Badminton News: पीवी सिंधू ने एक बार फिर अपने शानदार खेल का प्रदर्शन करते हुए हाइलो ओपन सुपर-500 टूर्नामेंट का खिताब अपने नाम कर लिया है। जर्मनी के सारब्रुकेन में रविवार को खेले गए फाइनल मुकाबले में सिंधू ने डेनमार्क की खिलाड़ी लाइन होजमार्क कजर्सफेल्ट को सीधे गेमों में 21-12, 21-14 से हराया। दो बार की ओलंपिक पदक विजेता सिंधू ने महज 39 मिनट में मुकाबला जीतकर इस सीजन का अपना दूसरा खिताब हासिल किया।
39 मिनट में फाइनल मुकाबला किया अपने नाम
फाइनल में दूसरी वरीयता प्राप्त पीवी सिंधू शुरुआत से ही लय में नजर आईं। उन्होंने आक्रामक खेल के साथ सटीक शॉट्स और दमदार स्मैश का इस्तेमाल करते हुए अपनी प्रतिद्वंद्वी पर दबाव बनाए रखा। आठवीं वरीयता प्राप्त कजर्सफेल्ट को दोनों गेम में वापसी का ज्यादा मौका नहीं मिला। सिंधू ने पहला गेम 21-12 से जीतने के बाद दूसरे गेम में भी अपना दबदबा कायम रखा और 21-14 से मुकाबला खत्म कर दिया। इस तरह भारतीय खिलाड़ी ने सीधे गेमों में खिताब पर कब्जा जमा लिया।
जापान ओपन के बाद सीजन का दूसरा खिताब
इस सीजन में सिंधू का यह दूसरा बड़ा खिताब है। इससे पहले जुलाई में उन्होंने जापान ओपन जीतकर अपनी शानदार फॉर्म का परिचय दिया था। हालांकि, पिछले सप्ताह फ्रेंच ओपन के फाइनल में उन्हें हार का सामना करना पड़ा था और वह उपविजेता रही थीं। फ्रेंच ओपन की निराशा को पीछे छोड़ते हुए हाइलो ओपन में मिली यह जीत उनके लिए काफी अहम है। इससे आगामी टूर्नामेंटों के लिए उनका आत्मविश्वास भी बढ़ेगा।
कजर्सफेल्ट के खिलाफ रिकॉर्ड और बेहतर किया
डेनमार्क की लाइन होजमार्क कजर्सफेल्ट के खिलाफ सिंधू का रिकॉर्ड पहले से ही मजबूत रहा है। इस फाइनल से पहले दोनों खिलाड़ियों के बीच हुए सात मुकाबलों में सिंधू ने छह बार जीत दर्ज की थी, जबकि कजर्सफेल्ट को सिर्फ एक जीत मिली थी। उनकी यह एकमात्र जीत 2025 के सुदीरमन कप फाइनल में आई थी। हाइलो ओपन के फाइनल में जीत के साथ सिंधू ने एक बार फिर दोनों खिलाड़ियों के बीच अपने बेहतर रिकॉर्ड को बरकरार रखा।
विश्व टूर फाइनल्स में जगह बनाने की उम्मीदें मजबूत
हाइलो ओपन का खिताब जीतने से सिंधू को 9,200 रैंकिंग अंक मिले हैं। इन अंकों से साल के अंत में होने वाले बीडब्ल्यूएफ वर्ल्ड टूर फाइनल्स के लिए क्वालीफाई करने की उनकी संभावनाओं को मजबूती मिली है। सिंधू की यह जीत भारतीय बैडमिंटन के लिहाज से भी अहम है। लगातार अच्छे प्रदर्शन के जरिए उन्होंने दिखाया है कि बड़े अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों में खिताब जीतने की उनकी क्षमता आज भी बरकरार है।







