कबीरधाम जिले के खैरझिटी गांव के किसान ललित साहू आधुनिक और वैज्ञानिक खेती के जरिए अपनी अलग पहचान बना चुके हैं। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने खेती में नए प्रयोग अपनाकर न केवल अपनी आय बढ़ाई है, बल्कि आसपास के किसानों के लिए भी एक मिसाल पेश की है। उनकी सफलता इस बात का उदाहरण है कि सही योजना और तकनीक के सहारे खेती को लाभ का सौदा बनाया जा सकता है।
बिरकोना से 12वीं तक की पढ़ाई पूरी करने वाले ललित ने खेती को केवल परंपरा नहीं, बल्कि एक व्यवसाय की तरह समझा। उन्होंने महसूस किया कि केवल धान और चना जैसी पारंपरिक फसलों पर निर्भर रहने से आय सीमित रहती है। इसके बाद उन्होंने फसल चयन में बदलाव किया और सब्जी उत्पादन के साथ मिश्रित खेती को अपनाया। आज वे अपनी जमीन के अलावा करीब तीन एकड़ अतिरिक्त भूमि लीज पर लेकर खेती कर रहे हैं।
सब्जी उत्पादन से बढ़ी आमदनी
यूट्यूब से सीखी तकनीक, मिला शानदार परिणाम
ललित बताते हैं कि यह तकनीक उन्होंने इंटरनेट और यूट्यूब के माध्यम से सीखी थी। प्रयोग सफल रहने के बाद उन्हें उत्पादन में सकारात्मक परिणाम देखने को मिले। गर्मी के मौसम में भी फसल को कम नुकसान हुआ और पैदावार में वृद्धि दर्ज की गई। इससे खेती की लागत और जोखिम दोनों में कमी आई।
मिश्रित खेती को बढ़ावा देते हुए ललित ने गन्ने के साथ प्याज की खेती का भी सफल मॉडल विकसित किया है। सामान्यतः गन्ने की कतारों के बीच ढाई से तीन फीट की दूरी रखी जाती है, लेकिन वे चार फीट का अंतर रखते हैं और बीच की जगह में प्याज लगाते हैं। इससे एक ही खेत से दो फसलों का लाभ मिल जाता है।
एक ही खेत से लाखों की अतिरिक्त कमाई
बाजार की मांग को मानते हैं सफलता की कुंजी
ललित का मानना है कि खेती में सफलता का सबसे बड़ा आधार समय के अनुसार सही फसल का चयन है। वे हर दो वर्ष में फसल चक्र बदलते हैं, जिससे मिट्टी की उर्वरा शक्ति बनी रहती है और रोग-कीटों का खतरा भी कम होता है। बारिश के मौसम में धनिया जैसी अधिक मांग वाली फसलों की खेती कर वे बाजार की जरूरतों का लाभ उठाते हैं।
लगातार नवाचार और वैज्ञानिक सोच के कारण ललित साहू आज अपने क्षेत्र में प्रगतिशील किसान के रूप में पहचाने जाते हैं। उनकी खेती की पद्धतियां यह साबित करती हैं कि यदि किसान नई तकनीकों को अपनाने का साहस दिखाएं और बाजार की मांग के अनुसार फसलें चुनें, तो खेती को अधिक लाभकारी और टिकाऊ बनाया जा सकता है।