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Azam Khan and Abdullah Azam get bail from High Court (Image Source: social media)
Azam Khan and Abdullah Azam get bail from High Court (Image Source: social media)
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Allahabad High Court: आज़म खान और अब्दुल्ला आज़म को इलाहाबाद हाईकोर्ट से बड़ी राहत, दो पैन कार्ड मामले में सजा निलंबित

Allahabad High Court: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दो पैन कार्ड मामले में आजम खान और अब्दुल्ला आजम की सजा पर रोक लगाते हुए उन्हें जमानत दे दी है। हालांकि, आजम खान की रिहाई अन्य लंबित मामलों के कारण अटक सकती है।

अप्पू धीवर |  कीर्तिमान न्यूज
प्रकाशित: 29 Oct 2026, 01:27 PM · 3 मिनट पढ़ने का समय
उत्तर प्रदेश
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश
Allahabad High Court: उत्तर प्रदेश की राजनीति के लिहाज से एक बड़ी खबर सामने आ रही है। समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और प्रदेश के पूर्व मंत्री आज़म खान को लंबी कानूनी लड़ाई के बाद इलाहाबाद हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। अदालत ने दो पैन कार्ड रखने से जुड़े मामले में उनकी सजा को निलंबित (सस्पेंड) करते हुए उन्हें जमानत दे दी है। इस फैसले से न केवल आज़म खान, बल्कि उनके बेटे अब्दुल्ला आज़म को भी बड़ी कानूनी राहत मिली है। हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम के बीच सबसे बड़ा सवाल यह बना हुआ है कि क्या आज़म खान अभी जेल से बाहर आ पाएंगे या नहीं? आइए जानते हैं इस मामले से जुड़े सभी अहम पहलू।

पिता-पुत्र को मिली जमानत, लेकिन बाहर आने पर संशय क्यों? 

इलाहाबाद हाईकोर्ट की सिंगल बेंच (जस्टिस समित गोपाल) ने आज़म खान और अब्दुल्ला आज़म की आपराधिक पुनरीक्षण याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए यह फैसला सुनाया है। गौरतलब है कि दो पैन कार्ड मामले में 17 नवंबर 2025 को अदालत ने दोनों पिता-पुत्र को 7-7 साल की सजा सुनाई थी, जिसके बाद से वे जेल में बंद हैं। दोनों को जेल में करीब 11 महीने और 12 दिन का समय बीत चुका है।
  • अब्दुल्ला आज़म का बाहर आना तय: कोर्ट के इस नए फैसले के बाद यह लगभग तय माना जा रहा है कि अब्दुल्ला आज़म जल्द ही जेल से रिहा हो जाएंगे।

  • आज़म खान की राह में अभी पेंच: दूसरी ओर, वरिष्ठ नेता आज़म खान की रिहाई पर अभी भी संशय के बादल मंडरा रहे हैं। इसकी मुख्य वजह उनके खिलाफ दर्ज अन्य पेंडिंग मामले हैं। उनके वकीलों के अनुसार, आज़म के खिलाफ अभी दो मामले विचाराधीन हैं—एक मामला हाल ही में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने दर्ज किया है, जबकि दूसरा मामला 10 सितंबर का है जिसे यूपी विजिलेंस ने दर्ज किया था। यदि इन मामलों में आगे भी वारंट जारी नहीं होते हैं, तभी आज़म खान के जेल से बाहर आने का रास्ता साफ हो सकेगा।

    राजनीतिक हलचल और चुनाव का समीकरण 

  • उत्तर प्रदेश में अगले कुछ महीनों के भीतर होने वाले चुनावों को देखते हुए इस फैसले को राजनीतिक गलियारों में काफी अहम माना जा रहा है। यदि आज़म खान जेल से बाहर आने में कामयाब रहते हैं, तो यह समाजवादी पार्टी के लिए एक बड़ा मनोवैज्ञानिक और राजनीतिक बूस्ट साबित हो सकता है। भले ही आज़म खान लंबे समय से जेल के सलाखों के पीछे रहे हों, लेकिन पश्चिमी उत्तर प्रदेश और कई अन्य सीटों पर आज भी उनका सीधा प्रभाव और दखल माना जाता है। यही वजह है कि कुछ समय पहले सपा प्रमुख अखिलेश यादव खुद उनसे मिलने जेल पहुंचे थे, जिसे राजनीतिक रूप से काफी महत्वपूर्ण माना गया था।

    एक दिन पहले ही अटैच हुई थी जौहर यूनिवर्सिटी से जुड़ी संपत्ति 

    आज़म खान के लिए यह राहत भरे दिन की शुरुआत उस घटनाक्रम के ठीक एक दिन बाद आई है, जब प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने उनकी मुश्किलें बढ़ाते हुए जौहर यूनिवर्सिटी से जुड़ी संपत्तियों को अटैच कर लिया था। उससे कुछ ही दिन पहले ईडी ने लंबी पूछताछ के बाद आज़म खान और अन्य लोगों के खिलाफ नया केस भी दर्ज किया था। एक तरफ जहां कानूनी शिकंजा कसता जा रहा है, वहीं हाईकोर्ट के इस फैसले ने उनके समर्थकों के बीच एक नई उम्मीद जगा दी है।
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