Chhattisgarh Dairy Farmers: आरंग के मैदानी इलाकों में गौपालन करने वाले किसानों और पशुपालकों के सामने आर्थिक संकट गहराता जा रहा है। सरकार की ओर से मिलने वाली सब्सिडी का उचित लाभ न मिल पाने के कारण पशुपालकों के लिए इस व्यवसाय को आगे बढ़ाना मुश्किल हो रहा है। इस गंभीर मुद्दे को उठाते हुए जिला पंचायत सदस्य वतन चन्द्राकर ने शासन-प्रशासन की नीतियों पर सवाल खड़े किए हैं और इसमें तुरंत सुधार करने की मांग की है।
वतन चन्द्राकर का कहना है कि आज चारे की बढ़ती कीमतें, पशुओं के रखरखाव और उनके इलाज का खर्च इतना बढ़ चुका है कि बिना सरकारी मदद के पशुपालक टूट रहे हैं। मैदानी क्षेत्रों के गौपालकों की इस अनदेखी का सीधा असर स्थानीय स्तर पर मिलने वाले शुद्ध दूध की आपूर्ति पर पड़ रहा है।
नकली दूध और पनीर के कारोबार पर गहराया संकट
दूध की घटती आवक और बाजार में बढ़ती मांग के अंतर का फायदा अब असामाजिक तत्व और मिलावटखोर उठा रहे हैं। चन्द्राकर ने इस बात पर गहरा दुख और चिंता व्यक्त की कि बाजार में धड़ल्ले से नकली दूध, मावा (खोवा) और पनीर बेचा जा रहा है। यह न सिर्फ आम लोगों की सेहत के साथ बहुत बड़ा खिलवाड़ है, बल्कि ईमानदारी से काम करने वाले पशुपालकों के पेट पर लात मारने जैसा है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि योजना और अनुदान का वितरण निष्पक्ष होना चाहिए। किसी भी क्षेत्र या इलाके के साथ भेदभाव नहीं होना चाहिए ताकि असली और पात्र गौपालकों को सही समय पर आर्थिक मदद मिल सके।
खाद्य सुरक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल
मिलावटखोरी के इस पूरे खेल पर लगाम लगाने के लिए वतन चन्द्राकर ने खाद्य सुरक्षा विभाग के ढुलमुल रवैये पर भी निशाना साधा। उन्होंने मांग की है कि:
- बाजार में बिक रहे दूध और उससे बने सामानों की नियमित जांच की जाए।
- संदिग्ध दुकानों और ठिकानों से तुरंत सैंपल लेकर लैब में जांच के लिए भेजे जाएं।
- मिलावट साबित होने पर दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए, ताकि दोबारा लोगों की सेहत से खेलने की हिम्मत न करे।
उन्होंने जोर देकर कहा कि अगर हमें स्थानीय स्तर पर दूध का उत्पादन बढ़ाना है, किसानों की कमाई बेहतर करनी है और मिलावटखोरों का सफाया करना है, तो सरकार को एक सख्त और पारदर्शी नीति के तहत काम करना होगा।







