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राष्ट्रपति भवन में गूंजी आदिवासी संस्कृति
राष्ट्रपति भवन में गूंजी आदिवासी संस्कृति
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राष्ट्रीय मंच पर छाया छत्तीसगढ़ का मांदरी नृत्य, धमतरी के कलाकारों की शानदार प्रस्तुति

स्वतंत्रता दिवस पर राष्ट्रपति भवन के सेंट्रल हॉल में धमतरी जिले के सरईटोला के जय गढ़िया बाबा आदिवासी लोक मांदरी नृत्य दल ने पारंपरिक मांदरी नृत्य की शानदार प्रस्तुति दी। कलाकारों ने मांदर की थाप, पारंपरिक वेशभूषा और जनजातीय संस्कृति के माध्यम से छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोककला को राष्ट्रीय मंच पर पहचान दिलाई।

कीर्तिमान रिपोर्ट धनेश्वरी साहू
19 Aug 2026, 09:49 AM
रायपुर
छत्तीसगढ़ की सोंधी माटी की महक और उसकी समृद्ध आदिवासी संस्कृति की गूंज इस स्वतंत्रता दिवस पर देश की राजधानी के सबसे गरिमामयी मंच तक जा पहुंची। अवसर था 15 अगस्त का और गवाह बना राष्ट्रपति भवन का प्रतिष्ठित सेंट्रल हॉल, जहां धमतरी जिले के नगरी विकासखंड के सुदूर गांव सरईटोला (गुडरापार) के कलाकारों ने अपनी मांदरी नृत्य की ऊर्जावान प्रस्तुति से समां बांध दिया। ‘जय गढ़िया बाबा आदिवासी लोक मांदरी नृत्य दल’ के इस प्रदर्शन ने न केवल राष्ट्रपति भवन में मौजूद गणमान्य अतिथियों का दिल जीता, बल्कि संपूर्ण छत्तीसगढ़ की लोककला का परचम राष्ट्रीय पटल पर लहरा दिया।
धमतरी के कलाकारों की शानदार प्रस्तुति

​जब सेंट्रल हॉल में जीवंत हुई जनजातीय परंपरा

पारंपरिक वेशभूषा, रंग-बिरंगे आभूषणों और गुट्टा मांदर की थाप के साथ जब सरईटोला के कलाकारों ने मंच संभाला, तो पूरा वातावरण छत्तीसगढ़ी लोक-आत्मा के रंगों में सराबोर हो गया। फसल कटाई के उल्लास, सामाजिक सरोकारों और पीढ़ियों से संजोई जनजातीय जीवन शैली को दर्शाती इस प्रस्तुति ने हर किसी को मंत्रमुग्ध कर दिया। यह नृत्य केवल एक कलात्मक प्रस्तुति नहीं, बल्कि लोक-स्मृतियों और सामुदायिक पहचान का जीवंत प्रदर्शन बन गया।

​नागपुर सांस्कृतिक केंद्र से मिला राष्ट्रीय मुकाम

दल के सचिव रूपराय नेताम ने इस ऐतिहासिक पल को साझा करते हुए बताया कि दक्षिण मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र (नागपुर) द्वारा दल की मौलिकता और कला-साधना को परखते हुए स्वतंत्रता दिवस के इस विशेष कार्यक्रम के लिए चयन किया गया था। ​राष्ट्रीय मंच पर राज्य की संस्कृति का प्रतिनिधित्व करने वाले प्रमुख कलाकारों में रतन लाल निषाद एवं सुरेंद्र सोरी, हेमंत सोरी,​कु. सुलोचना सोरी एवं कु. मधु नेताम शामिल रहे।

धमतरी की माटी का बढ़ा मान: कलेक्टर

कलाकारों की इस अप्रतिम सफलता पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए धमतरी कलेक्टर मिश्रा ने पूरे दल और समिति को बधाई दी। उन्होंने कहा कि धमतरी की पहचान सिर्फ उसकी प्राकृतिक सुंदरता और कृषि समृद्धि तक सीमित नहीं है, बल्कि यहां की जनजातीय परंपराएं और लोकसंगीत हमारी वास्तविक धरोहर हैं। सरईटोला के कलाकारों ने राष्ट्रपति भवन में प्रस्तुति देकर जिले को गौरवान्वित किया है। यह उपलब्धि हमारी युवा पीढ़ी को अपनी जड़ों से जुड़ने और लोककला को आगे बढ़ाने की सशक्त प्रेरणा देगी।

माटी की कला को मिला नया आयाम

​ग्रामीण अंचल की पगडंडियों से निकलकर देश के सर्वोच्च संवैधानिक संस्थान के मंच तक पहुंची यह सांस्कृतिक यात्रा इस बात की साक्षी है कि लोककला की मौलिकता आज भी अमर है। मांदर की यह राष्ट्रीय गूंज यह संदेश दे गई कि जब गांव की सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय सम्मान मिलता है, तो वह केवल कलाकारों का नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश का मस्तक गर्व से ऊंचा कर देती है।
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