कुछ दशकों में ऑफिस कल्चर में बड़ा बदलाव आया है, जिससे लोगों के काम करने के तरीके और जीवनशैली में भी बदलाव आया है। हालांकि, काम के दबाव और तनाव के बीच लोग कई बार शरीर के छोटे-छोटे संकेतों को नजरअंदाज कर देते हैं। इनमें हाई बीपी यानी ब्लड प्रेशर एक आम समस्या बनती जा रही है। लंबे समय तक लैपटॉप पर काम करना, मानसिक तनाव, नींद की कमी, देर रात तक जागना और शारीरिक गतिविधियों की कमी के कारण 25 से 45 वर्ष की उम्र के लोगों में भी हाई बीपी के मामले बढ़ रहे हैं। लेकिन चिंता की बात यह है कि कई लोगों का बीपी डॉक्टर के क्लिनिक में सामान्य आता है, जबकि ऑफिस या रोजमर्रा के काम के दौरान लगातार बढ़ा रहता है।
मास्क्ड हाइपरटेंशन क्या होता है?
मास्क्ड हाइपरटेंशन ऐसी स्थिति है जिसमें डॉक्टर के क्लिनिक में ब्लड प्रेशर सामान्य दिखाई देता है, लेकिन घर, ऑफिस, यात्रा या दैनिक गतिविधियों के दौरान यह लगातार बढ़ा रहता है। इसे वाइट कोट हाइपरटेंशन के विपरीत माना जाता है। वाइट कोट हाइपरटेंशन में डॉक्टर के पास जाने पर बीपी बढ़ जाता है, जबकि बाहर सामान्य रहता है। वहीं, मास्क्ड हाइपरटेंशन में क्लिनिक की जांच में बीपी सामान्य दिखता है, जिससे कई बार समस्या का पता देर से चलता है। इस दौरान शरीर की रक्त वाहिकाओं और हृदय पर लगातार दबाव पड़ता रहता है।
हाई बीपी से कैसे अलग है मास्क्ड हाइपरटेंशन?
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सामान्य हाई बीपी |
मास्क्ड हाइपरटेंशन |
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हर जगह बीपी बढ़ा रहता है |
केवल दैनिक गतिविधियों के दौरान बढ़ता है |
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आसानी से पहचान में आ जाता है |
सामान्य जांच में छूट सकता है |
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इलाज जल्दी शुरू हो सकता है |
पहचान में देरी हो सकती है |
इसी कारण डॉक्टर केवल एक बार की बीपी रीडिंग के आधार पर फैसला नहीं लेते, बल्कि जरूरत पड़ने पर घर या 24 घंटे की बीपी मॉनिटरिंग की सलाह देते हैं।

मास्क्ड हाइपरटेंशन क्यों बढ़ रहा है?
आज की बदलती जीवनशैली युवाओं में इस समस्या का बड़ा कारण बन रही है। लगातार ऑफिस में बैठकर काम करना, डेडलाइन का दबाव, मोबाइल और लैपटॉप का ज्यादा इस्तेमाल, नींद पूरी न होना और तनाव शरीर में तनाव हार्मोन को बढ़ा सकते हैं। इसके अलावा ज्यादा कैफीन, धूम्रपान, प्रोसेस्ड फूड और कम शारीरिक गतिविधि भी ब्लड प्रेशर को प्रभावित करते हैं। कई बार आराम की स्थिति में बीपी सामान्य रहता है, लेकिन काम के दौरान यह तेजी से बढ़ जाता है।
बिना लक्षण के भी हो सकता है खतरनाक
मास्क्ड हाइपरटेंशन की सबसे बड़ी समस्या यह है कि कई लोगों को इसके कोई स्पष्ट लक्षण महसूस नहीं होते। व्यक्ति खुद को पूरी तरह स्वस्थ समझता रहता है, लेकिन अंदर ही अंदर बढ़ा हुआ रक्तचाप शरीर को नुकसान पहुंचाता रहता है।
लंबे समय तक यह स्थिति बनी रहने से धमनियों को नुकसान पहुंच सकता है। इसके कारण हार्ट की मांसपेशियां कमजोर या मोटी हो सकती हैं, स्ट्रोक का खतरा बढ़ सकता है, किडनी प्रभावित हो सकती है और आंखों की रक्त वाहिकाओं पर भी असर पड़ सकता है।