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दरारों वाला जर्जर सरकारी स्कूल भवन
दरारों वाला जर्जर सरकारी स्कूल भवन
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बच्चों पर संकट : 3 साल में ही जर्जर हुआ 15 करोड़ का स्कूल, खतरे के साए में पढ़ने को मजबूर 800 छात्र 

रायपुर के दलदल सिवनी स्थित शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय का करोड़ों रुपये की लागत से बना भवन कुछ ही वर्षों में जर्जर हो गया है। धंसते फर्श दरकती दीवारों और कमजोर नींव के बीच करीब 800 विद्यार्थी जान जोखिम में डालकर पढ़ाई कर रहे हैं। भवन की स्थिति को लेकर अभिभावकों और विद्यार्थियों में चिंता बढ़ गई है, वहीं निर्माण गुणवत्ता और जिम्मेदार एजेंसियों पर भी गंभीर सवाल उठ रहे हैं।

कीर्तिमान डेस्क
कीर्तिमान डेस्क
25 Jun 2026, 10:16 AM
रायपुर

स्कूल की घंटी बजते ही बच्चे पढ़ाई की तैयारी नहीं, बल्कि अपनी सुरक्षा को लेकर चिंतित हो जाते हैं। रायपुर के दलदल सिवनी स्थित शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में पढ़ने वाले विद्यार्थियों का कहना है कि स्कूल परिसर में प्रवेश करते ही उनके मन में यही सवाल उठता है कि क्या वे आज सुरक्षित घर लौट पाएंगे। यह किसी कल्पना की कहानी नहीं, बल्कि उस स्कूल की वास्तविक स्थिति है, जहां सैकड़ों छात्र-छात्राएं रोज पढ़ाई करने पहुंचते हैं। पहली नजर में स्कूल भवन नया और आकर्षक दिखाई देता है, लेकिन भीतर की तस्वीर बेहद चिंताजनक है। कई जगह फर्श धंस चुका है, दीवारों और नींव में चौड़ी दरारें पड़ गई हैं। भवन की स्थिति देखकर ऐसा लगता है कि यदि समय रहते सुधार नहीं किया गया तो कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। हैरानी की बात यह है कि मुख्य भवन महज तीन साल पुराना है, जबकि अतिरिक्त कक्ष भी करीब दो साल पहले ही बनाए गए थे।

800 विद्यार्थियों की पढ़ाई पर मंडरा रहा संकट

स्कूल में करीब 800 विद्यार्थी अध्ययनरत हैं और हर साल प्रवेश लेने वाले छात्रों की संख्या बढ़ रही है। लेकिन सुरक्षित माहौल के अभाव में पढ़ाई प्रभावित हो रही है। कई कमरों से बेंच और कुर्सियां बाहर निकाल दी गई हैं। शिक्षक भी बरामदों में बैठकर कक्षाएं लेने को मजबूर हैं। जिन कमरों में बच्चे बैठते हैं, वहां भी लगातार खतरे की आशंका बनी रहती है। स्कूल के छात्रों का कहना है कि पिछले एक साल में भवन की हालत तेजी से बिगड़ी है। कई जगह फर्श पर पैर रखते ही जमीन धंस जाती है, जिससे कुछ बच्चों को चोट भी लग चुकी है। दीवारों में बढ़ती दरारें और खराब होती संरचना के कारण तेज हवा, बारिश या आंधी के दौरान डर और बढ़ जाता है। विद्यार्थियों का कहना है कि कई बार वे आपस में चर्चा करते हैं कि कहीं आज भवन गिर न जाए। उनका कहना है कि वे स्कूल छोड़ना नहीं चाहते, लेकिन सुरक्षित वातावरण में पढ़ाई करने का अधिकार जरूर चाहते हैं। 

शिक्षकों की भी बढ़ी चिंता

स्कूल के शिक्षक भी भवन की मौजूदा स्थिति को लेकर चिंतित हैं। कई कक्षाओं का उपयोग सीमित कर दिया गया है और जहां संभव हो, वैकल्पिक स्थानों पर पढ़ाई कराई जा रही है। इससे शैक्षणिक व्यवस्था भी प्रभावित हो रही है। इस पूरे मामले ने कई अहम सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि भवन की स्थिति लगातार खराब हो रही थी तो इसकी सूचना समय रहते संबंधित अधिकारियों तक क्यों नहीं पहुंची? गर्मी की छुट्टियों के दौरान मरम्मत या तकनीकी जांच क्यों नहीं कराई गई? करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद भवन इतनी जल्दी जर्जर कैसे हो गया? इन सवालों के जवाब अब तक सामने नहीं आए हैं।

बच्चों की सुरक्षा सबसे बड़ी प्राथमिकता

सरकार शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने और आधुनिक सुविधाओं वाले स्कूलों की बात करती है, लेकिन दलदल सिवनी के इस विद्यालय की स्थिति कई सवाल खड़े करती है। यहां पढ़ने वाले बच्चे आज भी शिक्षा पाने की इच्छा के साथ स्कूल पहुंच रहे हैं, लेकिन उनके सिर पर असुरक्षित भवन का खतरा लगातार मंडरा रहा है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि इन मासूम विद्यार्थियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए जिम्मेदार विभाग कब तक ठोस कदम उठाएंगे। स्कूल की हालत को देखते हुए स्थानीय लोगों और अभिभावकों में भी चिंता बढ़ गई है। उनका कहना है कि पूरे मामले की तकनीकी जांच कराई जाए और यदि निर्माण में किसी तरह की लापरवाही या अनियमितता सामने आती है तो जिम्मेदार अधिकारियों और एजेंसियों पर कार्रवाई होनी चाहिए। 

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