Cg News: जिंदल स्टील ने छत्तीसगढ़ के रायगढ़ में एक ऐसी उपलब्धि हासिल की है, जिसने देश के इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र में नई मिसाल कायम की है। कंपनी ने वैज्ञानिक संस्थानों के सहयोग से स्टील प्लांट से निकलने वाले वेस्ट प्रोडक्ट स्टील स्लैग का 100 प्रतिशत उपयोग करते हुए 1.85 किलोमीटर लंबी चार लेन सड़क का निर्माण किया है। यह सड़क पूरी तरह से प्रोसेस्ड स्टील स्लैग से तैयार दुनिया की सबसे लंबी सड़क बन गई है और इसे गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में दर्ज किया गया है।
स्टील स्लैग से बनी यह सड़क केवल एक प्रयोग नहीं है, बल्कि इसे मजबूत और लंबे समय तक टिकने वाली तकनीक के आधार पर तैयार किया गया है। इस सड़क की क्षमता इतनी अधिक है कि यह भारी कमर्शियल वाहनों और ट्रकों का भार आसानी से सहन कर सकती है। इससे भविष्य में सड़क निर्माण के क्षेत्र में वैकल्पिक सामग्री के रूप में स्टील स्लैग के उपयोग की संभावनाएं बढ़ गई हैं।
करीब 2 लाख टन स्टील स्लैग का हुआ इस्तेमाल
इस ऐतिहासिक सड़क के निर्माण में लगभग 2,00,000 टन प्रोसेस्ड स्टील स्लैग का इस्तेमाल किया गया है। इस पहल के जरिए उद्योगों से निकलने वाले कचरे को उपयोगी संसाधन में बदलने की सोच को बढ़ावा मिला है। यह परियोजना सरकार के 'वेस्ट टू वेल्थ' (Waste to Wealth) विजन को मजबूती देती है, जिसमें बेकार समझे जाने वाले औद्योगिक अवशेषों का इस्तेमाल देश के विकास कार्यों में किया जा रहा है।निर्माण में कम खर्च और प्राकृतिक संसाधनों की बचत
स्टील स्लैग से सड़क बनाने की तकनीक से आर्थिक और पर्यावरणीय दोनों फायदे हुए हैं। परंपरागत सड़कों की तुलना में यह सड़क करीब 35 प्रतिशत पतली बनाई गई है, जबकि इसके निर्माण में लगभग 40 प्रतिशत तक लागत बचत दर्ज की गई है। इसके अलावा प्राकृतिक पत्थरों की खुदाई और खनन पर निर्भरता कम होगी, जिससे पर्यावरण संरक्षण में भी मदद मिलेगी।
नवीन जिंदल ने बताया पर्यावरण के लिए बड़ा कदम
जिंदल स्टील के चेयरमैन नवीन जिंदल ने इस उपलब्धि को भारत के विकास और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। उन्होंने कहा कि देश की प्रगति के लिए ऐसी तकनीकों को बढ़ावा देना जरूरी है, जो विकास के साथ-साथ प्रकृति का भी ध्यान रखें। उद्योगों से निकलने वाला कचरा भविष्य में देश निर्माण की बड़ी ताकत बन सकता है। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने इस परियोजना को 'वेस्ट टू वेल्थ' की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया।वैज्ञानिक तकनीक से तैयार किया गया रोड मटेरियल
जिंदल स्टील ने CSIR और रोड रिसर्च इंस्टीट्यूट के साथ मिलकर स्टील स्लैग को सड़क निर्माण योग्य सामग्री में बदला। इसके लिए स्लैग पर वैज्ञानिक प्रक्रियाओं जैसे क्रशिंग, मेटल रिकवरी और ग्रेडिंग का इस्तेमाल किया गया। इसके बाद इसे रोड-ग्रेड एग्रीगेट में परिवर्तित कर सड़क की अलग-अलग परतों में लगाया गया। इस सामग्री का उपयोग सड़क के बेस लेयर से लेकर ऊपरी बिटुमेन लेयर तक किया गया। पर्यावरण और गुणवत्ता से जुड़े कई परीक्षणों में सफल होने के बाद ही इसे सड़क निर्माण के लिए मंजूरी मिली।
देशभर में बढ़ेगा स्टील स्लैग तकनीक का इस्तेमाल
जिंदल स्टील ने प्रोसेस्ड स्टील स्लैग को 'स्टील ग्रिट' नाम दिया है। कंपनी का उद्देश्य इस तकनीक को देश के अन्य हिस्सों में सड़क निर्माण के लिए भी इस्तेमाल करना है। इस दिशा में देशभर में इस तकनीक को अपनाने के लिए समझौते भी किए गए हैं, जिससे भविष्य में सड़क निर्माण में पर्यावरण अनुकूल विकल्पों को बढ़ावा मिल सकता है।उन्होंने कहा कि यह प्रोजेक्ट साबित करता है कि भारत अपनी स्वदेशी तकनीक और वैज्ञानिक क्षमता के जरिए बड़ी चुनौतियों का समाधान निकाल सकता है।

