Stone Mine Accident: हाईटेंशन लाइन की चपेट में आने से मजदूर की रीढ़ की हड्डी टूटी, ठेकेदार और मकान मालिकों पर FIR दर्ज
Stone Mine Accident: ग्राम मुढ़ेना स्थित पत्थर खदान में निर्माण कार्य के दौरान हाईटेंशन बिजली लाइन की चपेट में आने से एक राजमिस्त्री गंभीर रूप से घायल हो गया। हादसे में उसकी रीढ़ की हड्डी में चोट आई, जिससे कमर के नीचे का हिस्सा सुन्न हो गया है। पीड़ित परिवार ने ठेकेदार और खदान मालिकों पर सुरक्षा इंतजामों की अनदेखी का आरोप लगाया है। करीब 35 लाख रुपये खर्च होने के बाद भी आर्थिक मदद नहीं मिलने की शिकायत पर सिटी कोतवाली पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
Stone Mine Accident: जिले के ग्राम मुढ़ेना स्थित एक पत्थर खदान में कार्यालय निर्माण के दौरान सुरक्षा मानकों की अनदेखी और
लापरवाही का एक गंभीर मामला सामने आया है। निर्माणाधीन इमारत के ऊपर से गुजर रही हाईटेंशन तार की चपेट में आने से एक राजमिस्त्री बुरी तरह झुलस गया। इस हादसे में मजदूर के सिर में गंभीर चोट आई है और रीढ़ की हड्डी (स्पाइनल इंजरी) क्षतिग्रस्त होने से उसके कमर के नीचे का हिस्सा पूरी तरह सुन्न हो गया है। पीड़िता की शिकायत पर पुलिस ने मामले को संज्ञान में लेते हुए धारा 125(a) BNS के तहत अपराध दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
सुरक्षा मांगने पर भी बंद नहीं कराई गई बिजली सप्लाई
प्राप्त जानकारी के अनुसार, ग्राम बेलसोंडा वार्ड नंबर 18 (रामसत्ता चौक, टेढ़ीपारा) की रहने वाली दिनेश्वरी साहू ने सिटी कोतवाली महासमुंद में आवेदन सौंपकर न्याय की गुहार लगाई है। दिनेश्वरी साहू खुद कक्षा 10वीं तक पढ़ी-लिखी हैं और रोजी-मजदूरी कर परिवार का भरण-पोषण करती हैं।
शिकायत के मुताबिक, बीते 30 जनवरी 2026 की सुबह लगभग 11 बजे, दिनेश्वरी अपने पति खेमराज साहू और अन्य 15-20 मजदूरों के साथ मुढ़ेना गांव में अजय ठाकुर और हेमंत साहू के पत्थर खदान परिसर में निर्माणाधीन कार्यालय के झज्जा ढलाई का काम कर रही थी।
मजदूर ठेकेदार जगदीश धीवर के अंडर काम कर रहे थे। निर्माण स्थल के ठीक ऊपर से हाईटेंशन बिजली की लाइन गुजर रही थी। काम शुरू करने से पहले ही मजदूरों ने ठेकेदार और मकान मालिकों से सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराने तथा बिजली विभाग से संपर्क कर लाइन बंद करवाने की मांग की थी। हालांकि, ठेकेदार और मालिकों ने सुरक्षा के बुनियादी इंतजाम नहीं किए और न ही बिजली बंद कराई, जिससे यह बड़ा हादसा घटित हो गया।
इलाज में फूटे 35 लाख रुपये, मालिक मुकरे सहायता से
करंट की चपेट में आने के बाद खेमराज साहू बिस्तर पर लाचार पड़े हैं और शरीर के अंगों का संचालन करने में पूरी तरह असमर्थ हैं। पीड़िता ने बताया कि लगभग 9 महीनों तक चले लंबे अस्पताल के इलाज में करीब 35 लाख रुपये खर्च हो चुके हैं। गंभीर स्थिति यह है कि इतने बड़े हादसे और भारी-भरकम इलाज के खर्चे के बावजूद न तो ठेकेदार और न ही खदान मालिकों ने पीड़ित परिवार को कोई आर्थिक मदद या मुआवजा दिया है। कमाऊ सदस्य के असहाय हो जाने और भारी कर्ज के बोझ तले दबे होने के कारण परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।
पुलिस ने दर्ज किया मामला
लापरवाही और बिना सुरक्षा उपायों के जोखिम भरे माहौल में काम कराने के चलते पुलिस ने शिकायत के आधार पर संबंधित पक्षों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। सिटी कोतवाली पुलिस पूरे घटनाक्रम की विवेचना कर रही है।