कोयलीबेड़ा विकासखंड से शिक्षा व्यवस्था की ऐसी तस्वीर सामने आई है, जो दूरस्थ क्षेत्रों की जमीनी हकीकत को बयां करती है। यहां शिक्षक अपनी जिम्मेदारी निभाने के लिए हर दिन जान जोखिम में डालकर स्कूल पहुंच रहे हैं। लगातार हो रही बारिश के कारण क्षेत्र की कोटरी नदी उफान पर है। नदी का जलस्तर बढ़ने और तेज बहाव के बावजूद शिक्षक नाव के सहारे नदी पार कर बच्चों को पढ़ाने के लिए स्कूल पहुंच रहे हैं। बरसात के मौसम में कोयलीबेड़ा क्षेत्र में हर साल ऐसी स्थिति बनती है।
बारिश शुरू होते ही नदी-नाले भर जाते हैं और ग्रामीण इलाकों में आवागमन की समस्या बढ़ जाती है। ऐसे समय में सबसे बड़ी चुनौती उन शिक्षकों के सामने होती है, जो दूरदराज के गांवों में पदस्थ हैं। स्कूल समय पर पहुंचने के लिए उन्हें सुबह से ही संघर्ष शुरू करना पड़ता है। पहले नदी किनारे पहुंचकर नाव का इंतजार करना पड़ता है और फिर तेज बहाव के बीच नदी पार कर आगे का सफर तय करना पड़ता है।
नदी पार कर पहुंचते हैं स्कूल
कोयलीबेड़ा विकासखंड के कई इलाकों में सड़क और पुल-पुलिया जैसी सुविधाओं की कमी के कारण लोगों को प्राकृतिक बाधाओं का सामना करना पड़ता है। शिक्षकों को स्कूल पहुंचने के लिए कोटरी नदी पार करनी पड़ती है। कई बार नदी का बहाव इतना तेज होता है कि नाव से सफर करना भी बेहद जोखिम भरा हो जाता है। शिक्षकों के अनुसार, नदी पार करने के बाद भी उनकी परेशानी खत्म नहीं होती। उन्हें कई किलोमीटर तक पैदल चलकर स्कूल पहुंचना पड़ता है। बारिश के कारण रास्ते कीचड़ से भर जाते हैं और कई जगह फिसलन भी बढ़ जाती है। इसके बावजूद शिक्षक समय पर स्कूल पहुंचने की कोशिश करते हैं, ताकि बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो।
पत्थरों के बीच सफर आसान नहीं
कोटरी नदी में इस समय पानी का बहाव काफी तेज है। नदी में मौजूद बड़े-बड़े पत्थर और गहराई के कारण नाव चलाना भी चुनौतीपूर्ण हो जाता है। नदी पार करते समय हर पल दुर्घटना का खतरा बना रहता है। खराब मौसम और लगातार बारिश के बीच यह सफर शिक्षकों के लिए किसी परीक्षा से कम नहीं है। शिक्षकों का कहना है कि कई बार हालात देखकर डर भी लगता है, लेकिन बच्चों की पढ़ाई को देखते हुए उन्हें मजबूरी में यह जोखिम उठाना पड़ता है। कई शिक्षक वर्षों से इसी तरह बारिश के मौसम में नदी पार कर अपनी सेवाएं दे रहे हैं।हर दिन बना रहता है हादसे का डर
शिक्षकों ने अपनी परेशानी बताते हुए कहा कि नदी पार करते समय हमेशा अनहोनी की आशंका बनी रहती है। तेज पानी के बीच नाव का संतुलन बिगड़ने का खतरा रहता है। कई बार अचानक मौसम खराब होने से परेशानी और बढ़ जाती है।
उन्होंने बताया कि बरसात के दिनों में स्कूल पहुंचना केवल समय की चुनौती नहीं होती, बल्कि सुरक्षा का भी बड़ा सवाल होता है। कई बार नदी का जलस्तर इतना बढ़ जाता है कि पार करना मुश्किल हो जाता है। ऐसे समय में शिक्षक और ग्रामीण दोनों ही जोखिम उठाने को मजबूर होते हैं।
