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ट्राइसाइकिल पाकर खिले दिव्योंगों के चेहरे
ट्राइसाइकिल पाकर खिले दिव्योंगों के चेहरे

संघर्ष से स्वावलंबन तक : भीमा मारकंडे को ट्राइसाइकिल ने दी नई उड़ान

भीमा मारकंडे, राजनांदगांव जिले के डोंगरगांव ब्लॉक के ग्राम हरदी के निवासी हैं, जो एक दुर्घटना में गंभीर रूप से दिव्यांग हो गए थे। 80% दिव्यांगता के बावजूद वे अपने परिवार, खासकर दो छोटी बेटियों की जिम्मेदारी निभा रहे थे। हाल ही में समाज कल्याण विभाग की पहल से उन्हें बैटरी चलित मोटराइज्ड ट्राइसाइकिल प्रदान की गई, जिससे उनकी आवाजाही और आत्मनिर्भरता की राह आसान हो गई है। यह सहायता उन्हें सुशासन तिहार कार्यक्रम के दौरान मिली। अब भीमा रोजगार के अवसरों की तलाश में बिना किसी सहारे के आ-जा सकेंगे और अपने जीवन को फिर से मजबूती से आगे बढ़ा सकेंगे।

कीर्तिमान डेस्क
प्रकाशित: 05 May 2026, 12:06 PM · अपडेट: 25 May 2026, 11:30 AM
रायपुर
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश
कहते हैं कि अगर मन में कुछ कर गुजरने का जज्बा हो, तो शारीरिक बाधाएं केवल एक पड़ाव मात्र रह जाती हैं, मंजिल नहीं। राजनांदगांव जिले के डोंगरगांव ब्लॉक के ग्राम 'हरदी' के रहने वाले भीमा मारकंडे की कहानी आज संघर्ष कर रहे हजारों युवाओं के लिए एक मिशाल बन गई है।

​ जब वक्त ने ली कठिन परीक्षा

भीमा की जिंदगी तब बदल गई जब हैदराबाद में निर्माण कार्य (मजदूरी) के दौरान वे ऊंचाई से गिर गए। कमर में आई गंभीर चोट ने उनके चलने-फिरने की शक्ति छीन ली। 80 प्रतिशत दिव्यांगता के साथ 9 वर्ष और 4 वर्ष दो छोटी बेटियों की जिम्मेदारी उठाना पहाड़ तोड़ने जैसा था। बैसाखी ही उनका एकमात्र सहारा थी, लेकिन मंजिल अभी दूर थी।

उम्मीद की नई किरण

​भीमा ने हार मानने के बजाय स्वावलंबन का रास्ता चुना। उन्होंने समाज कल्याण विभाग के माध्यम से 'बैटरी चलित मोटराइज्ड ट्राइसाइकिल' के लिए आवेदन किया। राजनांदगांव के मोतीपुर में 4 मई 2026 को आयोजित सुशासन तिहार मे मिला यह आधुनिक उपकरण उनके लिए केवल एक वाहन नहीं, बल्कि उनकी आजादी साबित हुआ।

अब बाधाएं नहीं रोकेंगी रास्ता

विभाग द्वारा प्रदान की गई बैटरी चलित ट्राइसाइकिल और बैसाखी से भीमा के जीवन में क्रांतिकारी बदलाव का रास्ता मजबूत होगा। भीमा अब रोजगार की तलाश में दूर-दराज के क्षेत्रों तक बिना किसी मदद के जा सकेंगे। दूसरों पर निर्भरता खत्म होने से भीमा अब समाज की मुख्यधारा में एक सक्रिय नागरिक की भूमिका निभा सकेगा। अपनी बेटियों के भविष्य को संवारने के लिए अब वे शारीरिक बाधाओं को पीछे छोड़ चुके हैं। भीमा शासन द्वारा दिए गए मदद की प्रशंसा करते हुए कहते है कि राज्य के संवेदनशील मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय अपने आमजनों की समस्याओं का निराकरण सुशासन तिहार के माध्यम से कर रहे है। मैं मुख्यमंत्री का दिल से धन्यवाद करता हूँ।

अन्य दिव्यांगों के लिए भी अच्छी खबर है

समाज कल्याण विभाग की उपसंचालक सुश्री वैशाली मरड़वार ने बताया कि जिला प्रशासन एवं समाज कल्याण विभाग की विशेष योजना के तहत नवाचार करते हुए 40 से 79% तक के दिव्यांगता वाले व्यक्ति भी मोटराइज्ड साइकिल के पात्र होंगे। इसके लिए ​ ऑलिम्को (ALIMCO) CSR मद से जिले के 109 पात्र दिव्यांगों को यह सुविधा प्रदान की जाएगी।
मारकंडे के हस्ताक्षर आज उनके अटूट संकल्प की गवाही देते हैं। उनकी कहानी हमें सिखाती है कि सरकारी योजनाओं का सही लाभ और मन का दृढ़ निश्चय मिलकर किसी भी अंधेरी राह को रोशन कर सकता है। भीमा अब रुकने वाले नहीं हैं, वे उड़ान भरने के लिए तैयार हैं।
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