Arang News: सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी (CHO) संघ के लगातार विरोध और कड़े रुख के आगे आखिरकार स्वास्थ्य विभाग को झुकना ही पड़ा। बेमेतरा जिले के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. अमृत लाल रोहलदेकर पर लगे गंभीर आरोपों की पुष्टि होने के बाद राज्य सरकार ने उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। शासन की ओर से 15 सितंबर को इस संबंध में आधिकारिक आदेश जारी कर दिया गया।
क्या था पूरा मामला ?
बेमेतरा में पदस्थ डॉ. रोहलदेकर के खिलाफ CHO संघ लंबे समय से मुखर था। संघ ने उन पर महिला स्वास्थकर्मियों से अभद्रता, बैठकों में अमर्यादित व्यवहार और कर्मचारियों का मानसिक उत्पीड़न करने के गंभीर आरोप लगाए थे। इसके अलावा एनएचएम (NHM) के नियमों को ताक पर रखकर कर्मचारियों का गलत तरीके से वेतन रोकने की शिकायत भी शासन से की गई थी।
कलेक्टर कार्यालय का किया था ऐतिहासिक घेराव
प्रशासनिक स्तर पर सुनवाई न होने पर बीते 18 अगस्त को प्रदेश भर से आए करीब एक हजार से अधिक स्वास्थ्यकर्मियों ने बेमेतरा में एकजुट होकर बड़ा प्रदर्शन किया था। कचहरी चौक से निकली इस रैली के बाद संघ ने प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर जांच पूरी होने तक CMHO को पद से हटाने और निष्पक्ष जांच की मांग रखी थी। उस वक्त मिले आश्वासन के बाद कर्मचारियों ने सरकार को 14 दिन का समय दिया था।जांच में सही पाए गए आरोप
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए राज्य स्तर पर बनाई गई जांच टीम ने जब पड़ताल की, तो संघ द्वारा लगाए गए आरोप सही पाए गए। जांच रिपोर्ट आते ही शासन ने डॉ. रोहलदेकर के निलंबन का फरमान जारी कर दिया।कर्मचारियों ने बताया स्वाभिमान की जीत
कार्रवाई के बाद संघ के प्रतिनिधियों ने इस फैसले का स्वागत किया है। उनका कहना है कि यह लड़ाई किसी व्यक्ति से नहीं, बल्कि कार्यस्थल पर सम्मानजनक वातावरण और महिलाओं की सुरक्षा के लिए थी। कर्मचारियों को उम्मीद है कि आगे की विभागीय जांच भी इसी तरह पारदर्शी तरीके से पूरी की जाएगी।