सुविधाओं की भी समस्या
कोयलीबेड़ा जैसे दूरस्थ क्षेत्रों में केवल आवागमन ही नहीं, बल्कि संचार व्यवस्था भी बड़ी समस्या बनी हुई है। बारिश के दौरान कई इलाकों में मोबाइल नेटवर्क काम करना बंद कर देता है। इसका असर ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज करने, विभागीय जानकारी भेजने और अन्य जरूरी कार्यों पर पड़ता है। शिक्षकों का कहना है कि कई बार नेटवर्क नहीं होने के कारण समय पर ऑनलाइन प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाती। इसके अलावा बिजली, सड़क और अन्य बुनियादी सुविधाओं की कमी भी ग्रामीण क्षेत्रों में परेशानी बढ़ाती है।
सुरक्षा व्यवस्था की मांग
नदी पार करने वाले शिक्षकों ने प्रशासन से सुरक्षा के इंतजाम करने की मांग की है। उनका कहना है कि कम से कम लाइफ जैकेट, सुरक्षित नाव और अन्य जरूरी संसाधन उपलब्ध कराए जाने चाहिए, ताकि किसी भी दुर्घटना की स्थिति में बचाव किया जा सके। शिक्षकों का कहना है कि यदि बारिश के मौसम में प्रशासन की ओर से विशेष व्यवस्था की जाए तो जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है। इसके साथ ही नदी पार करने के लिए स्थायी समाधान जैसे पुल निर्माण की जरूरत भी लंबे समय से महसूस की जा रही है।
खतरे से जूझ रहे गुरुजी
शिक्षकों का कहना है कि उनका उद्देश्य केवल बच्चों को बेहतर शिक्षा देना है। इसी जिम्मेदारी के कारण वे कठिन परिस्थितियों में भी स्कूल पहुंचते हैं। उनके लिए बच्चों की पढ़ाई सबसे महत्वपूर्ण है, लेकिन सुरक्षा की अनदेखी नहीं होनी चाहिए। दूरस्थ क्षेत्रों में तैनात शिक्षक कई बार ऐसी परिस्थितियों का सामना करते हैं, जिनकी कल्पना करना भी मुश्किल होता है। इसके बावजूद वे अपने कर्तव्य से पीछे नहीं हटते और बच्चों के भविष्य को बेहतर बनाने के लिए लगातार प्रयास करते रहते हैं।
तस्वीर उठा रही कई सवाल
कोयलीबेड़ा की यह तस्वीर केवल एक नदी पार करने की कहानी नहीं है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में मौजूद बुनियादी सुविधाओं की कमी को भी दिखाती है। आज भी कई इलाकों में शिक्षक और ग्रामीण बारिश के दिनों में प्राकृतिक बाधाओं से जूझते हैं। शिक्षा को हर बच्चे तक पहुंचाने के लिए केवल स्कूल और शिक्षक होना पर्याप्त नहीं है, बल्कि सुरक्षित पहुंच मार्ग और जरूरी सुविधाएं भी जरूरी हैं।
कोयलीबेड़ा में सामने आई यह स्थिति प्रशासन के लिए एक बड़ा सवाल है कि आखिर कब तक शिक्षक और ग्रामीण अपनी जान जोखिम में डालकर इस तरह का सफर तय करते रहेंगे। स्थायी पुल, बेहतर सड़क और सुरक्षा संसाधनों की व्यवस्था होने से न केवल शिक्षकों को राहत मिलेगी, बल्कि बच्चों की शिक्षा भी लगातार बेहतर तरीके से जारी रह सकेगी। फिलहाल शिक्षक हर दिन खतरे के बीच नदी पार कर अपने कर्तव्य को निभा रहे हैं।