मगरलोड विकासखंड के ग्राम दमकाडीह में सिंचाई विभाग की कथित लापरवाही का खामियाजा एक बार फिर किसानों को भुगतना पड़ रहा है। समय पर नहर की मरम्मत और नियमित रखरखाव नहीं होने के कारण माइनर नहर बीच से टूट गई, जिससे आसपास के लगभग 80 से 100 एकड़ कृषि क्षेत्र में पानी भर गया। खेतों में खड़ी धान की नई फसल पूरी तरह जलमग्न हो गई है और किसानों को लाखों रुपये के नुकसान की आशंका है। अचानक हुए इस हादसे ने किसानों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है और पूरे इलाके में चिंता का माहौल है। ग्रामीणों के अनुसार इस वर्ष अच्छी बारिश होने के कारण किसान काफी उत्साहित थे। उन्होंने समय पर धान की बुवाई और रोपाई शुरू कर दी थी और बेहतर उत्पादन की उम्मीद कर रहे थे। लेकिन माइनर नहर टूटते ही उसका पूरा पानी तेजी से खेतों में फैल गया।
अच्छी बारिश से बढ़ी थी उम्मीद
कुछ ही घंटों में हरे-भरे खेत तालाब जैसे नजर आने लगे। जहां किसान अपनी मेहनत से फसल तैयार करने में जुटे थे, वहां अब केवल पानी ही पानी दिखाई दे रहा है। कई खेतों में धान के पौधे पूरी तरह डूब गए हैं, जिससे उनके सड़ने का खतरा भी बढ़ गया है। ग्रामीणों ने सिंचाई विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि हर साल नहर की मरम्मत के नाम पर सरकारी रिकॉर्ड में काम पूरा दिखा दिया जाता है, लेकिन वास्तविक स्थिति कुछ और ही होती है। इस बार नहर बीच से इतनी बुरी तरह ध्वस्त हुई कि वहां करीब 30 फीट गहरा और लगभग 40 फीट चौड़ा गड्ढा बन गया। इसी टूटे हिस्से से भारी मात्रा में पानी लगातार खेतों की ओर बह रहा है, जिससे नुकसान लगातार बढ़ता जा रहा है।पिछले साल भी टूटी थी यही नहर
किसानों का कहना है कि यह कोई पहली घटना नहीं है। पिछले वर्ष भी इसी स्थान पर नहर टूटने से बड़ी संख्या में खेतों में पानी भर गया था और किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ा था। उस समय विभाग ने मरम्मत कराए जाने का दावा किया था, लेकिन एक साल के भीतर ही नहर फिर टूट गई। इससे साफ है कि मरम्मत केवल औपचारिकता बनकर रह गई और स्थायी समाधान की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
कई बार दी गई थी सूचना
प्रभावित किसानों का आरोप है कि उन्होंने कई बार सिंचाई विभाग और स्थानीय प्रशासन को नहर की कमजोर स्थिति की जानकारी दी थी। ग्रामीणों ने समय रहते मजबूत मरम्मत कराने की मांग भी की थी, लेकिन उनकी शिकायतों पर गंभीरता से ध्यान नहीं दिया गया। यदि विभाग समय रहते आवश्यक मरम्मत कर देता, तो आज इतनी बड़ी मात्रा में फसल बर्बाद नहीं होती। अब किसानों के सामने दोबारा खेती करने और अतिरिक्त खर्च उठाने की चिंता खड़ी हो गई है।बहकर आ रहीं मछलियां
मौके पर पहुंचने पर साफ दिखाई देता है कि नहर टूटने के बाद तेज बहाव सीधे खेतों की ओर जा रहा है। दूर-दूर तक फैले खेत पूरी तरह पानी में डूबे हुए हैं। कई किसान अपने खेतों से पानी निकालने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन लगातार पानी आने से उनकी मेहनत बेअसर साबित हो रही है। जलभराव इतना अधिक है कि नहर से बहकर मछलियां भी खेतों में पहुंच गई हैं। ग्रामीणों द्वारा खेतों में मछलियां पकड़ते हुए तस्वीरें भी सामने आई हैं, जो इस स्थिति की गंभीरता को दर्शाती हैं।
समाधान की उठाई मांग
ग्रामीणों और प्रभावित किसानों ने प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप करने की मांग की है। उनका कहना है कि सबसे पहले नहर की स्थायी मरम्मत कराई जाए, खेतों से पानी निकालने की व्यवस्था की जाए और जिन किसानों की फसल बर्बाद हुई है उन्हें उचित आर्थिक मुआवजा दिया जाए। किसानों का कहना है कि यदि जल्द राहत नहीं मिली तो नुकसान और बढ़ सकता है तथा कई परिवार आर्थिक संकट में आ जाएंगे।जल संसाधन विभाग ने क्या कहा
इस मामले में जल संसाधन विभाग के कोड क्रमांक-90 के कार्यपालन अभियंता शिव कुमार चंद्राकर ने बताया कि सूचना मिलते ही वे मौके पर पहुंचे और स्थिति का निरीक्षण किया। उन्होंने कहा कि इस स्थान पर पहले भी मरम्मत कराई जा चुकी है, लेकिन लगातार बारिश होने के कारण फिलहाल तत्काल मरम्मत कार्य संभव नहीं है। उनके अनुसार नहर में बह रहा पानी किसानों की सिंचाई के लिए छोड़ा गया पानी है। जैसे ही बारिश कम होगी, आवश्यक मरम्मत कार्य शुरू कराया जाएगा।
प्रशासन से त्वरित राहत की उम्मीद
फिलहाल दमकाडीह के किसान प्रशासन की ओर उम्मीद भरी नजरों से देख रहे हैं। उनका कहना है कि सरकार और प्रशासन जल्द से जल्द स्थायी समाधान निकालें, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा न हों। साथ ही जिन किसानों की मेहनत और फसल पानी में डूबकर बर्बाद हुई है, उन्हें शीघ्र आर्थिक सहायता प्रदान की जाए। यह घटना एक बार फिर सिंचाई व्यवस्था की कमजोरियों और रखरखाव में लापरवाही की ओर गंभीर सवाल खड़े करती है, जिसका सबसे बड़ा नुकसान हर बार किसानों को ही उठाना पड़ता है।