Chhattisgarh Education News: स्कूल में शिक्षकों की कमी से नाराज छात्र-छात्राओं ने किया चक्काजाम
Chhattisgarh Education News: बलरामपुर जिले के हायर सेकेंडरी स्कूल मुरकौल में शिक्षकों की कमी से नाराज छात्रों ने वाड्रफनगर-सनावल मुख्य मार्ग पर करीब ढाई घंटे तक चक्काजाम किया। छात्रों का कहना है कि Chemistry का शिक्षक नहीं होने से पूरे सत्र में पढ़ाई प्रभावित हुई है और तिमाही परीक्षाएं नजदीक हैं। मौके पर पहुंचे शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने DEO से वीडियो कॉल पर छात्रों की बात कराई।
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कीर्तिमान न्यूज
03 Sep 2026, 03:21 PM
बलरामपुर
Chhattisgarh Education News: बलरामपुर जिले से शिक्षा व्यवस्था की बदहाली को उजागर करने वाली एक गंभीर खबर सामने आई है। हायर सेकेंडरी स्कूल मुरकौल में शिक्षकों की कमी से नाराज विद्यार्थियों के सब्र का बांध आखिरकार गुरुवार को टूट गया। जंतर-मंतर से लेकर भोपाल और झारखंड में हाल के दिनों में हुए छात्र आंदोलनों की तर्ज पर, मुरकौल के छात्र-छात्राओं ने भी अपनी मांगों को लेकर सड़क पर मोर्चा खोल दिया। सुबह 10:30 बजे स्कूल की घंटी बजते ही छात्र कक्षाओं में जाने के बजाय सीधे वाड्रफनगर-सनावल मुख्य मार्ग पर जा बैठे और चक्काजाम कर दिया।
छात्रों का DEO पर फूटा गुस्सा
इस अचानक हुए प्रदर्शन के कारण सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और करीब ढाई घंटे तक इस रूट पर आवागमन पूरी तरह ठप रहा। प्रदर्शनकारी छात्रों का सीधा गुस्सा जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) की कार्यशैली पर फूटा। विद्यार्थियों का कहना था कि नया शैक्षणिक सत्र शुरू होने से पहले ही विभाग को शिक्षकों की व्यवस्था कर लेनी चाहिए थी, लेकिन अधिकारियों ने कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई। छात्रों ने आरोप लगाया कि बीते सालों तक 'जिला खनिज संस्थान न्यास' (DMF) मद से अतिथि शिक्षकों की नियुक्ति कर ली जाती थी, जिससे पढ़ाई चलती रहती थी।
छात्रों का चक्काजामडीएमएफ फंड का सामग्री खरीदी में उपयोग
हालांकि, इस बार प्रशासनिक लापरवाही के चलते यह वैकल्पिक व्यवस्था भी बंद कर दी गई। अंदरूनी सूत्रों की मानें तो इस साल डीएमएफ फंड का इस्तेमाल शिक्षकों की व्यवस्था के बजाय केवल सामग्री खरीद पर ज्यादा केंद्रित रहा, जिसका खामियाजा छात्रों को भुगतना पड़ रहा है। छात्रों की सबसे बड़ी चिंता आगामी परीक्षाओं को लेकर है। उन्होंने बताया कि इस पूरे सत्र में रसायन विज्ञान (Chemistry) का एक भी शिक्षक स्कूल में पदस्थ नहीं है, जिससे आज तक इस विषय का एक भी अध्याय नहीं पढ़ाया जा सका है। स्थिति यह है कि हिंदी और संस्कृत जैसे अनिवार्य विषयों के लिए भी कोई विशेषज्ञ शिक्षक नहीं हैं, दूसरे विषयों के शिक्षक किसी तरह इन्हें पढ़ा रहे हैं।
छात्रों को सड़क पर उतरना मजबूरी
इसी महीने से तिमाही परीक्षाएं आयोजित होनी हैं। ऐसे में बिना पढ़ाई के परीक्षा देने को मजबूर छात्रों के पास सड़क पर उतरने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा था। सड़क जाम की सूचना मिलते ही वाड्रफनगर से विकासखंड शिक्षा कार्यालय के कर्मचारी और आसपास के संकुल समन्वयक आनन-फानन में मौके पर पहुंचे। उन्होंने छात्रों को समझाने की काफी कोशिश की, लेकिन उग्र विद्यार्थी अपनी जिद पर अड़े रहे। उनकी साफ मांग थी कि जब तक रसायन शास्त्र के शिक्षक की तुरंत तैनाती नहीं होती, वे आंदोलन खत्म नहीं करेंगे।
15 दिनों में की जाएगी शिक्षकों की व्यवस्था
मामले की गंभीरता को देखते हुए अधिकारियों ने मौके से ही जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) एम.आर. यादव से छात्रों की वीडियो कॉल के जरिए सीधी बात कराई। बातचीत के दौरान छात्रों ने न केवल शिक्षकों की किल्लत बल्कि स्कूल में बुनियादी सुविधाओं के अभाव का मुद्दा भी उठाया। डीईओ ने विद्यार्थियों को आश्वस्त किया कि अगले 15 दिनों के भीतर स्कूल में पर्याप्त शिक्षकों की व्यवस्था कर दी जाएगी।
शिक्षकों की कमी का दिया था ब्योरा
इस ठोस आश्वासन के बाद दोपहर करीब 1:00 बजे छात्रों ने प्रदर्शन समाप्त किया और वापस स्कूल परिसर में लौटे। घटनाक्रम के दौरान प्रशासनिक बदहाली भी साफ नजर आई। विद्यालय के प्राचार्य ने स्पष्ट किया कि उन्होंने सत्र शुरू होने से पहले ही उच्च अधिकारियों को शिक्षकों की कमी का लिखित ब्योरा भेज दिया था। वहीं, ब्लॉक शिक्षा अधिकारी (BEO) के रायपुर में प्रशिक्षण पर होने के कारण बीईओ कार्यालय के निचले कर्मचारियों को मौके पर जाकर स्थिति संभालनी पड़ी।