Collector Jandarshan: महासमुंद जिला मुख्यालय में आयोजित साप्ताहिक जनदर्शन में जमीन से जुड़े दो अलग-अलग मामले सामने आए। ग्राम लाफिन खुर्द की 70 वर्षीय महिला ने आर्थिक तंगी और कृषि कार्य करने में असमर्थता का हवाला देते हुए सीलिंग कृषि भूमि बेचने की अनुमति मांगी है। वहीं, ग्राम कौवाझर में करीब 30 एकड़ शासकीय सुरक्षित वन भूमि पर कथित अतिक्रमण और सरकारी जमीन के रिकॉर्ड में अनियमितताओं को लेकर शिकायत दर्ज कराई गई है। दोनों मामलों में आवेदकों ने प्रशासन से नियमानुसार कार्रवाई करने की मांग की है।
आर्थिक तंगी से जूझ रही बुजुर्ग महिला ने मांगी जमीन बेचने की अनुमति
ग्राम लाफिन खुर्द, तहसील एवं जिला महासमुंद निवासी हेमिन बाई पुरेना ने कलेक्टर को आवेदन देकर अपने नाम दर्ज सीलिंग कृषि भूमि को बेचने की अनुमति देने की मांग की है। आवेदन के अनुसार, उनके नाम पर गांव में खसरा नंबर 756, रकबा 0.20 हेक्टेयर कृषि भूमि दर्ज है।
हेमिन बाई ने आवेदन में बताया कि उनकी आर्थिक स्थिति कमजोर है। जमीन नाले के किनारे स्थित होने के कारण हर साल कटाव हो रहा है, जिससे भूमि का रकबा घट रहा है और फसल को भी नुकसान पहुंच रहा है। भूमि को रेग यानी कृषि कार्य के लिए किराये पर लेने के इच्छुक लोग भी नहीं मिल रहे हैं।
खेती करने में नहीं हैं सक्षम
आवेदन में उन्होंने बताया कि उम्र अधिक होने के कारण वह और उनके पति अब खेती करने में सक्षम नहीं हैं। आर्थिक परेशानियों के बीच कृषि भूमि को बेचने की आवश्यकता है। महिला का कहना है कि वह पहले भी जमीन बेचने की अनुमति के लिए आवेदन कर चुकी हैं, लेकिन प्रशासन की ओर से अब तक कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिला है। उन्होंने कलेक्टर से अपनी परिस्थितियों पर विचार करते हुए नियमानुसार भूमि विक्रय की अनुमति देने का आग्रह किया है। हालांकि, सीलिंग भूमि के विक्रय की अनुमति का निर्णय संबंधित नियमों और प्रशासनिक परीक्षण के आधार पर ही हो सकेगा।
कौवाझर में 30 एकड़ सुरक्षित वन भूमि पर कब्जे का आरोप
जनदर्शन में दूसरा मामला ग्राम कौवाझर, पटेवा से जुड़ा रहा। भाजपा पटेवा मंडल अध्यक्ष डिगेश्वरी डेविड चन्द्राकर और डेविड कुमार चन्द्राकर ने शासकीय सुरक्षित वन भूमि पर कथित अतिक्रमण और सरकारी जमीन के रिकॉर्ड में अनियमितताओं को लेकर लिखित शिकायत सौंपी। आवेदकों के अनुसार, ग्राम कौवाझर के खसरा नंबर 399 की 11.850 हेक्टेयर यानी लगभग 30 एकड़ भूमि सरकारी रिकॉर्ड में सागौन एवं इमारती लकड़ियों के सुरक्षित जंगल के रूप में दर्ज है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि बेदराम, पिता राजाराम यादव, ने इस भूमि पर पहले पोल्ट्री फार्म बनाया था और अब वहां अतिरिक्त निर्माण किया जा रहा है।
शिकायतकर्ताओं ने निर्माण पर रोक लगाने, भूमि का सीमांकन कराने और कथित अतिक्रमण की जांच कराकर नियमानुसार कार्रवाई करने की मांग की है। उन्होंने वन भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराकर उसकी सुरक्षा के लिए तार-घेरा लगाने का भी आग्रह किया है।
अन्य सरकारी जमीनों के रिकॉर्ड की जांच की मांग
आवेदन में ग्राम कौवाझर के खसरा नंबर 279/1, रकबा 2.600 हेक्टेयर और खसरा नंबर 279/2, रकबा 0.720 हेक्टेयर से संबंधित भूमि के रिकॉर्ड पर भी सवाल उठाए गए हैं। शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि राजस्व अधिकारियों की मिलीभगत और कथित लेन-देन के जरिए इन जमीनों को रघुनंदन, पिता एम.आर. मेहरा, के नाम दर्ज कराया गया। उन्होंने सागौन के पेड़ों वाली भूमि की कथित अवैध खरीद-बिक्री की जांच की मांग की है।
इसके अलावा, बेदराम के नाम दर्ज खसरा नंबर 397 की 0.800 हेक्टेयर भूमि की भी जांच कराने का आग्रह किया गया है। आवेदकों ने यह पता लगाने की मांग की है कि जमीन कब और किससे खरीदी गई तथा क्या इसका पूर्व में शासकीय वन भूमि के रूप में रिकॉर्ड रहा है।
सीमांकन, निर्माण रोकने और एफआईआर की मांग
शिकायतकर्ताओं ने वरिष्ठ अधिकारियों की टीम गठित कर ग्राम कौवाझर की शासकीय भूमियों का सीमांकन कराने की मांग की है। इसके लिए वर्ष 1975, 1980 और 1985 के बी-1, खसरा एवं नक्शे सहित पुराने राजस्व अभिलेखों की जांच करने का आग्रह किया गया है। आवेदन में खसरा नंबर 399 पर हो रहे कथित निर्माण को तत्काल रोकने, जांच में अतिक्रमण की पुष्टि होने पर नियमानुसार उसे हटाने और शासकीय वन भूमि की कथित अवैध खरीद-बिक्री या दस्तावेजी फर्जीवाड़े में संलिप्त पाए जाने वालों के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज करने की मांग भी की गई है।
फिलहाल, दोनों मामले जनदर्शन में प्रस्तुत आवेदनों और शिकायतों पर आधारित हैं। सीलिंग भूमि की बिक्री की अनुमति और कौवाझर की सरकारी जमीनों से जुड़े आरोपों पर प्रशासन की जांच तथा संबंधित विभागों का पक्ष सामने आने के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।







