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The contest among contenders and the political equation of the Sahu vote bank (Image Source: AI Photo)
The contest among contenders and the political equation of the Sahu vote bank (Image Source: AI Photo)
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Birgaon Municipal Election: रायपुर की सियासी पिच पर फिर गरमाया साहू समाज का मुद्दा, बीजेपी-कांग्रेस की नजरें 20 हजार वोटों पर!

Birgaon Municipal Election: नगर निगम चुनाव में करीब 20 हजार साहू मतदाताओं और 50 फीसदी ओबीसी वोट बैंक पर भाजपा-कांग्रेस की नजर है। महापौर पद के लिए दोनों दलों में महिला दावेदारों के नामों पर मंथन जारी है।

अप्पू धीवर |  कीर्तिमान न्यूज
प्रकाशित: 05 Nov 2026, 09:03 AM · 4 मिनट पढ़ने का समय
रायपुर
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश
Birgaon Municipal Election: विधानसभा चुनावों के दौरान छत्तीसगढ़ की राजनीति में साहू समाज के प्रभाव और उससे जुड़े राजनीतिक समीकरणों ने खूब सुर्खियां बटोरी थीं। अब ठीक वही सुगबुगाहट रायपुर से सटे औद्योगिक और राजनीतिक रूप से संवेदनशील बीरगांव नगर निगम चुनाव में भी साफ सुनाई देने लगी है। महापौर की कुर्सी पर कब्जा जमाने के लिए एक बार फिर भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस दोनों का मुख्य फोकस इसी खास वोट बैंक पर आकर टिक गया है।

जातीय समीकरण: आखिर क्यों खास है बीरगांव? 

आंकड़ों की बात करें तो करीब 65,000 मतदाताओं वाले बीरगांव नगर निगम क्षेत्र में अकेले साहू समाज के वोटरों की संख्या लगभग 20,000 के आसपास आंकी जाती है। इसके अलावा, पूरे इलाके में ओबीसी (अन्य पिछड़ा वर्ग) मतदाताओं की हिस्सेदारी करीब 50 फीसदी है। यही वजह है कि दोनों ही प्रमुख राजनीतिक दल महापौर पद के लिए साहू समाज की महिला चेहरों और दावेदारों पर सबसे ज्यादा माथापच्ची कर रहे हैं। हालांकि, सियासी पंडितों का मानना है कि सिर्फ जातिगत आंकड़ों के भरोसे चुनाव जीतना आसान नहीं होगा। जीत की गारंटी के लिए उम्मीदवार की अपने वार्ड में मजबूत पकड़, अन्य समाजों के बीच स्वीकार्यता, साफ-सुथरी व्यक्तिगत छवि और पार्टी संगठन के साथ तालमेल जैसे फैक्टर भी बेहद अहम भूमिका निभाएंगे।

बीजेपी खेमा: टिकट के लिए लंबी फेहरिस्त और कड़ा मुकाबला

भारतीय जनता पार्टी के भीतर महापौर पद के लिए दावेदारों की लंबी सूची ने पार्टी के भीतर हलचल बढ़ा रखी है। फिलहाल अंदरखाने पांच प्रमुख नामों पर सबसे ज्यादा चर्चा हो रही है:

  • पद्मावती ओमप्रकाश साहू

  • अंबिका यदु (पूर्व महापौर)

  • फूलमती सोनवानी

  • पदमा चंद्राकर

  • ज्ञानेश्वरी मेझा

इन दिग्गजों के अलावा पार्टी के कई मौजूदा एमआईसी (MIC) सदस्य भी अपनी मजबूत दावेदारी पेश कर रहे हैं। टिकट की आस लगाए बैठे इन नेताओं के समर्थक अभी से अपनी राजनीतिक पकड़ और जीत की संभावनाओं के कसीदे हाईकमान के सामने पढ़ने में जुटे हैं।

कांग्रेस खेमा: गिने-चुने नाम, लेकिन अनुभव भारी

दूसरी तरफ, कांग्रेस पार्टी में फिलहाल मुख्य तौर पर दो ही नाम सबसे आगे चल रहे हैं, लेकिन दोनों ही काफी वजनदार हैं:

  • लुकेश्वरी लखन साहू

  • प्रेमलता देवांगन (वर्तमान महापौर की पत्नी)

खास तौर पर प्रेमलता देवांगन का राजनीतिक अनुभव काफी लंबा रहा है। वह पिछले पांच साल जनपद अध्यक्ष और जिला पंचायत सभापति जैसे अहम पदों की जिम्मेदारी संभाल चुकी हैं, जिससे जमीनी स्तर पर उनकी पकड़ मजबूत मानी जा रही है।

सिर्फ जाति नहीं, स्थानीय सियासी ताकत तय करेगी बाजी 

भले ही दोनों दल 20,000 साहू मतदाताओं और 50 फीसदी ओबीसी वोट बैंक को साधने के लिए महिला चेहरों पर दांव लगाने की तैयारी में हों, लेकिन राजनीतिक गलियारों में चर्चा इस बात की भी है कि अंतिम मुहर केवल सामाजिक समीकरणों के आधार पर नहीं लगेगी। टिकट वितरण से लेकर जीत के समीकरण तक, हर मोर्चे पर स्थानीय नेतृत्व की क्षमता, चुनावी मैदान में एक्टिवनेस और जनता के बीच छवि ही असली निर्णायक साबित होगी। अब देखना यह दिलचस्प होगा कि दोनों दल किसके सिर पर ताज का सेहरा बांधते हैं।

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