Punjab Assembly Election: चुनावों से पहले सत्ताधारी आम आदमी पार्टी (AAP) की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। उम्मीदवारों की पहली सूची आते ही पार्टी के भीतर बगावत और इस्तीफों का दौर शुरू हो गया है। बीते महज 24 घंटों के भीतर AAP के तीन प्रमुख विधायकों ने न सिर्फ विधानसभा से इस्तीफा दिया, बल्कि पार्टी की प्राथमिक सदस्यता भी छोड़ दी। रविवार को समाना सीट से विधायक चेतन सिंह जोड़ामाजरा और सनौर से विधायक हरमीत सिंह पठानमाजरा ने बगावती तेवर दिखाते हुए इस्तीफा सौंपा। इसके अगले ही दिन, यानी सोमवार सुबह अमृतसर नॉर्थ से विधायक कुंवर विजय प्रताप सिंह ने भी अपना इस्तीफा सौंप दिया।
दिल्ली में थमा भाजपा का दामन
इस्तीफा देने के तुरंत बाद तीनों नेता दिल्ली स्थित भारतीय जनता पार्टी (BJP) के केंद्रीय कार्यालय पहुंचे और औपचारिक रूप से भाजपा में शामिल हो गए। पार्टी के पंजाब प्रभारी सतीश पूनिया, प्रदेश प्रधान केवल सिंह ढिल्लों और राज्य के अन्य दिग्गज नेताओं ने पटका पहनाकर उनका स्वागत किया। ऐन चुनाव से पहले तीन विधायकों का एक साथ भाजपा में जाना आम आदमी पार्टी के लिए बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है।
कुंवर विजय प्रताप और AAP का पुराना तनाव
पूर्व IPS अधिकारी रहे कुंवर विजय प्रताप सिंह ने साल 2022 के विधानसभा चुनाव से ठीक पहले अपनी नौकरी छोड़कर AAP के साथ राजनीति में कदम रखा था। हालांकि, उनकी यह पारी 5 साल भी पूरी नहीं चल सकी। वे लंबे समय से पार्टी नेतृत्व से नाराज चल रहे थे। उन पर पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप लगे थे, जिसके बाद आम आदमी पार्टी ने पहले ही उन्हें निष्कासित कर दिया था। आखिरकार, सोमवार को उन्होंने विधानसभा सदस्यता से भी अपना नाता तोड़ लिया।
माई-बाप कल्चर खत्म किया–इस्तीफे के बाद कुंवर विजय प्रताप
इस्तीफे के बाद भावुक होते हुए कुंवर विजय प्रताप सिंह ने कहा, जनता ने मुझे जो प्यार और सम्मान दिया है, उसके लिए मैं आखिरी सांस तक उनका आभारी रहूंगा। मेरी सबसे बड़ी उपलब्धि यह रही कि मैंने राजनीति में चल रहे 'माई-बाप' कल्चर को खत्म करने की कोशिश की। मैंने हमेशा सदन में अमृतसर के लोगों की सीधी आवाज उठाई और पहली बार मोहल्लों व गलियों के जमीनी मुद्दों को विधानसभा के पटल पर रखा।






