी का बड़ा खेल, हर सप्ताह बिकते हैं 5000 से ज्यादा मवेशी
गो-तस्करी का बड़ा खेल, हर सप्ताह बिकते हैं 5000 से ज्यादा मवेशी
गरियाबंद

गो-तस्करी नेटवर्क का खुलासा : गो-तस्करी का बड़ा खेल, हर सप्ताह बिकते हैं 5000 से ज्यादा मवेशी

छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले के देवभोग क्षेत्र से ओडिशा सीमा के रास्ते बड़े पैमाने पर गो-तस्करी का मामला सामने आया है। हर शुक्रवार ओडिशा के धरमगढ़ में लगने वाली पशु मंडी में हजारों गाय-बैल लाए जाते हैं, जहां से उन्हें आंध्रप्रदेश और तेलंगाना के कसाईघरों तक पहुंचाया जाता है। जांच में दलालों, मजदूरों और स्थानीय सिस्टम की संदिग्ध भूमिका भी सामने आई है। सीमावर्ती क्षेत्रों में ओडिशा पर निर्भरता के बीच यह अवैध नेटवर्क लगातार सक्रिय बना हुआ है।

कीर्तिमान डेस्क
कीर्तिमान डेस्क
10 May 2026, 11:00 AM
गरियाबंद

छत्तीसगढ़ का सीमावर्ती जिला अपनी भौगोलिक स्थिति के कारण कई गतिविधियों का केंद्र बन जाता है। देवभोग क्षेत्र से लगभग 8 किलोमीटर आगे बढ़ते ही ओडिशा की सीमा शुरू हो जाती है। यह इलाका बीजू एक्सप्रेस-वे के किनारे स्थित है, जहां देर रात एक चौंकाने वाला दृश्य देखने को मिला। रात के समय कुछ लोग बड़ी संख्या में गायों और बछड़ों के झुंड के साथ बैठे दिखाई दिए। इतनी बड़ी संख्या में पशुओं के साथ उनके यहां मौजूद होने का कारण पूछे जाने पर वे पहले तो घबरा गए और स्पष्ट जवाब देने से बचते रहे।

गायों की तस्करी का खुलासा

थोड़ी पूछताछ के बाद उन्होंने बताया कि वे इन गायों को ओडिशा के धरमगढ़ ले जा रहे हैं, जहां उन्हें बेच दिया जाएगा। लेकिन स्थानीय स्तर पर की गई पड़ताल में जो सच्चाई सामने आई, वह और भी गंभीर थी। यह कोई एक दिन की घटना नहीं है, बल्कि हर सप्ताह शुक्रवार को इसी तरह का सिलसिला चलता है। गायों को रात के अंधेरे में छत्तीसगढ़ की सीमा पार कराई जाती है और ओडिशा के बाजार तक पहुंचाया जाता है।

धरमगढ़ का साप्ताहिक पशु बाजार

सूत्रों के अनुसार, देवभोग से सटे ओडिशा के धरमगढ़ में हर शुक्रवार एक बड़ा पशु बाजार लगता है। इस बाजार में बड़ी संख्या में गायों और बैलों की खरीद-फरोख्त होती है। इसके बाद इन पशुओं को आगे आंध्र प्रदेश और तेलंगाना तक भेजा जाता है, जहां कई स्थानों पर इन्हें मांस के लिए उपयोग में लाया जाता है। इस पूरे नेटवर्क में कई स्तरों पर लोग शामिल बताए जाते हैं, जिनमें दलाल, मजदूर और कुछ स्थानीय प्रभावशाली लोग भी संदिग्ध भूमिका में हैं।

सीमावर्ती क्षेत्रों की चुनौतियाँ

यह स्थिति केवल पशु तस्करी तक सीमित नहीं है, बल्कि सीमावर्ती क्षेत्रों की प्रशासनिक चुनौतियों को भी उजागर करती है। शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी सुविधाओं के मामले में भी यह पूरा क्षेत्र काफी हद तक ओडिशा पर निर्भर है। इसी निर्भरता और सीमाई खुलापन का फायदा उठाकर अवैध गतिविधियां भी पनप रही हैं।

बड़े पैमाने पर पशु व्यापार

देवभोग से लगभग 15 किलोमीटर दूर ओडिशा के धरमगढ़ में बीफ के लिए बड़े पैमाने पर गायों का व्यापार होने की बात सामने आती है। बताया जाता है कि हर शुक्रवार को लगने वाले इस बाजार में हजारों की संख्या में गाय-बैल खरीदे और बेचे जाते हैं। अनुमान के अनुसार, हर सप्ताह 5000 से अधिक पशुओं का लेन-देन यहां होता है, जिससे यह पूरा क्षेत्र पशु व्यापार और उससे जुड़े विवादों के लिए लगातार चर्चा में बना रहता है।

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