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छत्तीसगढ़ के सरकारी स्कूलों में अब मंत्रोच्चार से होगी पढ़ाई की शुरुआत, 16 जून से लागू होगी नई व्यवस्था

छत्तीसगढ़ के सरकारी स्कूलों में 16 जून से नई व्यवस्था लागू होगी, जिसमें छात्रों को प्रतिदिन पांच मंत्रों का पाठ करना अनिवार्य होगा। राष्ट्रगान-राष्ट्रगीत के साथ शुरू होने वाली प्रार्थना सभा में सांस्कृतिक गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाएगा, वहीं पढ़ाई में AI जैसे आधुनिक विषय भी शामिल किए जाएंगे।

कीर्तिमान ब्यूरो
प्रकाशित: 12 Apr 2026, 12:53 PM · अपडेट: 28 Oct 2026, 05:54 PM
रायपुर
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश

छत्तीसगढ़ के सरकारी स्कूलों में नए शिक्षा सत्र से बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। आगामी 16 जून से स्कूलों में पढ़ाई की शुरुआत मंत्रोच्चार के साथ की जाएगी। इसके तहत सभी छात्रों को प्रतिदिन पांच मंत्रों का अनिवार्य रूप से पाठ करना होगा। यह घोषणा राज्य के शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने गुरुवार को मीडिया से बातचीत के दौरान की। उन्होंने बताया कि अब स्कूलों की सुबह की प्रार्थना सभा राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत से शुरू होगी, जिसके बाद दीप वंदना, सरस्वती वंदना और गुरु मंत्र का उच्चारण किया जाएगा।

 सांस्कृतिक मूल्यों से जोड़ने की पहल

शिक्षा मंत्री ने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल पाठ्यपुस्तकों तक सीमित शिक्षा देना नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों का सर्वांगीण विकास सुनिश्चित करना है। इसी दिशा में यह पहल की गई है, ताकि बच्चों में अनुशासन, संस्कार और भारतीय संस्कृति के प्रति जुड़ाव बढ़े।

 पढ़ाई में परंपरा के साथ आधुनिकता

सरकार ने शिक्षा व्यवस्था में व्यापक बदलाव की भी घोषणा की है। मंत्री के अनुसार अब बच्चों को शुरुआती स्तर पर बारहखड़ी के साथ-साथ आधुनिक तकनीकों जैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की जानकारी भी दी जाएगी, जिससे वे भविष्य के लिए तैयार हो सकें।

 हर महीने महापुरुषों पर व्याख्यान

नई व्यवस्था के तहत स्कूलों में हर महीने दो से तीन महापुरुषों पर व्याख्यान आयोजित किए जाएंगे। इसका उद्देश्य छात्रों को महान व्यक्तित्वों के जीवन, विचारों और संघर्षों से प्रेरित करना है।

 फैसले पर शुरू हुआ सियासी विवाद

सरकार के इस फैसले पर विपक्ष ने आपत्ति जताई है और इसे लेकर राजनीतिक बहस भी तेज हो गई है। हालांकि सरकार इसे शिक्षा के समग्र विकास और सांस्कृतिक सशक्तिकरण की दिशा में बड़ा कदम बता रही है।

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