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श्रीमद्भागवत कथा
श्रीमद्भागवत कथा
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भक्ति : अनिरुद्धाचार्य महाराज की भागवत कथा से गूंजा वृन्दावन: भक्ति और जीवन मूल्यों का संदेश 

वृन्दावन में अनिरुद्धाचार्य जी महाराज द्वारा 30 अप्रैल से चल रही सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हो रहे हैं। कथा में भक्ति, सदाचार और जीवन मूल्यों का महत्व बताया गया, साथ ही अहंकार त्यागकर सत्व गुण अपनाने और ईश्वर स्मरण से शांति व मोक्ष प्राप्त करने का संदेश दिया गया।

कीर्तिमान डेस्क
प्रकाशित: 02 May 2026, 02:49 PM · अपडेट: 14 Sep 2026, 10:08 PM
वृंदावन
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश
वृन्दावन श्रीधाम वृन्दावन में पूज्य अनिरुद्धाचार्य जी महाराज द्वारा आयोजित श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन निरंतर जारी है। 30 अप्रैल से प्रारंभ हुई यह सात दिवसीय कथा आज अपने तीसरे दिन में पहुंच गई है। आयोजन समिति के अनुसार यह कथा  6 मई 2026 तक चलेगी।
कथा स्थल पर प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचकर कथा श्रवण कर रहे हैं। भजन-कीर्तन और प्रवचनों से पूरा वातावरण भक्तिमय बना हुआ है, जिससे श्रद्धालु आध्यात्मिक शांति का अनुभव हो रहा हैं। कथा के दौरान पूज्य महाराज ने धर्म के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि सच्चा धर्म केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जीवन जीने की सही दिशा देता है। उन्होंने मन, वचन और कर्म की शुद्धता को धर्म का मूल बताया और सभी प्राणियों में ईश्वर का भाव देखने की प्रेरणा दी। प्रवचन में उन्होंने वर्तमान समय की सामाजिक परिस्थितियों पर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि भौतिकता की दौड़ में मनुष्य अपने संस्कारों और मूल्यों से दूर होता जा रहा है। ऐसे में भागवत कथा लोगों को सही मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है।

भक्ति का वर्णन

कथा प्रसंगों में भक्त ध्रुव और प्रह्लाद की अटूट भक्ति का वर्णन किया गया, वहीं भगवान श्रीकृष्ण के जन्म और बाल लीलाओं के माध्यम से भक्ति, प्रेम और समर्पण का संदेश दिया गया। उन्होंने बताया कि अहंकार मनुष्य के पतन का कारण है, जबकि विनम्रता उसे ईश्वर के निकट ले जाती है। श्रीमद्भागवत कथा में ‘सार, महत्त्व और गुण रहस्य’ का संदेश के दौरान पूज्य अनिरुद्धाचार्य जी महाराज ने श्रीमद्भागवत के गूढ़ तत्वों का सार, महत्त्व और गुण रहस्यों  को सरल शब्दों में बताया ।

शांति और मोक्ष का मार्ग 

भागवत का मूल सार भक्ति है। महाराज ने कहा कि मनुष्य चाहे किसी भी परिस्थिति में हो, यदि वह सच्चे मन से भगवान का स्मरण करता है, तो उसे जीवन में शांति और मोक्ष का मार्ग मिलता है। भक्ति ही वह शक्ति है जो मनुष्य को अहंकार, मोह और दुखों से मुक्त करती है।

सरल और प्रभावी साधन

श्रीमद्भागवत को उन्होंने कलियुग में सबसे सरल और प्रभावी साधन बताया। कथा सुनने मात्र से मन शुद्ध होता है, विचारों में सकारात्मकता आती है और जीवन में धर्म, ज्ञान और वैराग्य का विकास होता है। उन्होंने कहा कि भागवत कथा केवल धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि जीवन जीने की संपूर्ण कला सिखाती है।

गुण रहस्य 

महाराज ने बताया कि भागवत में भगवान के तीन प्रमुख गुण सत्व, रज और तम का गहरा रहस्य छिपा है। सत्व गुण: शांति, ज्ञान और पवित्रता का प्रतीक है ,रज गुण: कर्म, इच्छा और सक्रियता का प्रतीक है, तम गुण: अज्ञान, आलस्य, क्रोध  और मोह का प्रतीक है  उन्होंने बताया  कि मनुष्य को सत्व गुण को अपनाकर जीवन में संतुलन बनाना चाहिए, जिससे वह ईश्वर के निकट पहुँचा सकता है।

समग्र संदेश

कथा के माध्यम से यह बताया गया कि भक्ति, सदाचार और सकारात्मक सोच अपनाकर ही मनुष्य जीवन को सफल बनाया  जा सकता है। श्रीमद् भागवत का यही सार है कि ईश्वर से जुड़कर ही सच्चा सुख और शांति प्राप्त होती है।
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