सावधानी ही सुरक्षा : अरेकेल में सुरक्षित शनिवार कार्यक्रम, छात्रों को सर्पदंश से बचाव की मिली जानकारी
शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला अरेकेल में सुरक्षित शनिवार कार्यक्रम के तहत सर्पदंश से बचाव एवं प्राथमिक उपचार विषय पर जागरूकता कार्यशाला आयोजित की गई। विज्ञान शिक्षक प्रेमचन्द साव ने विद्यार्थियों को सर्पदंश की स्थिति में सावधानी, प्राथमिक उपचार और समय पर चिकित्सकीय सहायता लेने के उपाय बताए। साथ ही बिच्छू, मधुमक्खी और अन्य विषैले जीवों से बचाव के लिए जरूरी सावधानियों की जानकारी दी गई।
कीर्तिमान डेस्क
18 Jul 2026, 01:32 PM
बसना
शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला अरेकेल में 'सुरक्षित शनिवार' कार्यक्रम के अंतर्गत सी.वी. रमन विज्ञान क्लब अरेकेल एवं छत्तीसगढ़ विज्ञान सभा, बसना इकाई के संयुक्त तत्वावधान में विद्यार्थियों के लिए सर्पदंश से बचाव एवं प्राथमिक उपचार विषय पर जागरूकता कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में विज्ञान शिक्षक एवं छत्तीसगढ़ विज्ञान सभा, बसना इकाई के सदस्य प्रेमचन्द साव ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि वर्षा ऋतु में सर्पदंश की घटनाओं की संभावना बढ़ जाती है।
ऐसे समय में सबसे महत्वपूर्ण बात घबराने के बजाय धैर्य बनाए रखना है। उन्होंने बताया कि सर्पदंश होने पर पीड़ित को अनावश्यक रूप से चलने-फिरने न दें, प्रभावित अंग को यथासंभव स्थिर रखें तथा बिना किसी देरी के निकटतम स्वास्थ्य केंद्र या अस्पताल पहुँचाकर एंटी स्नेक वेनम (ASV) उपचार दिलाना चाहिए। उन्होंने यह भी बताया कि झाड़-फूंक, घाव को काटना, विष चूसने का प्रयास करना, बर्फ लगाना अथवा कसकर रस्सी बांधना जैसे पारंपरिक उपाय वैज्ञानिक दृष्टि से उचित नहीं हैं और इससे मरीज की स्थिति और गंभीर हो सकती है।
विषैले जीवों से बचाव की जानकारी
प्रेमचन्द साव ने आगे बताया कि बिच्छू,मधुमक्खी,ततैया तथा अन्य विषैले कीड़ों के काटने पर भी घबराना नहीं चाहिए। प्रभावित स्थान को साबुन और स्वच्छ पानी से साफ करें। यदि सर्पदंश से बचाव के बताए उपाय से विद्यार्थियों ने सीखे प्राथमिक उपचार के तरीकेडंक दिखाई दे तो सावधानीपूर्वक निकालें तथा दर्द या सूजन कम करने के लिए ठंडी पट्टी का उपयोग किया जा सकता है। यदि पीड़ित को तेज दर्द, सांस लेने में कठिनाई, पूरे शरीर में सूजन,चक्कर आना, बेहोशी अथवा एलर्जी के गंभीर लक्षण दिखाई दें तो तत्काल निकटतम स्वास्थ्य केंद्र या अस्पताल ले जाना चाहिए। उन्होंने विद्यार्थियों से अपील की कि वे घर एवं विद्यालय के आसपास साफ-सफाई रखें, झाड़ियों एवं कचरे को हटाएँ, रात में टॉर्च का उपयोग करें तथा खेतों या बगीचों में कार्य करते समय जूते एवं दस्ताने पहनें। जागरूकता, सावधानी और समय पर चिकित्सकीय उपचार ही सर्पदंश, बिच्छू तथा अन्य विषैले कीड़ों के काटने से बचाव का सबसे प्रभावी उपाय है।
विद्यार्थियों ने सीखे सुरक्षा के उपाय
कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों को शैक्षिक वीडियो के माध्यम से सर्पदंश,बिच्छू एवं अन्य विषैले कीड़ों के काटने से बचाव, प्राथमिक उपचार तथा आवश्यक सावधानियों की जानकारी दी गई। विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता करते हुए प्रश्न पूछे तथा विषय से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियाँ प्राप्त किए।इस अवसर पर शिक्षक हीराधर साव,रेखा पाण्डेय,आसमा परविन, सरिता सिदार सहित काफी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।