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Meeting regarding preparations for hosting the games (Image Source: Keertiman Media)
Meeting regarding preparations for hosting the games (Image Source: Keertiman Media)
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Chhattisgarh National Games: राजधानी से लेकर बस्तर के जंगलों तक बिखरेगा खेलों का रोमांच, 40वें नेशनल गेम्स की दांवदारी में छत्तीसगढ़

Chhattisgarh National Games: सरकार ने 40वें राष्ट्रीय खेलों की मेजबानी हासिल करने के लिए तैयारी तेज कर दी है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि इस बार प्रदेश इस अवसर को गंवाना नहीं चाहता। रायपुर में हुई छत्तीसगढ़ ओलिंपिक संघ की बैठक में मेजबानी के लिए रणनीति तैयार की गई।

कीर्तिमान न्यूज
13 Sep 2026, 09:31 AM
रायपुर
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश
Chhattisgarh National Games: साय सरकार ने खेल जगत में एक बड़ा दांव खेला है। राज्य अब 40वें राष्ट्रीय खेलों की मेजबानी हासिल करने की पुरजोर कोशिश में जुट गया है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने साफ़ कर दिया है कि इस बार इस मौके को हाथ से नहीं जाने दिया जाएगा और इसके लिए सरकार अपनी पूरी ताकत झोंक देगी। शनिवार को रायपुर में छत्तीसगढ़ ओलिंपिक संघ की हुई हाई-लेवल मीटिंग में तैयारियों का खाका खींचा गया। 

आदिवासी युवाओं को मिलेगा मंच 

अगर छत्तीसगढ़ को यह ज़िम्मेदारी मिलती है, तो यह आयोजन सिर्फ़ रायपुर की चकाचौंध तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसका रोमांच बस्तर के जंगलों और सुदूर इलाकों तक पहुँचेगा। बैठक में मुख्यमंत्री ने एक बड़ा संदेश दिया—खेल सिर्फ़ महानगरों की बपौती नहीं हैं। उनकी योजना बस्तर जैसे संभागों में भी राष्ट्रीय स्तर की स्पर्धाएं कराने की है। इससे न केवल स्थानीय आदिवासियों और युवाओं को अपनी प्रतिभा दिखाने का सीधा मंच मिलेगा, बल्कि बस्तर की छवि भी एक नई रोशनी में देश के सामने आएगी। 

हुनर में नहीं कोई कमी 

सीएम ने कहा, "हमारे गांवों और वनांचलों में हुनर की कोई कमी नहीं है। ज़रूरत सिर्फ़ इतनी है कि उन्हें सही वक़्त पर तराशा जाए और आधुनिक सुविधाएं दी जाएं।" उन्होंने साफ़ किया कि बजट या संसाधनों की वजह से किसी भी खिलाड़ी का सपना टूटने नहीं दिया जाएगा। छत्तीसगढ़ के लिए यह सिर्फ़ एक आयोजन नहीं, बल्कि पुरानी कसक को मिटाने का मौका है। 

पुरानी भूल से सबक लेते हुए इस बार कोई कसर नहीं 

साल 2010 में भी भारतीय ओलंपिक संघ ने प्रदेश को 37वें राष्ट्रीय खेलों का ज़िम्मा सौंपा था। लेकिन ऐन मौके पर आधारभूत ढाँचा और तैयारियां पूरी न होने की वजह से यह बड़ा मौका हाथ से निकल गया था और बाद में मेजबानी गुजरात की झोली में चली गई थी। इसी पुरानी भूल से सबक लेते हुए, इस बार सरकार कोई कसर नहीं छोड़ना चाहती।

कॉर्पोरेट फंडिंग और स्पेशल अफसर: तैयारियों को ऐसे मिलेगी रफ़्तार

मेजबानी का दावा मज़बूत करने के लिए सरकार ने रणनीतिक कदम उठाए हैं:

  • सचिवालय का सीधा दखल: ओलिंपिक संघ और शासन के बीच तालमेल में कोई ढील न रहे, इसके लिए मुख्यमंत्री सचिवालय के एक सीनियर अफ़सर को खास नोडल अधिकारी नियुक्त किया जाएगा।

  • CSR फंड से मिलेगा बूस्ट: प्रदेश के खेल संघों को बड़े औद्योगिक समूहों के साथ जोड़ा जा रहा है, ताकि कंपनियों के CSR (कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी) फंड का इस्तेमाल अत्याधुनिक सुविधाएं जुटाने में हो सके।

  • बस्तर-सरगुजा ओलिंपिक हर साल: सुदूर इलाकों से प्रतिभाएं खोजने के लिए 'बस्तर ओलिंपिक' को अब सालाना इवेंट बनाया गया है। साथ ही 'खेल उत्कर्ष मिशन' के तहत ज़मीनी स्तर पर स्काउटिंग चालू है।

60 करोड़ की तीरंदाजी अकादमी और आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर

प्रदेश में खेल सुविधाओं का ढाँचा तेज़ी से बदला जा रहा है। सरकार के नए प्रोजेक्ट्स पर एक नज़र:

  • रायपुर: यहाँ लगभग 60 करोड़ रुपये की लागत से एक वर्ल्ड-क्लास आर्चरी (तीरंदाजी) अकादमी तैयार हो रही है।

  • जशपुर (पंडरापाठ): पहाड़ी कोरवा समुदाय की पारंपरिक तीरंदाजी कला को निखारने के लिए 20 से 25 करोड़ रुपये का नया आर्चरी सेंटर बनाया जा रहा है।

  • नए स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स: रायगढ़, रायपुर और कुनकुरी में आधुनिक खेल परिसरों का निर्माण तेज़ी पर है।

राष्ट्रीय खेलों के नक्शे पर मिलता है कितना बढ़ा मुकाम

खिलाड़ियों का हौसला बढ़ाने के लिए राज्य सरकार ने 'खेल अलंकरण समारोह' को भी दोबारा शुरू करने का फैसला किया है, जिसमें उम्दा प्रदर्शन करने वाले एथलीटों को नकद पुरस्कार और सम्मान दिया जाएगा। शनिवार की इस अहम बैठक में वन मंत्री केदार कश्यप, दुर्ग सांसद विजय बघेल और छत्तीसगढ़ ओलिंपिक संघ के महासचिव डॉ. विक्रम सिसोदिया समेत खेल जगत की कई प्रमुख हस्तियां मौजूद रहीं। अब देखना यह होगा कि सरकार की यह आक्रामक रणनीति छत्तीसगढ़ को राष्ट्रीय खेलों के नक्शे पर कितना बड़ा मुकाम दिलाती है।
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