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भाजपा के कोर ग्रुप में बड़े बदलाव के बाद सियासी हलचल तेज
भाजपा के कोर ग्रुप में बड़े बदलाव के बाद सियासी हलचल तेज
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छत्तीसगढ़ BJP के कोर ग्रुप में बड़ा फेरबदल : विजय शर्मा-ओपी चौधरी की एंट्री, बृजमोहन-रामविचार बाहर

छत्तीसगढ़ भाजपा ने अपने सबसे अहम कोर ग्रुप में बड़ा फेरबदल किया है। उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा, वित्त मंत्री ओपी चौधरी, अमर अग्रवाल और लता उसेंडी जैसे नए चेहरों को शामिल किया गया है, जबकि बृजमोहन अग्रवाल, रामविचार नेताम और रेणुका सिंह समेत कई वरिष्ठ नेताओं को बाहर कर दिया गया। भाजपा इसे संगठन की नियमित प्रक्रिया बता रही है, वहीं कांग्रेस ने इसे गुटबाजी और अंदरूनी कलह का संकेत बताया है।

कीर्तिमान ब्यूरो
प्रकाशित: 13 May 2026, 07:30 PM · अपडेट: 28 Oct 2026, 06:37 PM
रायपुर
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश

छत्तीसगढ़ भाजपा ने अपनी सबसे अहम और रणनीतिक इकाई माने जाने वाले कोर ग्रुप में बड़ा बदलाव किया है। रायपुर में आयोजित दो दिवसीय मैराथन बैठक के पहले दिन हुई कोर ग्रुप की बैठक से ज्यादा चर्चा उसमें हुए फेरबदल को लेकर रही। पार्टी ने जहां कई नए चेहरों को जगह देकर नई पीढ़ी पर भरोसा जताया है, वहीं कई वरिष्ठ नेताओं को इस बार बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है। राजनीतिक गलियारों में इसे भाजपा के भीतर पीढ़ीगत बदलाव, नई रणनीति और आगामी चुनावी समीकरणों से जोड़कर देखा जा रहा है।

विजय शर्मा और ओपी चौधरी बने नए चेहरे

भाजपा नेतृत्व ने इस बार युवा और सक्रिय नेताओं को आगे बढ़ाने का संकेत दिया है। उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा और वित्त मंत्री ओपी चौधरी को पहली बार कोर ग्रुप में शामिल किया गया है। दोनों नेताओं को सरकार और संगठन के बीच बेहतर समन्वय बनाने वाले चेहरों के रूप में देखा जा रहा है।

इसके अलावा पूर्व मंत्री अमर अग्रवाल, पूर्व विधायक शिवरतन शर्मा और वरिष्ठ आदिवासी नेता लता उसेंडी को भी कोर ग्रुप में जगह दी गई है। इन नेताओं की संगठनात्मक पकड़ और क्षेत्रीय प्रभाव को देखते हुए पार्टी ने उन्हें अहम जिम्मेदारी सौंपी है।

कई दिग्गज नेताओं की छुट्टी

कोर ग्रुप के पुनर्गठन में सबसे ज्यादा चर्चा उन वरिष्ठ नेताओं को लेकर हो रही है, जिन्हें इस बार बाहर रखा गया है। रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल और पूर्व विधानसभा अध्यक्ष गौरीशंकर अग्रवाल को कोर ग्रुप से बाहर कर दिया गया है।

इसके अलावा मंत्री रामविचार नेताम, वरिष्ठ नेता पुन्नूलाल मोहिले, पूर्व केंद्रीय मंत्री रेणुका सिंह और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष विक्रम उसेंडी को भी जगह नहीं मिली है। लंबे समय से संगठन और सत्ता में प्रभाव रखने वाले इन नेताओं की विदाई को राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

कांग्रेस ने साधा निशाना

भाजपा के इस फैसले को लेकर कांग्रेस को हमला बोलने का मौका मिल गया है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष Deepak Baij ने आरोप लगाया कि भाजपा के भीतर भारी गुटबाजी और अंतर्कलह चल रही है। उन्होंने कहा कि वरिष्ठ नेताओं को कोर ग्रुप से हटाना इस बात का संकेत है कि पार्टी के भीतर सबकुछ ठीक नहीं है। कांग्रेस का दावा है कि भाजपा में अब पुराने और नए नेताओं के बीच खींचतान खुलकर सामने आने लगी है।

BJP ने बताया संगठन की नियमित प्रक्रिया

हालांकि भाजपा इसे सामान्य संगठनात्मक प्रक्रिया बता रही है। पार्टी नेताओं का कहना है कि समय-समय पर कोर ग्रुप में बदलाव किया जाता रहा है और इस बार भी संगठन को ज्यादा प्रभावी बनाने के लिए फेरबदल किया गया है।

भाजपा के अंदरूनी सूत्रों के मुताबिक पार्टी आगामी नगरीय निकाय चुनाव, पंचायत चुनाव और 2028 विधानसभा चुनाव की रणनीति को ध्यान में रखकर नई टीम तैयार कर रही है। ऐसे में संगठन में युवा चेहरों और प्रशासनिक अनुभव रखने वाले नेताओं को प्राथमिकता दी जा रही है।

अनुभव और नई ऊर्जा के संतुलन की कोशिश

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा ने इस बदलाव के जरिए अनुभव और नई ऊर्जा के बीच संतुलन बनाने की कोशिश की है। एक तरफ संगठन के पुराने चेहरों की जगह नए नेताओं को मौका दिया गया है, तो दूसरी ओर क्षेत्रीय और सामाजिक समीकरणों का भी ध्यान रखा गया है। फिलहाल इस बदलाव ने भाजपा के भीतर हलचल जरूर बढ़ा दी है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि कोर ग्रुप का यह नया समीकरण संगठन और सरकार के कामकाज पर कितना असर डालता है।

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