पत्र में उन्होंने बस्तर के जमीनी हालात और वहां के आदिवासी युवाओं के योगदान का जिक्र करते हुए लिखा:
अदम्य साहस: बस्तर के युवाओं ने सालों से दुर्गम जंगलों और कठिन परिस्थितियों में नक्सल विरोधी अभियानों में अपनी बहादुरी साबित की है।
रणनीतिक मजबूती: स्थानीय युवाओं की जंगल में इलाके की समझ बेजोड़ है, जो सेना के अभियानों के लिए बेहद कारगर साबित होगी।
सामाजिक बदलाव: सेना में बस्तर रेजिमेंट का गठन केवल सुरक्षा की दृष्टि से ही नहीं, बल्कि क्षेत्र के विकास और सामाजिक स्थिरता के लिए भी एक मील का पत्थर बनेगा।
रक्षा मंत्रालय शुरू की प्रक्रिया
उपमुख्यमंत्री के पत्र का संज्ञान लेते हुए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 9 जुलाई 2026 को अपना जवाब भेजा। उन्होंने स्पष्ट किया कि बस्तर रेजिमेंट बनाने के प्रस्ताव पर रक्षा मंत्रालय ने जांच, परीक्षण और विचार की आधिकारिक प्रक्रिया शुरू कर दी है। रक्षा मंत्रालय की इस सकारात्मक प्रतिक्रिया पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने खुशी जाहिर की है। उन्होंने कहा कि बस्तर रेजिमेंट का गठन सिर्फ एक सुरक्षा बल की स्थापना नहीं, बल्कि बस्तर के युवाओं के भविष्य को बदलने वाला कदम होगा।खुलेंगे रोजगार के नए रास्ते
"राज्य सरकार ने बस्तर के युवाओं के सम्मान और रोजगार के लिए यह मांग रखी थी। रक्षा मंत्रालय का जवाब सकारात्मक है। इससे क्षेत्र के आदिवासी और स्थानीय युवाओं को सेना में भर्ती होने के सीधे अवसर मिलेंगे और बड़े पैमाने पर रोजगार के नए रास्ते खुलेंगे।" — विष्णुदेव साय, मुख्यमंत्री (छत्तीसगढ़)