Chhattisgarh Weather: बेमौसम बारिश और चक्रवाती असर का कहर, धान की पकी फसल पर संकट, किसानों की बढ़ी मुश्किलें
Chhattisgarh Weather: छत्तीसगढ़ में बेमौसम बारिश और तेज हवाओं से धान की फसल प्रभावित हुई है। किसानों को नुकसान की चिंता है। 31 अक्टूबर से मौसम में सुधार के आसार हैं।
प्रकाशित: 30 Oct 2026, 08:25 AM· 4 मिनट पढ़ने का समय
रायपुर
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश
Chhattisgarh Weather: मौसम का मिजाज अचानक पूरी तरह बदल गया है। चक्रवाती प्रभाव के चलते पिछले कुछ दिनों से राज्य के कई जिलों में झमाझम बारिश और तेज हवाओं का दौर जारी है। सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि यह बेमौसम बरसात ठीक उस वक्त आई है जब प्रदेशभर में किसानों की धान की फसल पककर पूरी तरह तैयार हो चुकी है और कटाई का काम शुरू होने ही वाला था। खेतों में लहलहाती सुनहरी फसल पर पानी फिरने से अन्नदाताओं के माथे पर चिंता की लकीरें गहरी हो गई हैं।
धान की फसल को कितना नुकसान? (सरकारी और मैदानी आंकड़े)
कृषि विभाग और शासन के शुरुआती आंकड़ों के अनुसार, छत्तीसगढ़ में इस खरीफ सीजन के दौरान लगभग 36 से 40 लाख हेक्टेयर (करीब 90 लाख से 1 करोड़ एकड़) क्षेत्र में धान की बंपर फसल बोई गई थी। कई जिलों में लगभग 40 से 43 प्रतिशत रकबे में धान पूरी तरह पक चुका है और किसान बेहतरीन पैदावार की उम्मीद लगाए बैठे थे।
लेकिन इस बेमौसम आफत ने भारी फेरबदल कर दिया है:
खेतों में बिछी फसल:बालोद (गुंडरदेही-अर्जुन्दा क्षेत्र), कोरबा, रायगढ़ (पुसौर) और गरियाबंद समेत कई इलाकों में तेज हवाओं के साथ हुई बारिश से खड़ी धान की फसल खेतों में ही बिछ गई (गिर गई) है।
कटी हुई फसल पर मार:बलरामपुर और उत्तर छत्तीसगढ़ के कई हिस्सों में जो धान किसान काटकर खेतों में छोड़ चुके थे, वह लगातार भीगने से काली पड़ने लगी है।
दाने झड़ने और नमी का खतरा:लगातार पानी गिरने और जलभराव के कारण धान की बालियों से दाने झड़ने लगे हैं।यदि नमी ज्यादा रही तो दानों में अंकुरण (जर्मिनेशन) होने का भी खतरा मंडरा रहा है, जिससे मंडियों में धान की सही कीमत मिलने पर असर पड़ेगा।
राजस्व विभाग और शासन ने स्पष्ट किया है कि मौसम पूरी तरह सामान्य और साफ होने के तुरंत बाद मैदानी स्तर पर फसल नुकसान का विस्तृत सर्वे कराया जाएगा, ताकि प्रभावित किसानों को नियमानुसार उचित मुआवजा और बीमा क्लेम का लाभ मिल सके।
बारिश से गिरी धान की फसल आज दिनभर कैसा रहेगा मौसम?
आज यानी 30 अक्टूबर को राज्य के अधिकांश जिलों में बादलों का डेरा रहेगा। मौसम विभाग (IMD) के पूर्वानुमान के मुताबिक, रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग, बस्तर और सरगुजा संभाग के कुछ चुनिंदा इलाकों में हल्की से मध्यम बारिश या गरज-चमक के साथ बौछारें पड़ने की संभावना बनी हुई है। लगातार धूप न निकलने के कारण तापमान में भी गिरावट दर्ज की गई है, जिससे हल्की ठंडक महसूस हो रही है। हवा की गति सामान्य से तेज रहने के कारण किसानों को अभी खुले में फसल न सुखाने की सलाह दी गई है।
कल 31 अक्टूबर को कैसा रहेगा मौसम?
आगामी 31 अक्टूबर को मौसम में धीरे-धीरे सुधार होने के संकेत मिल रहे हैं। हालांकि कुछेक उत्तरी और मैदानी इलाकों में आंशिक रूप से बादल छाए रह सकते हैं, लेकिन भारी बारिश का दौर थमने की उम्मीद है। जैसे-जैसे चक्रवाती असर कमजोर होगा, आसमान साफ होना शुरू होगा और धूप खिलने की संभावना है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि 31 अक्टूबर के बाद प्रदेश में मौसम साफ होने पर तापमान में हल्का बदलाव आ सकता है और किसान राहत की सांस लेते हुए अपने खेतों का जायजा ले सकेंगे।
कृषि विभाग की किसानों के लिए खास सलाह:
कटाई रोकें:यदि धान अभी पूरी तरह नहीं कटा है और नमी ज्यादा है, तो अगले 2 से 4 दिनों तक कटाई टालना ही समझदारी होगी।
जल निकासी:जिन खेतों में पानी भर गया है, वहां से तुरंत पानी बाहर निकालने की व्यवस्था करें ताकि पौधे और अधिक न सड़ें।
सुरक्षित भंडारण:जो फसल पहले ही कट चुकी है, उसे खुले में न छोड़कर तिरपाल या पक्के शेड के नीचे सुरक्षित स्थान पर रखें।