छत्तीसगढ़ के करीब 1.60 लाख शिक्षक (एलबी) संवर्ग के शिक्षकों को राज्य सरकार के नए आदेश से बड़ा झटका लगा है। स्कूल शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि पेंशन और अन्य सेवा लाभों की गणना केवल 1 जुलाई 2018 से की जाएगी। शिक्षाकर्मी के रूप में पहली नियुक्ति से पहले की सेवा अवधि को शासकीय सेवा में शामिल नहीं किया जाएगा।
सरकार का कहना है कि 2018 से पहले शिक्षक पंचायत और नगरीय निकायों के कर्मचारी थे, इसलिए उस अवधि को नियमित शासकीय सेवा में नहीं जोड़ा जा सकता। इससे पहली नियुक्ति से सेवा अवधि जोड़ने की मांग कर रहे शिक्षकों में निराशा है।
पुराने शिक्षकों में नाराजगी
कई शिक्षकों का कहना है कि उन्होंने वर्षों तक शिक्षा विभाग में सेवाएं दी हैं, लेकिन उनकी शुरुआती सेवा अवधि को मान्यता नहीं मिल रही है। वर्ष 2010 में नियुक्त हुए कई शिक्षक करीब 16 साल की सेवा पूरी करने के बाद भी पदोन्नति और पुरानी पेंशन योजना के लाभ से वंचित हैं।
पदोन्नति नियम बदलने की मांग
शिक्षक संगठनों ने पदोन्नति के लिए टीईटी और बीएड की अनिवार्यता खत्म करने की मांग की है। उनका कहना है कि पहले इन योग्यताओं की अनिवार्यता नहीं थी, इसलिए पुराने नियमों के आधार पर पदोन्नति का अवसर दिया जाना चाहिए।
हाई कोर्ट के निर्देश के बाद फैसला
23 जनवरी 2026 को छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने सरकार को संवैधानिक और मानवीय पहलुओं पर विचार करने कहा था। इसके बाद सरकार ने शिक्षकों की सेवा अवधि और पेंशन संबंधी मांग को स्वीकार नहीं किया।
शिक्षक संगठनों ने जताई नाराजगी
फैसले के बाद शिक्षक संगठनों में असंतोष बढ़ गया है। शिक्षकों का कहना है कि वर्षों की सेवा के बावजूद लाभ नहीं मिलने से उनका मनोबल प्रभावित हो रहा है। उन्होंने सरकार से नियमों की समीक्षा कर एलबी संवर्ग के हित में निर्णय लेने की मांग की है।