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जल संकट से राहत

भीषण गर्मी में राहत : छत्तीसगढ़ के 4,755 सूखते तालाबों को नहरों से मिला पानी

भीषण गर्मी और गिरते भू-जल स्तर के बीच छत्तीसगढ़ में जल संसाधन विभाग द्वारा विशेष अभियान चलाकर सूखते तालाबों को नहरों के माध्यम से भरा जा रहा है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की पहल पर अब तक प्रदेश के 4,755 तालाबों में पानी पहुंचाया जा चुका है। रायपुर, बलौदाबाजार-भाटापारा और धमतरी सहित कई जिलों में तेजी से जल भराव कार्य जारी है। इस पहल से ग्रामीणों को निस्तारी और पेयजल संकट से राहत मिल रही है, वहीं भू-जल स्तर बढ़ाने और जल संरक्षण को भी मजबूती मिल रही है।

कीर्तिमान डेस्क
कीर्तिमान डेस्क
12 May 2026, 03:37 PM
रायपुर

प्रदेश में लगातार बढ़ रही भीषण गर्मी और गिरते भू-जल स्तर के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में पानी का संकट गहराने लगा है। तालाब, जो गांवों में निस्तारी और दैनिक उपयोग के प्रमुख जल स्रोत माने जाते हैं, तेजी से सूख रहे हैं। ऐसी स्थिति में लोगों को राहत पहुंचाने के लिए जल संसाधन विभाग द्वारा राज्यभर में विशेष जल भराव अभियान चलाया जा रहा है। 

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की मंशा के अनुरूप विभाग ने त्वरित पहल करते हुए अब तक प्रदेश के 4 हजार 755 तालाबों में नहरों के माध्यम से पानी पहुंचाया है, जबकि शेष तालाबों में भी तेजी से जल भराव का कार्य जारी है। जल संसाधन विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार इस अभियान का सबसे अधिक प्रभाव रायपुर जिले में देखने को मिल रहा है। यहां निस्तारी के लिए प्रस्तावित कुल 783 तालाबों में से 663 तालाबों में अब तक पानी भरा जा चुका है। 

इसी प्रकार बलौदाबाजार-भाटापारा जिले के 586 तालाबों में से 504 तालाबों तथा धमतरी जिले के 508 तालाबों में से 329 तालाबों में जल भराव किया गया है। इसके अलावा प्रदेश के लगभग सभी जिलों में यह कार्य लगातार जारी है, ताकि ग्रामीणों को पानी की समस्या से जल्द राहत मिल सके।

नहरों से तालाबों तक पहुंचाया जा रहा पानी

जल संसाधन विभाग द्वारा विभिन्न सिंचाई परियोजनाओं की नहरों के माध्यम से पानी को तालाबों तक पहुंचाया जा रहा है। यह योजना केवल गर्मी के समय पानी उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि जल संरक्षण और वाटर रिचार्ज की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। विभाग का मानना है कि तालाबों में पानी भरने से आसपास के क्षेत्रों में जल उपलब्धता बेहतर होगी और ग्रामीणों को लंबे समय तक इसका लाभ मिलेगा। 

विशेषज्ञों के अनुसार नहरों से छोड़ा गया पानी धीरे-धीरे जमीन में रिसता है, जिससे आसपास के क्षेत्रों में भू-जल का पुनर्भरण होता है। इससे कुएं, हैंडपंप और अन्य जल स्रोत लंबे समय तक जलयुक्त बने रहते हैं। तालाबों के भरने से जहां ग्रामीणों को गर्मी के मौसम में पानी की कमी से राहत मिल रही है, वहीं इससे भू-जल स्तर को बढ़ाने में भी महत्वपूर्ण मदद मिल रही है।

जल संरक्षण के प्रति बढ़ रही जागरूकता

यह पहल केवल सरकारी योजना तक सीमित नहीं है, बल्कि जल संरक्षण के प्रति सामूहिक सोच को भी मजबूत कर रही है। गांवों में तालाब भरने से लोगों को इसका प्रत्यक्ष लाभ मिल रहा है, जिससे समाज में जल बचाने और जल स्रोतों के संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ रही है। प्रदेश सरकार की यह पहल वर्तमान जल संकट से राहत देने के साथ-साथ भविष्य के लिए जल संरक्षण की मजबूत नींव तैयार करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण साबित हो रही है।

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