AAP MLA Resignation: पंजाब में AAP को बड़ा झटका, 24 घंटे में तीन विधायकों ने दिया इस्तीफा, BJP में जाने की चर्चा तेज
AAP MLA Resignation: पंजाब में आम आदमी पार्टी को 24 घंटे के भीतर तीन विधायकों के इस्तीफे से बड़ा झटका लगा है। कुंवर विजय प्रताप सिंह समेत तीन नेताओं के पार्टी छोड़ने के बाद भाजपा में शामिल होने की अटकलें तेज हो गई हैं।
AAP MLA Resignation: पंजाब में विधानसभा चुनावों की सरगर्मियों के बीच आम आदमी पार्टी (AAP) की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। जब से पार्टी ने प्रत्याशियों की पहली सूची जारी की है, तभी से अंदरूनी कलह और इस्तीफों का दौर जारी है। महज 24 घंटे के भीतर पार्टी के तीन प्रमुख विधायकों ने विधानसभा और आप की प्राथमिक सदस्यता से
इस्तीफा देकर बड़ा राजनीतिक धमाका कर दिया है। राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज है कि तीनों पूर्व विधायक जल्द ही भारतीय जनता पार्टी (BJP) का दामन थाम सकते हैं। ऐन चुनाव के वक्त हुए इस घटनाक्रम को आम आदमी पार्टी के लिए एक बड़े झटके के रूप में देखा जा रहा है।
24 घंटे में कैसे बदला राजनीतिक समीकरण?
इस्तीफों की यह सिलसिलेवार शुरुआत रविवार को हुई, जब समाना से विधायक चेतन सिंह जौरामाजरा और सनौर से विधायक हरमीत सिंह पठानमाजरा ने पार्टी छोड़ दी। अभी पार्टी इस झटके से उबर भी नहीं पाई थी कि सोमवार सुबह अमृतसर नॉर्थ के विधायक कुंवर विजय प्रताप सिंह ने भी पंजाब विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। बताया जा रहा है कि कुंवर विजय प्रताप ने अपना पत्र रविवार को ही सौंप दिया था, लेकिन इसकी आधिकारिक पुष्टि सोमवार सुबह हुई।
पूर्व IPS कुंवर विजय प्रताप की AAP से दूरी
पूर्व आईपीएस अधिकारी रहे कुंवर विजय प्रताप सिंह 2022 के पंजाब विधानसभा चुनाव से ठीक पहले अपनी सरकारी सेवा छोड़कर राजनीति में उतरे थे। उन्होंने आम आदमी पार्टी का दामन थामा और अमृतसर
नॉर्थ से चुनाव जीता। हालांकि, पार्टी के साथ उनका यह सफर 5 साल भी पूरा नहीं हो सका। पिछले कुछ समय से वे पार्टी नेतृत्व से असहज चल रहे थे। आम आदमी पार्टी ने उन पर पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने का आरोप लगाते हुए पहले ही उन्हें पार्टी से निष्कासित कर दिया था। अब चर्चा है कि वे भाजपा के मंच से अपनी नई राजनीतिक पारी शुरू कर सकते हैं।
इस्तीफे के बाद भावुक हुए कुंवर विजय प्रताप
सदस्यता त्यागने के बाद कुंवर विजय प्रताप ने अपने क्षेत्र की जनता का आभार व्यक्त करते हुए कहा:
"अमृतसर के लोगों ने जो प्यार और सम्मान मुझे दिया है, उसके लिए मैं अपनी आखिरी सांस तक उनका ऋणी रहूंगा। मेरी सबसे बड़ी उपलब्धि यह रही कि मैंने राजनीति में 'माई-बाप' कल्चर को खत्म किया। विधानसभा के भीतर मैंने हमेशा अपने क्षेत्र के लोगों की बेबाक आवाज उठाई और इतिहास में पहली बार गलियों व मोहल्लों के जमीनी मुद्दों को सीधे सदन में रखा।"
पंजाब की राजनीति में आए इस नए भूचाल ने राज्य के चुनावी समीकरणों को पूरी तरह गर्मा दिया है। अब देखना यह होगा कि आम आदमी पार्टी इस बगावत से कैसे निपटती है और विधायकों के पाला बदलने से भाजपा को कितना फायदा मिलता है।