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किसान खेत में फसल के साथ
किसान खेत में फसल के साथ
कबीरधाम

आधुनिक खेती : मक्का और टमाटर की अनोखी खेती से चमकी किसान की किस्मत

कबीरधाम जिले के खैरझिटी गांव के किसान ललित साहू ने आधुनिक तकनीकों और मिश्रित खेती के जरिए खेती को लाभकारी बना दिया है। मक्का-टमाटर और गन्ना-प्याज जैसी फसलों के सफल प्रयोग से उन्होंने उत्पादन और आय दोनों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी की है। उनकी नवाचार आधारित खेती आज क्षेत्र के अन्य किसानों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन रही है।

कीर्तिमान डेस्क
कीर्तिमान डेस्क
22 Jun 2026, 11:39 AM
कबीरधाम

कबीरधाम जिले के खैरझिटी गांव के किसान ललित साहू आधुनिक और वैज्ञानिक खेती के जरिए अपनी अलग पहचान बना चुके हैं। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने खेती में नए प्रयोग अपनाकर न केवल अपनी आय बढ़ाई है, बल्कि आसपास के किसानों के लिए भी एक मिसाल पेश की है। उनकी सफलता इस बात का उदाहरण है कि सही योजना और तकनीक के सहारे खेती को लाभ का सौदा बनाया जा सकता है।

बिरकोना से 12वीं तक की पढ़ाई पूरी करने वाले ललित ने खेती को केवल परंपरा नहीं, बल्कि एक व्यवसाय की तरह समझा। उन्होंने महसूस किया कि केवल धान और चना जैसी पारंपरिक फसलों पर निर्भर रहने से आय सीमित रहती है। इसके बाद उन्होंने फसल चयन में बदलाव किया और सब्जी उत्पादन के साथ मिश्रित खेती को अपनाया। आज वे अपनी जमीन के अलावा करीब तीन एकड़ अतिरिक्त भूमि लीज पर लेकर खेती कर रहे हैं।

सब्जी उत्पादन से बढ़ी आमदनी

ललित वर्तमान में प्याज, टमाटर, बैंगन, चना और गन्ना जैसी कई फसलों की खेती करते हैं। पिछले सात वर्षों से उनका मुख्य फोकस सब्जी उत्पादन पर है। उनका मानना है कि यदि किसान मौसम, बाजार की मांग और नई तकनीकों को समझकर खेती करें तो कम भूमि में भी बेहतर उत्पादन और अधिक मुनाफा हासिल किया जा सकता है। भीषण गर्मी और बढ़ते तापमान से टमाटर की फसल को बचाने के लिए ललित ने एक अनूठा प्रयोग किया। उन्होंने एक ही खेत में टमाटर और मक्का की फसल को साथ लगाया तथा ड्रिप सिंचाई प्रणाली का उपयोग किया। उनके अनुसार मक्का के पौधे प्राकृतिक छाया प्रदान करते हैं, जिससे खेत का तापमान नियंत्रित रहता है और तेज धूप का सीधा असर टमाटर की फसल पर नहीं पड़ता।

यूट्यूब से सीखी तकनीक, मिला शानदार परिणाम

ललित बताते हैं कि यह तकनीक उन्होंने इंटरनेट और यूट्यूब के माध्यम से सीखी थी। प्रयोग सफल रहने के बाद उन्हें उत्पादन में सकारात्मक परिणाम देखने को मिले। गर्मी के मौसम में भी फसल को कम नुकसान हुआ और पैदावार में वृद्धि दर्ज की गई। इससे खेती की लागत और जोखिम दोनों में कमी आई।

मिश्रित खेती को बढ़ावा देते हुए ललित ने गन्ने के साथ प्याज की खेती का भी सफल मॉडल विकसित किया है। सामान्यतः गन्ने की कतारों के बीच ढाई से तीन फीट की दूरी रखी जाती है, लेकिन वे चार फीट का अंतर रखते हैं और बीच की जगह में प्याज लगाते हैं। इससे एक ही खेत से दो फसलों का लाभ मिल जाता है।

एक ही खेत से लाखों की अतिरिक्त कमाई

ललित के अनुसार गन्ने की फसल से सालभर में करीब एक लाख रुपये की आय होती है, जबकि प्याज की फसल मात्र छह महीने में लगभग इतनी ही कमाई करा देती है। खास बात यह है कि प्याज की फसल गन्ना तैयार होने से पहले निकल जाती है, जिससे अतिरिक्त आय के साथ सिंचाई के पानी और खेत की उपलब्ध जगह का भी बेहतर उपयोग हो जाता है। फसलों की बेहतर गुणवत्ता बनाए रखने के लिए ललित जैविक और रासायनिक दोनों प्रकार के खादों का उपयोग करते हैं, लेकिन उनकी प्राथमिकता जैविक खेती को बढ़ावा देने की रहती है। पत्ती-चूसक कीटों से बचाव के लिए वे नीम ऑयल का प्रयोग करते हैं। इससे रासायनिक दवाओं पर निर्भरता कम होती है और फसल की गुणवत्ता भी बेहतर बनी रहती है।

बाजार की मांग को मानते हैं सफलता की कुंजी

ललित का मानना है कि खेती में सफलता का सबसे बड़ा आधार समय के अनुसार सही फसल का चयन है। वे हर दो वर्ष में फसल चक्र बदलते हैं, जिससे मिट्टी की उर्वरा शक्ति बनी रहती है और रोग-कीटों का खतरा भी कम होता है। बारिश के मौसम में धनिया जैसी अधिक मांग वाली फसलों की खेती कर वे बाजार की जरूरतों का लाभ उठाते हैं।

लगातार नवाचार और वैज्ञानिक सोच के कारण ललित साहू आज अपने क्षेत्र में प्रगतिशील किसान के रूप में पहचाने जाते हैं। उनकी खेती की पद्धतियां यह साबित करती हैं कि यदि किसान नई तकनीकों को अपनाने का साहस दिखाएं और बाजार की मांग के अनुसार फसलें चुनें, तो खेती को अधिक लाभकारी और टिकाऊ बनाया जा सकता है।

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