जातीय समीकरण: आखिर क्यों खास है बीरगांव?
बीजेपी खेमा: टिकट के लिए लंबी फेहरिस्त और कड़ा मुकाबला
भारतीय जनता पार्टी के भीतर महापौर पद के लिए दावेदारों की लंबी सूची ने पार्टी के भीतर हलचल बढ़ा रखी है। फिलहाल अंदरखाने पांच प्रमुख नामों पर सबसे ज्यादा चर्चा हो रही है:
पद्मावती ओमप्रकाश साहू
अंबिका यदु (पूर्व महापौर)
फूलमती सोनवानी
पदमा चंद्राकर
ज्ञानेश्वरी मेझा
इन दिग्गजों के अलावा पार्टी के कई मौजूदा एमआईसी (MIC) सदस्य भी अपनी मजबूत दावेदारी पेश कर रहे हैं। टिकट की आस लगाए बैठे इन नेताओं के समर्थक अभी से अपनी राजनीतिक पकड़ और जीत की संभावनाओं के कसीदे हाईकमान के सामने पढ़ने में जुटे हैं।
कांग्रेस खेमा: गिने-चुने नाम, लेकिन अनुभव भारी
दूसरी तरफ, कांग्रेस पार्टी में फिलहाल मुख्य तौर पर दो ही नाम सबसे आगे चल रहे हैं, लेकिन दोनों ही काफी वजनदार हैं:
लुकेश्वरी लखन साहू
प्रेमलता देवांगन (वर्तमान महापौर की पत्नी)
खास तौर पर प्रेमलता देवांगन का राजनीतिक अनुभव काफी लंबा रहा है। वह पिछले पांच साल जनपद अध्यक्ष और जिला पंचायत सभापति जैसे अहम पदों की जिम्मेदारी संभाल चुकी हैं, जिससे जमीनी स्तर पर उनकी पकड़ मजबूत मानी जा रही है।
सिर्फ जाति नहीं, स्थानीय सियासी ताकत तय करेगी बाजी
भले ही दोनों दल 20,000 साहू मतदाताओं और 50 फीसदी ओबीसी वोट बैंक को साधने के लिए महिला चेहरों पर दांव लगाने की तैयारी में हों, लेकिन राजनीतिक गलियारों में चर्चा इस बात की भी है कि अंतिम मुहर केवल सामाजिक समीकरणों के आधार पर नहीं लगेगी। टिकट वितरण से लेकर जीत के समीकरण तक, हर मोर्चे पर स्थानीय नेतृत्व की क्षमता, चुनावी मैदान में एक्टिवनेस और जनता के बीच छवि ही असली निर्णायक साबित होगी। अब देखना यह दिलचस्प होगा कि दोनों दल किसके सिर पर ताज का सेहरा बांधते हैं।







