Chhattisgarh High Court: सेवानिवृत्ति के मुहाने पर खड़े आबकारी विभाग के एक हेड कांस्टेबल को बड़ी राहत दी है। अदालत ने राज्य सरकार के तर्कों को खारिज करते हुए कर्मचारी को उसके गृह जिले बिलासपुर में पदस्थ करने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने माना कि सेवा अवधि के अंतिम दौर में कर्मचारियों को उनके गृह जिले में तैनाती का लाभ मिलना ही चाहिए। यह फैसला जस्टिस बिभु दत्ता गुरु की एकल पीठ ने आबकारी हेड कांस्टेबल नेल्सन लवेट की याचिका पर सुनवाई करते हुए सुनाया। मामले की पृष्ठभूमि के अनुसार, नेल्सन लवेट की नियुक्ति 19 अप्रैल 1993 को आबकारी विभाग में अस्थायी सेल्समैन के तौर पर हुई थी। बाद में उन्हें कांस्टेबल के पद पर नियमित कर कोरबा भेजा गया।
33 साल की सेवा और तबादलों का सिलसिला
2014: कोरबा से ट्रांसफर कर बिलासपुर भेजा गया।
24 जून 2022: बिलासपुर से रायगढ़ स्थानांतरित कर दिया गया, तब से वे वहीं कार्यरत हैं।
11 अगस्त 2023: रायगढ़ में ही रहते हुए उन्हें हेड कांस्टेबल पद पर पदोन्नति मिली।
अधिकारियों के चक्कर काटते बीता समय
याचिकाकर्ता ने अदालत को बताया कि उनकी पत्नी लंबे समय से गंभीर रूप से बीमार हैं और उन्हें लगातार देखभाल की जरूरत है। इसी आधार पर उन्होंने 23 अगस्त 2022 को पहली बार ट्रांसफर के लिए आवेदन दिया था। इसके बाद गृह जिले में वापसी के लिए उन्होंने 3 जुलाई 2024, 22 सितंबर 2025 और 4 अक्टूबर 2025 को लगातार अभ्यावेदन दिए। जब कोई सुनवाई नहीं हुई, तो उन्होंने वर्ष 2025 में हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। कोर्ट ने 20 नवंबर 2025 को अधिकारियों को नियमानुसार निर्णय लेने के निर्देश दिए थे। इसके बाद भी लवेट ने 27 जनवरी 2026, 21 मई 2026 और 9 जुलाई 2026 को फिर से आवेदन सौंपे, लेकिन प्रशासनिक स्तर पर मामला अटका रहा।
मनपसंद जगह पर पदस्थापना पाना मौलिक अधिकार
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से तर्क दिया गया कि 5 जून 2025 की स्थानांतरण नीति आबकारी, पुलिस, परिवहन, वाणिज्यिक कर और शिक्षा जैसे विभागों पर लागू नहीं होती। इसलिए नीति की कंडिका 3.12 के तहत गृह जिले में पदस्थापना का दावा कानूनी रूप से सही नहीं है। सरकार का यह भी कहना था कि मनपसंद जगह पर पदस्थापना पाना कर्मचारी का मौलिक अधिकार नहीं है और यह पूरी तरह से प्रशासनिक निर्णय का मामला है। हाई कोर्ट ने राज्य सरकार की इन दलीलों को खारिज कर दिया।याचिकाकर्ता को तत्काल बिलासपर में किया पदस्थ
अदालत ने टिप्पणी की कि याचिकाकर्ता जुलाई 2027 में अपनी अधिवार्षिकी आयु (रिटायरमेंट) पूरी कर रहा है। न्यायाधीश ने साफ किया कि प्रशासनिक परंपरा और पूर्व के मामलों में विभिन्न विभागों के ऐसे कर्मचारियों को राहत दी जाती रही है, जो रिटायरमेंट के एक साल के दायरे में आ चुके हैं। जब अन्य कर्मचारियों को गृह जिले या मनपसंद स्थान का लाभ दिया गया है, तो याचिकाकर्ता को इससे वंचित नहीं किया जा सकता। अदालत ने प्रशासन को निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता को तत्काल बिलासपुर में पदस्थ किया जाए।
