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किसान रतिराम पटेल की धनिया खेती व ड्रिप सिंचाई
किसान रतिराम पटेल की धनिया खेती व ड्रिप सिंचाई
राज्य सरकार

बदली किस्मत : उद्यानिकी खेती अपनाकर किसान ने रचा सफलता का नया इतिहास

किसान रतिराम पटेल ने पारंपरिक धान खेती छोड़कर उद्यानिकी फसलों की ओर रुख किया और राष्ट्रीय बागवानी मिशन के तहत धनिया की खेती अपनाई। ड्रिप सिंचाई व मल्चिंग जैसी आधुनिक तकनीकों के उपयोग से उन्होंने उत्पादन और गुणवत्ता में सुधार किया। लगभग 0.87 हेक्टेयर क्षेत्र में खेती कर उन्हें बेहतर पैदावार और करीब 50 हजार रुपये तक का लाभ मिला।

कीर्तिमान डेस्क
प्रकाशित: 31 May 2026, 12:21 PM · अपडेट: 09 Sep 2026, 12:08 PM
महासमुंद
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश

महासमुंद जिले के विकासखंड अंतर्गत ग्राम अछरीडीह के प्रगतिशील कृषक  रतिराम पटेल ने पारंपरिक खेती से आगे बढ़ते हुए उद्यानिकी फसलों को अपनाकर अपनी आर्थिक स्थिति में उल्लेखनीय सुधार किया है। वे पहले मुख्य रूप से धान की खेती करते थे, जिसमें अधिक लागत के बावजूद आय सीमित रहती थी। 

बेहतर मुनाफे और आधुनिक कृषि तकनीकों की जानकारी के लिए उन्होंने उद्यानिकी विभाग से संपर्क किया और सब्जी व मसाला फसलों की खेती की ओर कदम बढ़ाया। वर्ष 2025-26 में  पटेल ने राष्ट्रीय बागवानी मिशन के अंतर्गत मसाला क्षेत्र विस्तार योजना से जुड़कर 0.87 हेक्टेयर क्षेत्र में धनिया की खेती की।

ड्रिप सिंचाई और मल्चिंग से बढ़ा उत्पादन

खेती में सुधार के लिए  पटेल ने ड्रिप सिंचाई और मल्चिंग जैसी आधुनिक तकनीकों को अपनाया, जिससे उत्पादन लागत में कमी आई और फसल की गुणवत्ता व उत्पादकता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई। इन तकनीकों ने उनकी खेती को अधिक लाभकारी और टिकाऊ बनाया। रतिराम पटेल बताते हैं कि पहले धान की खेती से सीमित लाभ मिलता था, लेकिन धनिया की खेती अपनाने के बाद उन्हें लगभग 35 क्विंटल प्रति एकड़ उत्पादन प्राप्त हुआ। कम लागत और अधिक उत्पादन के कारण उनकी आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई और कुल लाभ लगभग 50,000 रुपये तक पहुंच गय।

मिशन से मिली नई पहचान

वर्ष 2025-26 में  पटेल ने राष्ट्रीय बागवानी मिशन के अंतर्गत मसाला क्षेत्र विस्तार योजना का लाभ लेते हुए 0.87 हेक्टेयर भूमि में धनिया की खेती की। इस योजना के तहत उन्हें 17,400 रुपये की अनुदान राशि डीबीटी के माध्यम से सीधे बैंक खाते में प्राप्त हुई, जिससे खेती को और मजबूती मिली। खेती में सुधार के लिए उन्होंने ड्रिप सिंचाई और मल्चिंग जैसी आधुनिक तकनीकों को अपनाया। इससे न केवल पानी की बचत हुई, बल्कि उत्पादन लागत में भी कमी आई और फसल की गुणवत्ता एवं पैदावार में उल्लेखनीय सुधार हुआ।

धान की तुलना में धनिया से बेहतर मुनाफा

किसान पटेल के अनुसार पहले धान की खेती से सीमित आय मिलती थी, लेकिन धनिया की खेती से उन्हें लगभग 35 क्विंटल प्रति एकड़ उत्पादन प्राप्त हुआ। कम लागत और बेहतर उत्पादन के चलते उनकी कुल आय में वृद्धि हुई और लगभग 50,000 रुपये तक लाभ अर्जित हुआ। रतिराम पटेल की सफलता से गांव के अन्य किसान भी प्रेरित हो रहे हैं। अब क्षेत्र में उद्यानिकी फसलों और आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाने की प्रवृत्ति बढ़ रही है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा मिल रही है।

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