हमारे संस्कार समाज सेवा के हैं"
मीडिया से बातचीत करते हुए मुख्यमंत्री थोड़े भावुक भी नजर आए, लेकिन उन्होंने इसे शहर के प्रति अपना कर्तव्य बताया। उन्होंने कहा:
"जब हमने अपनी आँखें भी नहीं खोली थीं, तब यह घर बना था। जाहिर है, हर किसी का अपने घर से एक गहरा भावनात्मक लगाव होता है। लेकिन हमारे संस्कार हमें सिखाते हैं कि समाज और जनहित के काम हमेशा व्यक्तिगत स्वार्थ से ऊपर होने चाहिए।"
डॉ. यादव ने आगे कहा कि 1982 में जब वे पहली बार छात्रसंघ अध्यक्ष बने और बाद में विधायक चुने गए, तब वे इसी घर में रहते थे। इसके बावजूद उन्होंने स्पष्ट किया कि सड़क चौड़ीकरण की जद में आए अपने मकान का वे सरकार से कोई मुआवजा नहीं लेंगे।
8 लाख की आबादी, लेकिन स्वागत करेंगे 30-40 करोड़ का
मुख्यमंत्री ने उज्जैन के नागरिकों के जज्बे की खुलकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि उज्जैन की स्थाई आबादी भले ही करीब 8 लाख है, लेकिन सिंहस्थ के दौरान यहाँ लगभग 30 से 40 करोड़ श्रद्धालुओं के आने का अनुमान है। बाहर से आने वाले किसी भी श्रद्धालु को कोई परेशानी न हो, इसके लिए शहर के लोग स्वेच्छा से अपने-अपने निर्माण पीछे हटा रहे हैं। डॉ. यादव ने कहा, "चाहे हिंदू हों, मुस्लिम हों या ईसाई—सभी वर्गों ने आगे आकर अपने घरों और यहाँ तक कि धार्मिक स्थलों को भी स्वेच्छा से पीछे हटाया है। पूरे देश के सामने उज्जैन ने एकजुटता और त्याग का एक अनूठा उदाहरण पेश किया है।
मास्टर प्लान की जद में 272 इमारतें
उज्जैन नगर निगम और प्रशासन के मास्टर प्लान के मुताबिक:
मार्ग: खजूर वाली मस्जिद से अब्दालपुरा, जीवाजीगंज थाना होते हुए गणेश चौक तक का मार्ग।
लंबाई व चौड़ाई: लगभग 730 मीटर लंबे इस रास्ते को 15 मीटर तक चौड़ा किया जाना है।
प्रभावित संपत्ति: इस प्रक्रिया में कुल 272 भवन जद में आ रहे हैं।
विशेष बात यह है कि इस चौड़ीकरण में केवल आम जनता ही नहीं, बल्कि जनप्रतिनिधि भी मिसाल बन रहे हैं। मुख्यमंत्री के मकान के साथ-साथ नगर निगम सभापति कलावती यादव और भाजपा नगर उपाध्यक्ष जगदीश पांचाल के घरों का हिस्सा भी इस परियोजना से प्रभावित हो रहा है, जिसे वे खुद से हटाने में सहयोग दे रहे हैं।

