Bastar Flood: बस्तर में बाढ़ से भारी तबाही, प्रभावितों ने मांगा विशेष राहत पैकेज, फसल नुकसान पर 65,100 रुपए प्रति एकड़ मुआवजे की मांग इंद्रावती नदी में जलस्तर बढ़ने और भारी बारिश के कारण बस्तर जिले के कई गांवों में बाढ़ ने भारी नुकसान पहुंचाया है। सैकड़ों ग्रामीण परिवारों के मकान क्षतिग्रस्त हो गए हैं। खेतों में खड़ी धान समेत दूसरी फसलें बर्बाद हो गई हैं। कृषि भूमि और घरेलू सामान भी पानी में डूबकर नष्ट हो गए हैं। इस आपदा के बाद प्रभावित परिवारों के सामने भोजन, आवास और रोजगार का संकट खड़ा हो गया है।
प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री से विशेष राहत पैकेज की मांग
बाढ़ से हुए नुकसान के बाद प्रभावित ग्रामीणों ने केंद्र और राज्य सरकार से मदद की गुहार लगाई है। इस संबंध में कलेक्टर के माध्यम से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान, केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय को ज्ञापन सौंपा गया है। इसमें प्रभावित परिवारों के लिए विशेष राहत एवं पुनर्वास पैकेज घोषित करने की मांग की गई है।
फसल नुकसान पर 65,100 रुपए प्रति एकड़ मुआवजा मांगा
किसानों ने मांग की है कि राजस्व विभाग वास्तविक स्थिति के आधार पर निष्पक्ष सर्वे कराए और प्रभावित किसानों को प्रति एकड़ 65,100 रुपए का मुआवजा दिया जाए। इसके लिए 21 क्विंटल धान की मात्रा और 3,100 रुपए प्रति क्विंटल की दर को आधार बनाया गया है।तत्काल सहायता और फसल बीमा भुगतान की मांग
ज्ञापन में राजस्व पुस्तक परिपत्र (RBC) 6-4 के प्रावधानों के तहत प्रभावित परिवारों को जल्द आर्थिक सहायता देने की मांग की गई है। गंभीर रूप से प्रभावित किसानों के लिए प्रति एकड़ 50 हजार रुपये तक की विशेष राहत राशि उपलब्ध कराने का आग्रह किया गया है।
क्षतिग्रस्त मकानों के लिए 5 लाख रुपए तक सहायता की मांग
बाढ़ में मकान खो चुके और क्षतिग्रस्त घरों में रहने वाले परिवारों के पुनर्वास का मुद्दा भी ज्ञापन में उठाया गया है। प्रभावितों ने मकानों का सर्वे कराकर नुकसान के अनुसार 1.20 लाख से 5 लाख रुपए तक विशेष आवासीय सहायता देने की मांग की है। पूरी तरह बेघर हो चुके परिवारों को प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत प्राथमिकता देने का आग्रह किया गया है।महिला स्व-सहायता समूहों का कर्ज माफ करने की अपील
बाढ़ का असर केवल किसानों और मकान मालिकों तक सीमित नहीं रहा, राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) से जुड़ी महिला स्व-सहायता समूहों की आजीविका भी बुरी तरह प्रभावित हुई है। इन समूहों की कृषि, पशुपालन और मत्स्य पालन से जुड़ी गतिविधियों को भारी नुकसान पहुंचा है। आर्थिक गतिविधियां ठप होने के कारण महिलाएं बैंक की किस्तें चुकाने की स्थिति में नहीं हैं।












