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हाई-अलर्ट पर वन विभाग
हाई-अलर्ट पर वन विभाग
रायगढ़

वन मंडल में हाहाकार : 17 दिनों में 3 हाथी शावकों की मौत से हड़कंप, हाईटेक सर्विलांस और थर्मल ड्रोन से छावनी में बदला जंगल

छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले के धरमजयगढ़ वन मंडल में 17 दिनों के भीतर तीन हाथी शावकों की रहस्यमयी मौत से वन विभाग अलर्ट मोड पर आ गया है। हाथियों की सुरक्षा के लिए 3 थर्मल ड्रोन, 8 ट्रैप कैमरे और 140 ट्रैकर्स तैनात किए गए हैं। विभाग पानी के तालाबों और डैमों को “डेथ ट्रैप” मानते हुए उनका सेफ्टी ऑडिट भी कर रहा है।

कीर्तिमान न्यूज
27 May 2026, 12:02 PM
रायगढ़

छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले के अंतर्गत आने वाले धरमजयगढ़ वन मंडल में पिछले 17 दिनों के भीतर तीन नन्हे हाथी शावकों की रहस्यमय और दर्दनाक मौत ने वन विभाग के आला अधिकारियों की नींद उड़ा दी है। लगातार हो रही इन मौतों से पूरा महकमा सकते में है। वन्यजीव प्रेमियों की तीखी प्रतिक्रिया और मामले की गंभीरता को देखते हुए वन विभाग ने अब पूरे क्षेत्र को 'हाई-अलर्ट' पर डाल दिया है। हाथियों के कुनबे को बचाने के लिए अब पारंपरिक तरीकों के साथ-साथ आधुनिक तकनीक का सहारा लेकर जंगल की किलेबंदी शुरू कर दी गई है।

शावकों की सुरक्षा में चूक और लगातार हो रही मौतों के बाद वन विभाग ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। हाथियों की पल-पल की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए एक विशेष रणनीति के तहत काम शुरू किया गया है:

  • 3 थर्मल ड्रोन तैनात: घने जंगलों, सुबह के कोहरे और रात के अंधेरे में हाथियों की सटीक लोकेशन ट्रेस करने के लिए 3 अत्याधुनिक थर्मल ड्रोन उड़ाए जा रहे हैं।

  • 8 संवेदनशील ठिकानों पर ट्रैप कैमरे: हाथियों की आवाजाही वाले मुख्य रास्तों और जलस्रोतों के पास 8 अलग-अलग लोकेशनों पर मोशन-सेंसिटिव ट्रैप कैमरे लगाए गए हैं।

  • मौत के 'वाटर ट्रैप' की जांच: इन कैमरों का मकसद सिर्फ निगरानी नहीं, बल्कि यह कड़वा सच पता लगाना है कि आखिर शावकों के शव बार-बार पानी में ही क्यों मिल रहे हैं? क्या यह महज एक दुर्घटना है या इसके पीछे कोई और बड़ी वजह है।

धरमजयगढ़ में हाथियों का कुनबा

धरमजयगढ़ वन मंडल इस समय हाथियों का मुख्य गढ़ बना हुआ है। वर्तमान में यहाँ हाथियों की कुल संख्या 135 है, जो सुरक्षा के लिहाज से एक बड़ी चुनौती है:

श्रेणीसंख्या
नर हाथी (Adult Males)45
मादा हाथी (Adult Females)70
हाथी शावक (Calves)20
कुल हाथी135

छाल रेंज का 'एडू परिसर' बना सबसे बड़ा संवेदनशील जोन

वर्तमान में हाथियों का सबसे बड़ा और भारी-भरकम दल छाल रेंज के एडू परिसर में डेरा डाले हुए है। इस अकेले समूह में 62 हाथी मौजूद हैं, जिनमें 9 छोटे शावक भी शामिल हैं। यही वजह है कि विभाग का सबसे ज्यादा ध्यान इस समय इसी इलाके पर केंद्रित है ताकि इन 9 मासूम शावकों को हर हाल में सुरक्षित रखा जा सके।

जलाशयों का 'सेफ्टी ऑडिट' और सुधारीकरण

हालिया घटनाओं में शावकों के शव डैम और तालाबों में तैरते हुए मिले थे। इससे यह साफ है कि गहरे पानी या तालाबों के दलदली किनारे छोटे शावकों के लिए 'डेथ ट्रैप' (मौत का कुआं) साबित हो रहे हैं।

सुरक्षात्मक कदम: वन विभाग अब उन सभी तालाबों और जलाशयों की पहचान कर रहा है जहां हाथी पानी पीने जाते हैं। ऐसे संवेदनशील जलस्रोतों के किनारों पर सुरक्षित ढलान (Gentle Slopes) और सुगम पहुंच मार्ग बनाए जाएंगे, ताकि पानी पीने के दौरान छोटे शावक गहरे पानी में न फिसलें और न ही कीचड़ में फंसें।

140 ट्रैकर्स और हाथी मित्र दल संभाल रहे हैं मोर्चा

जंगल के भीतर जमीनी स्तर पर सुरक्षा को अभेद्य बनाने के लिए 140 स्थानीय ट्रैकर्स की फौज चौबीसों घंटे तैनात है।

  • ये ट्रैकर शिफ्ट के अनुसार रोस्टर ड्यूटी कर रहे हैं और जान जोखिम में डालकर हाथियों के दल के ठीक पीछे-पीछे (शैडो मॉनिटरिंग) चल रहे हैं।

  • जैसे ही हाथियों का दल किसी गांव की तरफ बढ़ता है, ट्रैकर तुरंत वन अधिकारियों को इसकी सैटेलाइट/लोकल सूचना देते हैं।

  • गाँवों में अलर्ट: ग्रामीणों को सुरक्षित रखने के लिए प्रभावित सीमावर्ती गांवों में लगातार मुनादी (लाउडस्पीकर से घोषणा) कराई जा रही है ताकि मानव-हाथी द्वंद्व को टाला जा सके।

राष्ट्रीय स्तर की प्रयोगशालाओं को भेजे गए सैंपल: डीएफओ

हाल ही में आमामुड़ा तालाब में हुई शावक की मौत को बेहद दुखद बताते हुए धरमजयगढ़ वनमंडलाधिकारी (DFO) जितेंद्र उपाध्याय ने कहा:

"शावक की मौत के सटीक और वैज्ञानिक कारणों (जैसे कोई आंतरिक बीमारी, जहर या डूबने से मौत) का पता लगाने के लिए विसरा और अन्य महत्वपूर्ण सैंपल देश के राष्ट्रीय स्तर के प्रतिष्ठित विज्ञान संस्थानों और प्रयोगशालाओं को भेजे गए हैं। रिपोर्ट आते ही मौत के वास्तविक कारणों का खुलासा हो जाएगा।"

उन्होंने आगे स्पष्ट किया कि हाथी मित्र दल, पैरा-वन अमला और ट्रैकर्स की संयुक्त टीमें दिन-रात गश्त कर रही हैं। विभाग इस बात के लिए प्रतिबद्ध है कि भविष्य में ऐसी किसी भी दुखद घटना की पुनरावृत्ति न हो। इसके लिए तकनीकी सर्विलांस को और अधिक अपग्रेड किया जा रहा है।

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