सोशल मीडिया न्यूट्रिशन ट्रेंड से सावधान, हर वायरल सलाह नहीं होती वैज्ञानिक
सोशल मीडिया पर न्यूट्रिशन से जुड़ी कई ऐसी बातें तेजी से वायरल होती हैं, जिनका वैज्ञानिक आधार नहीं होता। क्लोरोफिल ड्रॉप से डिटॉक्स, जरूरत से ज्यादा प्रोटीन, सीड ऑयल को जहर बताना, कार्ब्स से डरना और ग्लूटेन को हर किसी के लिए नुकसानदायक मानना जैसे कई दावे सिर्फ भ्रम हैं। एक्सपर्ट के अनुसार संतुलित डाइट, पर्याप्त पोषण और सही जानकारी ही बेहतर स्वास्थ्य की कुंजी है।
कीर्तिमान डेस्क
06 Aug 2026, 06:30 PM
नई दिल्ली
आज के समय में सोशल मीडिया पर हेल्थ और न्यूट्रिशन से जुड़ी कई ऐसी बातें वायरल हो रही हैं, जिनमें आधी-अधूरी जानकारी होती है। अच्छी लाइटिंग और भरोसेमंद अंदाज में पेश किए गए वीडियो लोगों को आसानी से प्रभावित कर देते हैं, लेकिन हर दावा वैज्ञानिक रूप से सही नहीं होता। कई लोग मानते हैं कि पानी में क्लोरोफिल ड्रॉप डालकर पीने से शरीर के टॉक्सिन बाहर निकल जाते हैं। जबकि क्लोरोफिल पौधों को हरा रंग देने वाला तत्व है। इसका सेवन करने से लिवर की सफाई या शरीर का डिटॉक्स होने का दावा वैज्ञानिक रूप से साबित नहीं है। मैग्नीशियम शरीर के लिए जरूरी मिनरल है, जो नींद, मांसपेशियों और मूड को प्रभावित करता है। हालांकि सामान्य संतुलित आहार लेने वाले लोगों में इसकी कमी होना आम नहीं है।
मैग्नीशियम सप्लीमेंट को लेकर भ्रम
बिना जरूरत रोजाना मैग्नीशियम सप्लीमेंट लेना हमेशा फायदेमंद नहीं होता। सनफ्लॉवर और कैनोला जैसे सीड ऑयल को लेकर सोशल मीडिया पर इन्हें नुकसानदायक बताया जाता है। हालांकि इंसानों पर किए गए मजबूत वैज्ञानिक प्रमाण यह साबित नहीं करते कि सामान्य मात्रा में इन तेलों का इस्तेमाल शरीर के लिए हानिकारक है। कई बार इंटरनेट पर सिर्फ ट्रेंड बदलते हैं, वैज्ञानिक तथ्य नहीं। सोशल मीडिया पर ज्यादा प्रोटीन लेने को लेकर लोगों में दबाव बढ़ गया है। जबकि हर व्यक्ति को अलग मात्रा में प्रोटीन की जरूरत होती है, जो उसकी उम्र, शारीरिक गतिविधि और लक्ष्य पर निर्भर करती है। जरूरत से ज्यादा प्रोटीन लेने से बिना मेहनत के मसल्स नहीं बनतीं।
पेट की जलन, गैस और अपच को नजरअंदाज करना पड़ सकता है भारी।
गट हेल्थ के नाम पर सप्लीमेंट का प्रचार
गट हेल्थ को लेकर इंटरनेट पर कई दावे किए जाते हैं, जहां हर समस्या का समाधान प्रोबायोटिक सप्लीमेंट को बताया जाता है। जबकि अच्छी गट हेल्थ के लिए फाइबर युक्त भोजन, संतुलित डाइट, नींद और सही जीवनशैली ज्यादा महत्वपूर्ण हैं। कोई भी सप्लीमेंट कुछ दिनों में पुरानी समस्याओं को खत्म नहीं कर सकता।
कार्ब्स को लेकर गलत धारणा
कई लोग मानते हैं कि शाम के बाद कार्बोहाइड्रेट खाने से वजन तेजी से बढ़ता है। जबकि शरीर के लिए कार्ब्स का समय नहीं, बल्कि पूरे दिन में ली गई कुल मात्रा ज्यादा मायने रखती है। रात में खाई गई रोटी भी पाचन के बाद उसी तरह काम करती है जैसे दिन में खाया गया भोजन। आजकल कई लोग फलों को भी चीनी की तरह मानकर उनसे दूरी बनाने लगे हैं। जबकि फलों में प्राकृतिक शुगर के साथ फाइबर, विटामिन, मिनरल और एंटीऑक्सीडेंट होते हैं। आम और केले जैसे फलों को बिना वजह डाइट से हटाना स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद नहीं है।
ग्लूटेन फ्री डाइट का बढ़ता ट्रेंड
ग्लूटेन फ्री डाइट सीलिएक डिजीज या ग्लूटेन इनटॉलरेंस वाले लोगों के लिए जरूरी है। लेकिन हर स्वस्थ व्यक्ति के लिए ग्लूटेन छोड़ना सही नहीं है। बिना वजह ग्लूटेन फ्री प्रोडक्ट अपनाने से कम फाइबर और ज्यादा प्रोसेस्ड फूड का सेवन बढ़ सकता है।
वायरल हेल्थ वीडियो पर आंख बंद करके भरोसा न करें
सोशल मीडिया पर 15 सेकेंड की वीडियो तेजी से फैल सकती है, लेकिन स्वास्थ्य से जुड़ा हर दावा सही नहीं होता। किसी भी डाइट या सप्लीमेंट को अपनाने से पहले वैज्ञानिक जानकारी और विशेषज्ञों की सलाह लेना जरूरी है।