रेलवे टिकट दलाली के 22 साल पुराने मामले में फरार चल रहे आरोपी ने आखिरकार विशेष रेलवे न्यायालय रायपुर में आत्मसमर्पण कर दिया। आरोपी पिछले करीब 15 वर्षों से दुबई में ड्राइवर की नौकरी कर रहा था। उसके खिलाफ वर्ष 2012 से स्थायी गिरफ्तारी वारंट (पीएनबीडब्ल्यू) जारी था। आरपीएफ दुर्ग की लगातार कोशिशों, परिवार से संपर्क और समझाइश के बाद वह भारत लौटा और शुक्रवार को अपने वकील के साथ अदालत में पेश हुआ।
दलाली का मामला रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) के अनुसार, वर्ष 2004 में दुर्ग आरपीएफ पोस्ट में रेलवे अधिनियम की धारा 143 के तहत टिकट दलाली का मामला दर्ज किया गया था। इस प्रकरण में सुपेला के लक्ष्मी नगर निवासी तिजेंदर सिंह उर्फ टिंकू (46) के खिलाफ विशेष रेलवे न्यायालय रायपुर ने 18 अप्रैल 2012 को स्थायी गिरफ्तारी वारंट जारी किया था।
वारंट की तामील के दौरान शुरू हुई तलाश
काफी समय तक आरोपी का कोई सुराग नहीं मिलने के कारण वारंट लंबित रहा। आरपीएफ की टीम जब वारंट में दर्ज पते पर पहुंची तो पता चला कि आरोपी वहां वर्षों पहले ही घर छोड़ चुका है। आगे की जांच और मुखबिर से मिली जानकारी के आधार पर टीम पंजाब के गुरदासपुर जिले के बटाला स्थित उसके पैतृक गांव पहुंची और वहां परिजनों से पूछताछ की। आरोपी के माता-पिता और पत्नी ने आरपीएफ को बताया कि तिजेंदर सिंह पिछले लगभग 15 वर्षों से दुबई में रहकर ड्राइवर के रूप में काम कर रहा है। इसके बाद आरपीएफ ने परिवार को वारंट की प्रति और नोटिस सौंपा। साथ ही आरोपी और उसके परिजनों से लगातार संपर्क बनाए रखा और अदालत में पेश होकर कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के लिए प्रेरित किया।दुबई से लौटकर अदालत में हुआ पेश
आरपीएफ की समझाइश के बाद आरोपी भारत लौटा और 24 जुलाई को अपने अधिवक्ता के साथ विशेष रेलवे न्यायालय रायपुर में उपस्थित हुआ। अदालत में उसने स्वीकार किया कि वारंट और नोटिस में दर्ज नाम और पता उसी का है। साथ ही उसने अपने खिलाफ दर्ज रेलवे टिकट दलाली के मामले को भी स्वीकार कर लिया। मामले की सुनवाई के बाद विशेष रेलवे न्यायालय ने आरोपी को एक दिन की टीआरसी (टिल द राइजिंग ऑफ कोर्ट) की सजा सुनाई और ₹5,000 का जुर्माना लगाया। अर्थदंड जमा करने के बाद मामले का विधिवत निपटारा कर दिया गया।