Bastar Leopard Cubs: जंगलों में मादा तेंदुआ अपने दोनों नवजात बच्चों को संग ले गई
Bastar Leopard Cubs: चित्रकोट रेंज में मां से बिछड़े दो तेंदुआ शावकों को वन विभाग और ग्रामीणों के संयुक्त प्रयास से सुरक्षित मिलाया गया। करीब 48 घंटे की निगरानी के बाद मादा तेंदुआ दोनों शावकों को अपने साथ घने जंगल में ले गई।
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कीर्तिमान न्यूज
26 Aug 2026, 03:58 PM
जगदलपुर
Bastar Leopard Cubs: बस्तर वनमंडल के पहाड़ी इलाके में बीते दो दिनों से चला सांसें थाम देने वाला 'मिशन रीयूनाइट' आखिरकार कामयाब रहा। चित्रकोट रेंज के घने जंगलों में अपनी मां से बिछड़े दो नन्हे शावकों को वन विभाग की सतर्कता और ग्रामीणों की मदद से दोबारा उनकी मां की पनाह मिल गई है। सोमवार की देर रात ट्रैप कैमरे में कैद हुए इस भावुक दृश्य ने वन अमले और ग्रामीणों की चेहरे पर राहत की मुस्कान ला दी। पूरी कहानी 22 अगस्त को शुरू हुई, जब चित्रकोट क्षेत्र के पहाड़ी जंगल के पास खेल रहे स्थानीय बच्चों की नज़र एक नन्हे तेंदुए पर पड़ी।
शावक को दूर छोड़ की निगरानी
अकेला और असहाय दिखता शावक अपनी मां की तलाश में भटक रहा था। ग्रामीणों ने तुरंत इसकी सूचना वन विभाग को दी। वनमंडलाधिकारी दीपेश कपिल के निर्देश पर टीम मौके पर पहुंची और शावक को अपने संरक्षण में ले लिया। प्राकृतिक नियम के तहत वन विभाग चाहता था कि इंसानी दखल कम से कम हो और मां अपनी गंध व आवाज़ के सहारे बच्चे तक पहुंचे। इसलिए शावक को जंगल के भीतर उसी सुरक्षित स्थान पर छोड़ दिया गया और निगरानी शुरू कर दी गई।
48 घंटे चला रेस्क्यू आपरेशन पूरे इलाके में हाईटेक ट्रैप वाले कैमरे
पहली रात मादा तेंदुआ वहां नहीं पहुंची। चिंता बढ़ी तो वन अमले ने ग्रामीणों के साथ मिलकर आसपास के इलाके में सघन तलाशी अभियान चलाया। इसी दौरान टीम को थोड़ी ही दूरी पर दूसरा शावक भी मिल गया। उप वनमंडलाधिकारी (SDO) योगेश रात्रे के मुताबिक, दोनों शावकों को एक साथ सुरक्षित जगह पर रखा गया और पूरे इलाके में हाई-रिज़ॉल्यूशन वाले ट्रैप कैमरे लगा दिए गए।
ट्रैप कैमरे में कैद हुई मादा तेंदुआ
वन विभाग की टीम दूर बैठकर पल-पल की स्थिति पर नज़र बनाए हुए थी, ताकि कोई अन्य वन्यजीव इन बेजुबानों को नुकसान न पहुंचा सके। सोमवार रात करीब 48 घंटे का लंबा इंतज़ार खत्म हुआ। ट्रैप कैमरे की फुटेज में एक मादा तेंदुआ दबे पांव उस जगह पहुंचती दिखी जहां दोनों शावक रखे गए थे। मां ने अपने बच्चों को सूंघा, उन्हें पुचकारा और कुछ ही देर में दोनों नवजात शावकों को मुंह में दबाकर घने जंगल की गहराइयों में ओझल हो गई।
अपने धैर्य से बचाया बेजुबानों को
वन विभाग का यह प्रयास न केवल वन्यजीव संरक्षण की मिसाल बना है, बल्कि यह भी साबित करता है कि सही तालमेल और धैर्य से बेजुबान परिवारों को बिखरने से बचाया जा सकता है।