मुख्यमंत्री हेल्पलाइन में शिकायत के बाद भी कार्रवाई नहीं होने का आरोप, किशनपुर सचिव पर उठे सवाल
पिथौरा क्षेत्र में पंचायत सचिव पर कथित कमीशन मांगने के आरोपों को लेकर शिकायत के बाद भी कार्रवाई नहीं होने का मामला सामने आया है। शिकायतकर्ताओं ने मुख्यमंत्री हेल्पलाइन में दर्ज शिकायत, पंचायत कार्यों की जांच और एफआईआर दर्ज करने की मांग की है।
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कीर्तिमान न्यूज
06 Aug 2026, 06:53 PM
पिथौरा
महासमुंद जिले के पिथौरा क्षेत्र में मुख्यमंत्री हेल्पलाइन में दर्ज शिकायतों के बाद भी कार्रवाई नहीं होने का आरोप लगाया गया है। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि किशनपुर ग्राम पंचायत के सचिव श्यामसुंदर नायक पर मजदूरी और सामग्री भुगतान के एवज में कथित रूप से 7 प्रतिशत कमीशन मांगने के मामले में शिकायत की गई थी, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।
शिकायतकर्ताओं के अनुसार, इस मामले में कारपेंटर भोजराम साहू, मजदूर गजानंद निषाद, सिन्हा हार्डवेयर संचालक विनोद सिन्हा और सिन्हा इंटरप्राइजेस के संचालक अमित सिन्हा ने मुख्यमंत्री हेल्पलाइन में शिकायत दर्ज कर कार्रवाई की मांग की थी। साथ ही उनका आरोप है कि भुगतान के लिए कमीशन मांगा गया था।
वीडियो वायरल होने के बाद भी कार्रवाई नहीं होने का आरोप
शिकायतकर्ताओं ने बताया कि सचिव से जुड़े कथित कमीशन मांगने के वीडियो वायरल होने के बाद भी अब तक विभागीय कार्रवाई नहीं की गई है। उन्होंने अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है। ग्रामीणों का आरोप है कि सचिव को एक ग्राम पंचायत के साथ-साथ दूसरी पंचायत का भी प्रभार दिया गया है। वहीं, अठारहगुड़ी पंचायत में भी उनके कार्यकाल के दौरान हुए कार्यों की जांच और भौतिक सत्यापन कराने की मांग की गई है।
दो पंचायतों का प्रभार और पुराने कार्यों की जांच की मांग
शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि सचिव को एक से अधिक ग्राम पंचायतों का प्रभार दिया गया है। उन्होंने ग्राम पंचायत अठारहगुड़ी सहित उनके कार्यकाल में हुए सभी निर्माण और विकास कार्यों का भौतिक सत्यापन कराने की मांग की है। शिकायतकर्ताओं का दावा है कि जांच होने पर कई अनियमितताएं सामने आ सकती हैं। हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
जांच प्रभावित करने का भी आरोप
शिकायतकर्ताओं ने यह भी आरोप लगाया कि जांच प्रक्रिया को प्रभावित करने के लिए कुछ लोगों के माध्यम से दबाव बनाने की कोशिश की गई। उन्होंने आरोप लगाया कि एक आदिवासी महिला सरपंच और उनके पति के साथ जातिसूचक गाली-गलौज, मारपीट और जान से मारने की धमकी दी गई। इस मामले में पुलिस अधीक्षक महासमुंद के निर्देश और संबंधित पक्षों के बयान के बाद भी एफआईआर दर्ज नहीं होने का आरोप लगाया गया है। शिकायतकर्ताओं ने पुलिस प्रशासन से मामले में जल्द कार्रवाई की मांग की है।
पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई पर नजर
अब इस पूरे मामले में प्रशासनिक जांच और पुलिस कार्रवाई को लेकर सवाल उठ रहे हैं। शिकायतकर्ताओं ने मांग की है कि भ्रष्टाचार से जुड़े आरोपों की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की जाए और पंचायतों में हुए कार्यों का रिकॉर्ड खंगाला जाए। वहीं, मामले में संबंधित सचिव और विभागीय अधिकारियों का पक्ष सामने नहीं आ सका है। उनका पक्ष मिलने के बाद खबर को अपडेट किया जाएगा।