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जनसमस्या निवारण महाशिविर
जनसमस्या निवारण महाशिविर
छत्तीसगढ़

जहां लगती थी जन-अदालत, वहां पहुंचा सुशासन : पुजारी कांकेर में पहली बार लगा जनसमस्या निवारण महाशिविर

माओवाद प्रभावित पुजारी कांकेर में मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के “सुशासन तिहार-2026” के तहत पहली बार विशाल जनसमस्या निवारण महाशिविर आयोजित हुआ। जहां कभी जनताना सरकार की जन-अदालत लगती थी, वहीं अब प्रशासन ने सीधे गांव पहुंचकर लोगों की समस्याएं सुनीं और समाधान किया। शिविर में 17 से अधिक पंचायतों के ग्रामीण शामिल हुए।

कीर्तिमान ब्यूरो
प्रकाशित: 07 May 2026, 08:17 PM · अपडेट: 24 Oct 2026, 09:45 PM
रायपुर/ कांकेर
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश

कभी जहां जनताना सरकार की ‘जन-अदालत’ लगने की पहचान थी, आज उसी पुजारी कांकेर में शासन-प्रशासन की नई तस्वीर देखने को मिली। मुख्यमंत्री के सुशासन मॉडल के तहत आयोजित “सुशासन तिहार-2026” के अंतर्गत माओवाद प्रभावित और अत्यंत सुदूर ग्राम पंचायत पुजारी कांकेर में पहली बार व्यापक जनसमस्या निवारण महाशिविर का आयोजन किया गया।

इस शिविर ने न केवल प्रशासन की पहुंच को सुदूर वनांचल तक दिखाया, बल्कि ग्रामीणों के बीच भरोसे और उम्मीद का नया माहौल भी तैयार किया।

सभी विभाग एक मंच पर, ग्रामीणों की भीड़ उमड़ी

शिविर की खास बात यह रही कि पहली बार सभी विभागों का अमला एक साथ गांव पहुंचा। क्रेडा, जल जीवन मिशन, शिक्षा, स्वास्थ्य, आयुष, कृषि, उद्यानिकी, वन, मत्स्य, विद्युत, राजस्व तथा पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग सहित तमाम विभागों ने मौके पर ही योजनाओं की जानकारी दी।

सुबह से ही बड़ी संख्या में महिला, पुरुष, युवा और बच्चे शिविर स्थल पर पहुंच गए। ग्रामीणों ने न केवल योजनाओं की जानकारी ली, बल्कि स्थानीय भाषा में अधिकारियों से संवाद कर आवेदन भी प्रस्तुत किए।

29 मामलों का तत्काल समाधान, बाकी पर प्रक्रिया जारी

शिविर में आए आवेदनों में से 29 मामलों का मौके पर ही निराकरण कर दिया गया। शेष आवेदनों पर विभागीय स्तर पर कार्रवाई शुरू कर दी गई है।

अधिकारियों के अनुसार, यह पहल सिर्फ औपचारिकता नहीं बल्कि वास्तविक समाधान की दिशा में एक मजबूत कदम है, जिससे ग्रामीणों को कार्यालयों के चक्कर लगाने से राहत मिल रही है।

17 से अधिक पंचायतों के ग्रामीणों की भागीदारी

इस शिविर में पुजारी कांकेर सहित मारुड़बाका, नेलाकांकेर, संकनपल्ली, तिम्मापुर, ईलमिड़ी, सेमलडोडी, लंकापल्ली, एंगपल्ली, गलगम, उसूर, आवापल्ली, चिंताकोंटा, मुरदंडा, चेरकडोडी, नुकनपाल, पुसगुड़ी और मुरकीनार सहित कई ग्राम पंचायतों के ग्रामीण शामिल हुए।

लंबी दूरी और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद ग्रामीणों की सक्रिय भागीदारी ने शिविर को विशेष बना दिया।

भय से विकास तक की यात्रा

मुख्य अतिथि जिला पंचायत अध्यक्ष  जानकी कोरसा ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के संकल्प का ही परिणाम है कि आज पुजारी कांकेर जैसे इलाके में प्रशासन खुद पहुंच रहा है।

उन्होंने कहा कि
“जहां कभी माओवाद के भय से साप्ताहिक बाजार तक बंद हो जाते थे, वहां आज लोग खुलकर अपनी समस्याएं रख रहे हैं और सरकारी योजनाओं का लाभ ले रहे हैं।”

यह बदलाव प्रदेश में सुशासन की दिशा में एक बड़ा संकेत माना जा रहा है।

स्वास्थ्य, शिक्षा और आजीविका पर विशेष फोकस

शिविर में कई विभागों ने अलग-अलग सेवाएं भी दीं—

  • स्वास्थ्य विभाग द्वारा निःशुल्क स्वास्थ्य जांच, दवा वितरण और परामर्श
  • महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा गोदभराई और अन्नप्राशन संस्कार
  • पशुधन विकास विभाग द्वारा पशु उपचार और रोग नियंत्रण की जानकारी
  • मत्स्य विभाग द्वारा मत्स्य जाल और आइस बॉक्स का वितरण
  • कृषि विभाग द्वारा मृदा परीक्षण प्रमाण पत्र और तकनीकी जानकारी

इसके अलावा पात्र हितग्राहियों को बैसाखी, वॉकिंग स्टिक, श्रवण यंत्र जैसी सहायक सामग्री भी प्रदान की गई।

प्रशासनिक टीम की सक्रिय भूमिका

शिविर का संचालन एसडीएम उसूर भूपेन्द्र गावरे के नेतृत्व में किया गया, जबकि जनपद पंचायत उसूर के सीईओ  प्रभाकर चंद्राकर ने समन्वय की जिम्मेदारी निभाई।

अधिकारियों के अनुसार, यह शिविर केवल योजनाओं के प्रचार का माध्यम नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर प्रशासन और जनता के बीच सीधा संवाद स्थापित करने का प्रयास है।

सुशासन की नई तस्वीर

पुजारी कांकेर का यह शिविर इस बात का उदाहरण बन गया है कि अगर प्रशासनिक इच्छाशक्ति मजबूत हो तो सबसे सुदूर और संवेदनशील क्षेत्रों में भी विकास और विश्वास की नई इबारत लिखी जा सकती है।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के “सुशासन तिहार-2026” के तहत यह पहल प्रदेश में प्रशासनिक पहुंच और जनसहभागिता का नया मॉडल पेश कर रही है, जहां गांव खुद विकास की प्रक्रिया का केंद्र बनते दिख रहे हैं।

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