पीरियड्स में ब्लड क्लॉट्स क्यों बनते हैं?
पीरियड्स के दौरान गर्भाशय (Uterus) की अंदरूनी परत टूटकर खून और टिशू के रूप में शरीर से बाहर निकलती है। सामान्य स्थिति में शरीर खून को जमने से रोकता है, लेकिन जब ब्लीडिंग बहुत तेज होती है तो खून को पूरी तरह टूटने का समय नहीं मिल पाता और वह छोटे थक्कों का रूप ले सकता है। क्लॉट्स का रंग लाल, गहरा लाल या भूरा हो सकता है। केवल रंग देखकर किसी बीमारी का अंदाजा नहीं लगाया जा सकता।
कितने बड़े क्लॉट्स सामान्य माने जाते हैं?
हर महिला के लिए क्लॉट्स का आकार अलग हो सकता है। पीरियड्स के ज्यादा फ्लो वाले दिनों में छोटे क्लॉट्स आना सामान्य हो सकता है। लेकिन अगर लगभग 2.5 सेंटीमीटर या उससे बड़े क्लॉट्स बार-बार निकल रहे हैं, तो यह हैवी मेंस्ट्रुअल ब्लीडिंग का संकेत हो सकता है।
कब पीरियड्स में क्लॉट्स को गंभीरता से लेना चाहिए?
इन लक्षणों के होने पर डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी हो सकता है—
- पीरियड्स 7 दिनों से ज्यादा चलना
- हर 1-2 घंटे में पैड बदलने की जरूरत पड़ना
- बहुत ज्यादा ब्लीडिंग होना
- बड़े आकार के क्लॉट्स बार-बार निकलना
- कमजोरी, चक्कर या ज्यादा थकान महसूस होना
- पीरियड्स के पैटर्न में अचानक बदलाव आना
ज्यादा ब्लड क्लॉट्स किन समस्याओं से जुड़े हो सकते हैं?
बार-बार बड़े क्लॉट्स आने के पीछे कुछ कारण हो सकते हैं, जैसे—
- हार्मोनल असंतुलन
- यूट्राइन फाइब्रॉएड
- एंडोमेट्रियोसिस
- एडिनोमायोसिस
- ब्लीडिंग से जुड़ी समस्याएं
क्या करें?
पीरियड्स के शुरुआती दिनों में कभी-कभी छोटे क्लॉट्स आना सामान्य हो सकता है। लेकिन अगर ब्लीडिंग बहुत ज्यादा है, क्लॉट्स बड़े हैं या शरीर में कमजोरी महसूस हो रही है, तो स्त्री रोग विशेषज्ञ (Gynecologist) से सलाह लेना बेहतर रहता है।

