सरगुजा जिले में खाद की कालाबाजारी की लगातार मिल रही शिकायतों को लेकर प्रदेश के कृषि मंत्री रामविचार नेताम ने कृषि विभाग के अधिकारियों पर नाराजगी जताई है। गुरुवार को अंबिकापुर दौरे के दौरान उन्होंने कृषि विभाग के उप संचालक पीतांबर सिंह दीवान को स्पष्ट शब्दों में निर्देश दिए कि खाद की कालाबाजारी में शामिल लोगों के साथ-साथ उन्हें संरक्षण देने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की जाए। मंत्री ने कहा कि किसानों के हितों से किसी भी तरह का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।
पहले भी उठ चुके हैं कालाबाजारी के मामले
सरगुजा जिले में खाद की कालाबाजारी का मुद्दा पहले भी चर्चा में रहा है। पिछले वर्ष किसानों की शिकायतों के बाद तत्कालीन फर्टिलाइजर इंस्पेक्टर जे. आलम को अंबिकापुर से हटाने के निर्देश दिए गए थे। हालांकि विभागीय आदेश में हटाने की वजह सार्वजनिक नहीं की गई थी। बाद में उनकी जगह सोहन भगत को फर्टिलाइजर इंस्पेक्टर बनाया गया, लेकिन कुछ समय बाद वे कथित रूप से रिश्वत लेते हुए पकड़े गए। इसके बाद विभाग ने फिर से जे. आलम को इसी जिम्मेदारी पर नियुक्त कर दिया। इसके बाद जिले में खाद वितरण व्यवस्था को लेकर फिर सवाल उठने लगे।
नोटिस और जब्ती तक सीमित रही कार्रवाई
खाद की कालाबाजारी के मामलों में कृषि विभाग की कार्रवाई पर भी सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि अधिकांश मामलों में विभाग केवल नोटिस जारी करने या खाद जब्त करने तक ही सीमित रहता है, जबकि शासन के निर्देशों के अनुसार दोषी पाए जाने पर संबंधित दुकान का लाइसेंस निरस्त करने और संचालक के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की कार्रवाई भी की जानी चाहिए। स्थानीय स्तर पर कार्रवाई कमजोर रहने के कारण किसानों को बाजार में 266 रुपये की यूरिया की बोरी 700 रुपये तक में खरीदने की नौबत आ रही है।संरक्षण देने वालों पर भी कार्रवाई के निर्देश
अंबिकापुर पहुंचने के बाद कृषि मंत्री ने उप संचालक पीतांबर सिंह दीवान को अपने सरकारी आवास पर बुलाकर पूरे मामले की जानकारी ली। उन्होंने पूछा कि खाद की कालाबाजारी करने वालों को संरक्षण देने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों पर अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई। मंत्री ने निर्देश दिए कि जिन अधिकारियों या कर्मचारियों की भूमिका संदिग्ध दिखाई देती है, उनके खिलाफ तत्काल कार्रवाई की जाए और ऐसे अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की जाए जो प्रभावी ढंग से कालाबाजारी पर रोक लगा सकें।
नवानगर प्रकरण ने बढ़ाए सवाल
कुछ दिन पहले सरगुजा जिले के नवानगर में खाद की कालाबाजारी का एक बड़ा मामला सामने आया था। आरोप है कि संबंधित गोदाम के खिलाफ समय रहते सख्त कार्रवाई नहीं की गई। अधिकारियों ने व्यापारी के बाहर होने का हवाला देकर जांच और गोदाम सील करने की प्रक्रिया टाल दी। हालांकि प्रशासनिक नियमों के तहत आवश्यक स्थिति में तहसीलदार या एसडीएम की मौजूदगी में पंचनामा बनाकर गोदाम खोलने और जांच करने की प्रक्रिया अपनाई जा सकती थी। इस मामले के बाद कृषि विभाग की कार्यशैली पर भी सवाल उठे हैं।सरकारी खाद गोदाम का किया निरीक्षण
अंबिकापुर प्रवास के दौरान कृषि मंत्री रामविचार नेताम ने सरकारी खाद गोदाम का भी निरीक्षण किया। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि किसानों को समय पर पर्याप्त मात्रा में खाद उपलब्ध कराई जाए और जिले में किसी भी प्रकार की कृत्रिम कमी या कालाबाजारी की स्थिति पैदा न होने दी जाए। अब सभी की नजर इस बात पर रहेगी कि मंत्री के सख्त निर्देशों के बाद कृषि विभाग दोषियों और उन्हें संरक्षण देने वालों के खिलाफ ठोस कार्रवाई करता है या मामला केवल निर्देशों तक ही सीमित रह जाता है।