Critical Minerals Roadshow: क्रिटिकल और स्ट्रेटेजिक मिनरल्स रोड शो के लिए छत्तीसगढ़ का चयन किए जाने पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने केंद्र सरकार का आभार जताया है। उन्होंने कहा कि देश के लिए खनिज क्षेत्र में आत्मनिर्भर होना समय की जरूरत है और क्रिटिकल मिनरल्स इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
मुख्यमंत्री ने मीडिया से बातचीत में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश रणनीतिक खनिजों के इस्तेमाल को बढ़ावा दे रहा है। रक्षा क्षेत्र से लेकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्लीन एनर्जी और आधुनिक मैन्युफैक्चरिंग तक इन खनिजों की मांग तेजी से बढ़ रही है।
छत्तीसगढ़ के लिए बड़ा अवसर
सीएम साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ के पास क्रिटिकल मिनरल्स के क्षेत्र में आगे बढ़ने की पर्याप्त क्षमता है। प्रदेश में 5 क्रिटिकल मिनरल्स की नीलामी की प्रक्रिया चल रही है, जिसे उन्होंने राज्य के लिए बड़ा अवसर बताया। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में क्रिटिकल मिनरल्स का महत्व सोने-चांदी जैसे पारंपरिक खनिजों से भी अधिक हो सकता है। छत्तीसगढ़ इन संसाधनों के जरिए देश की जरूरतों के साथ वैश्विक सप्लाई चेन में भी अपनी भूमिका मजबूत कर सकता है।
नई उद्योग नीति में भी फोकस
मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य की नई उद्योग नीति में भी क्रिटिकल मिनरल्स से जुड़े उद्योगों को प्राथमिकता दी जा रही है। इसका फायदा छत्तीसगढ़ में निवेश करने वाले उद्योगों और स्थानीय निवेशकों को आने वाले समय में मिलने की उम्मीद है। उन्होंने बताया कि पिछले ढाई वर्षों में खनिज क्षेत्र से राज्य का राजस्व 12 हजार करोड़ रुपए से बढ़कर 16 हजार करोड़ रुपए हो गया है। मुख्यमंत्री ने उद्योगपतियों से क्रिटिकल मिनरल्स की नीलामी में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने की अपील की।
निवेश के साथ पर्यावरण संरक्षण पर जोर
सीएम साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध राज्य है और यहां निवेश की काफी संभावनाएं हैं। कमर्शियल माइनिंग के क्षेत्र में केंद्र सरकार की ओर से निवेशकों को निर्धारित अवधि के लिए जरूरी सुविधाएं और छूट भी दी जा रही हैं। हालांकि, सरकार खनन और औद्योगिक निवेश के साथ पर्यावरण संरक्षण को भी प्राथमिकता दे रही है। मुख्यमंत्री ने निवेशकों से पौधरोपण और पर्यावरण संरक्षण के लिए जरूरी कदम उठाने की उम्मीद जताई।
उन्होंने कहा कि माइनिंग सेक्टर में निवेश बढ़ने से सिर्फ राज्य के राजस्व में वृद्धि नहीं होगी, बल्कि आदिवासी, ग्रामीण और स्थानीय आबादी के लिए रोजगार और विकास के नए अवसर भी तैयार होंगे।

